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कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत का किया सम्मान

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08 Jun 26
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कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत का किया सम्मान

उदयपुर। राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति कर्नल प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत के कुलपति पद पर 14 वर्ष पूर्ण कर 15वें वर्ष में प्रवेश करने पर सोमवार को प्रतापनगर स्थित आईटी सभागार में अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर शहर के सामाजिक, राजनीतिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित विद्यापीठ के तीनों परिसरों के कार्यकर्ताओं ने प्रो. सारंगदेवोत का पगड़ी, उपरणा एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया। दिनभर कुलपति कार्यालय में शुभकामनाएं देने वालों का जमावड़ा लