उदयपुर । विद्यार्थियों में बौद्धिक क्षमता के साथ कौशल और शारीरिक विकास का समन्वय कर ऐसी सशक्त पीढ़ी तैयार की जा सकती है, जो राष्ट्र को प्रगति के शिखर तक ले जाए। शिक्षकों को पुरातन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का आह्वान करते हुए कहा कि यही समग्र शिक्षा का आधार है।
उक्त विचार मंगलवार को राजस्थान विद्यापीठ एवं एसोसिएशन आॅफ इंडियन युनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘ स्वदेशी, आर्थिक देश भक्ति और तकनीकी राष्ट्रवाद के माध्यम से आत्म निर्भर भारत ’’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय वेस्ट जोन वाइस चांसलर सम्मेलन में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए।
राज्यपाल ने औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली के प्रभाव को शिक्षित बेरोजगारी का प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि शिक्षा को जीवनोपयोगी और राष्ट्रोन्मुख बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने गरीबी उन्मूलन में शिक्षा की निर्णायक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होने कहा कि षिक्षा गरीबी हटाने का सबसे बड़ा हथियार है। जिसमें षिक्षकों की बड़ी भूमिका है।
बागड़े ने कहा कि हमारा देष विष्व गुरू था और रहेगा। षिक्षा के माध्यम से ही देष की गरीबी को दूर किया जा सकता है।
षिक्षक हनुमान तो मैं जामवंत हॅू - बागडे
कार्यक्रम में बागडे ने षिक्षकों में निहित षक्तियों का आह्वान करते हुए कहा कि षिक्षक अन्नत षक्तियों से युक्त है किन्तु उन षक्तियों के उपयोग के लिए उन्हें याद दिलाए जाने की आवष्यकता है और आज में इसीलिए जामवंत की भूमिका में हूं और सभी षिक्षकों में उनकी क्षमताओं की स्मृति जागृत कर रहा हूं ताकि वो हनुमान की ही तरह असंभव और विराट कार्य भी आसानी से पूरे कर सके।
विद्यार्थी को केन्द्र मान षिक्षा को बढाये आगे - बागडे़
बागडे़ ने कहा कि षिक्षकों को विद्यार्थी को केन्द्र बिन्दु मानकर षिक्षा कार्य को आगे बढाना चाहिये। विद्यार्थियों को षिक्षा के सभी पक्षों का ज्ञान करवाया जाना सबसे अहम कार्य है। इसके सकारात्मक और दूरगामी परिणाम हम सभी को देष की उन्नति के रूप में देखने को मिलेंगे,लेकिन आवष्यकता है कि षिक्षा के सभी पक्षों और कार्यों के केन्द्र में विद्यार्थी रहेगा।
राज्यपाल बागडे के विद्यापीठ परिसर पहुंचने पर एनसीसी केेडेट्स ने बार्ड आॅफ आॅनर दिया। समारोह का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माॅ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजली एवं दीप प्रज्जवलित कर किया।
विद्यापीठ के गेस्ट हाउस में किया विश्राम:-
राज्यपाल बागडे जी दोपहर भोज के पश्चात प्रतापनगर स्थित गेस्ट हाउस पहुंचे जहाॅ कुछ देर रूकने के बाद दोपहर 04 बजे पुनः एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए।
स्वदेशी विचारों से ही आत्मनिर्भर भारत का निर्माण - प्रो. मंजू बाघमार
स्वदेशी और नवाचार से ही मजबूत होगी भारत की वैश्विक पहचान- डॉ. मंजू बाघमार
महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री प्रो. मंजू बाघमार ने कहा कि राष्ट्र की वास्तविक शक्ति अनुसंधान, नवाचार और सजग नागरिक निर्णयों में निहित है। उन्होंने स्वदेशी, आर्थिक राष्ट्रवाद और तकनीकी राष्ट्रवाद को भारत की प्रगति का आधार बताते हुए कहा कि इन विचारों के प्रभावी क्रियान्वयन से देश वैश्विक मंच पर सशक्त उपस्थिति दर्ज करा सकता है।
सहकारिता और सामाजिक सरोकारों से सशक्त होगी शिक्षा - प्रो. सारंगदेवोत
प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. एस एस सारंगदेवोत ने सहकारिता आधारित मॉडल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों को समाज के साथ गहरे जुड़ाव के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने के केंद्र न बनकर सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनें। प्रो. सारंगदेवोत ने विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और स्वावलंबन की भावना विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि सहकारिता, कौशल और नवाचार का समन्वय ही सशक्त भारत की नींव रखेगा।
वंचित वर्ग तक षिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य - कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर
कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने संस्थान के विकास यात्रा को बताते हुए कहा कि वंचित वर्ग तक षिक्षा की अलख जगाने के उद्देष्य से 1937 में पांच कार्यकर्ता एवं तीन रूपये के बजट से स्थापित संस्थान का आज 87 करोड़ का वार्षिक बजट है। 100 से अधिक पाठ्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है जिसमें 11 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत् है।
भारतीय ज्ञान प्रणाली को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता - प्रो. विनय पाठक
भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. विनय पाठक ने कहा कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान परंपराओं की उपेक्षा के कारण ही आज स्वदेशी शिक्षा प्रणाली को पुनरस्थापित करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। उन्होंने स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन, नवाचार आधारित शिक्षा और उत्पाद निर्माण को उच्च शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया।
स्वदेशी से आत्मनिर्भरता की ओर - प्रो. गौरव वल्लभ
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के सदस्य प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में आत्मनिर्भरता अनिवार्य हो गई है। उन्होंने स्वदेशी उत्पादन, निर्यात संवर्धन और अनुसंधान आधारित शिक्षा को आर्थिक एवं तकनीकी राष्ट्रवाद का मूल आधार बताया।
एआईयू की पहल और वैश्विक दृष्टि - डाॅ. पंकज मित्तल
भारतीय विश्वविद्यालय संघ की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल ने एआईयू की कार्यप्रणाली, विश्वविद्यालयों के अंतरराष्ट्रीयकरण और भारतीय विद्यार्थियों के वैश्विक प्रवाह पर प्रकाश डालते हुए स्वदेशी शिक्षा के विस्तार की संभावनाओं को रेखांकित किया।
समारोह में अतिथियों द्वारा एआईयू की पत्रिका “यूनिवर्सिटी न्यूज” का विशेष अंक का विमोचन किया गया।
आयोजन सचिव प्रो. युवराज सिंह राठौड़ ने बताया कि विद्यापीठ की मेजबानी में पहली बार आयोजित हो रही कान्फे्रंस में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, तेलंगाना के 150 से कुलगुरू आॅफलाईन व 160 से अधिक आॅफलाईन शिरकत कर रहे है। समापन समारोह बुधवार को दोेपहर 01 बजे आयोजित किया जायेगा।
समारोह के मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष प्रो. वासुदेव देवनानी, विशिष्ठ अतिथि शिक्ष संस्कृति उत्थन न्यास नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डाॅ. अनुल कोठारी, राजेन्द्र सिंह शेखावत होंगे।
स्वदेशी शिक्षा व्यवस्था पर तकनीकी सत्र का आयोजन
सम्मेलन के दौरान कई तकनीकी सत्र आयोजित हुए। पहले तकनीकी सत्र का विषय “स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा व्यवस्था का पुनर्रचना” रखा गया , जिसकी अध्यक्षता प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने की। इस सत्र में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी अहमदाबाद के कुलपति प्रो. अमी उमाकांत उपाध्याय, एटलस स्किल टेक यूनिवर्सिटी मुंबई के कुलपति प्रो. राजन वेलुकर तथा महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय बड़ौदा के कुलपति प्रो. भालचंद्र एम. भनागे अपने विचार रखें। इस सत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा, स्थानीय उद्योगों से जुड़ी शिक्षा तथा कौशल आधारित पाठ्यक्रमों के विकास पर चर्चा हुई।
स्वदेशी तकनीक और अनुसंधान पर चर्चा
दूसरे तकनीकी सत्र का विषय “स्वदेशी तकनीकों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा” रखा गया है, जिसकी अध्यक्षता सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ गुजरात के कुलपति प्रो. अतनु भट्टाचार्य ने की। इस सत्र में गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. राजुल के. गज्जर, डॉ. डी.वाई. पाटिल विद्यापीठ पुणे के कुलपति प्रो. एन. जे. पवार तथा राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज जयपुर के कुलपति प्रो. प्रमोद येओले वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किये। वक्ताओं द्वारा स्वदेशी तकनीक, अनुसंधान सहयोग, स्टार्टअप इकोसिस्टम तथा उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
शताब्दी व्याख्यान में गौतम बुद्ध विवि उत्तर प्रदेश के पूर्व कुलपति भगवती प्रसाद शर्मा आर्थिक राष्ट्रवाद में भारत में निर्मित और भारत में निर्मित के विचार को आधार बना कर विचार साझा किए और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ अतुल कोठरी ने स्वदेशी शिक्षा दर्शन विचार व्यक्त किये।
संयोजन डाॅ. अनिता राठौड , डाॅ. सोनिया चाह ने किया जबकि आभार डाॅ. युवराज सिंह राठौड ने जताया।
इस मौके पर कुलपति प्रो. एनके पंवार, प्रो. बीएल वर्मा, प्रो. अमी उमाकांत उपाध्याय, प्रो. देव स्वरूप, प्रो. कल्पना कतजा, प्रो. हरप्रित कोर, प्रो. प्रमोद योले, प्रो. केएस ठाकुर, प्रो. एसएल गोदारा, प्रो. प्रतापसिंह चैहान, प्रो. पियुष गांधी, प्रो. रजुल पी गज्जर, प्रो. बी काले, प्रो. जीके सिरूदे, प्रो. केएल वर्मा, प्रो. बीपी सारस्वत, प्रो. एमएम सक्सेना, प्रो. एसपी सिंह, प्रो. एसपी सिंह, पूर्व कुलपति प्रो. केलाष सौडानी, भूपाल नोबल्स विद्या प्रचारिणी सभा के मंत्री प्रो. महेन्द्र सिंह आगरिया, एडवोकेट सुषील सतारवला, रजिस्ट्रार डाॅ. तरूण श्रीमाली, पीठ स्थविर डाॅ. कौषल नागदा, डाॅ. विजेन्द्र कुमार, प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. गजेन्द्र माथुर, प्रो. मंजु मांडोत, प्रो. पारस जैन, डाॅ. हीना खान, डाॅ. निरू राठौड, डाॅ. अमिया गोस्वामी, डाॅ. शैलेन्द्र मेहता, प्रो. बलिदान जैन, प्रो. रचना राठौड, प्रो. अमी राठौड, प्रो. सुनिता मुर्डिया, प्रो. भूरालाल श्रीमाली, डाॅ. एसबी नागर सहित वेस्ट जोन से आये कुलपति एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।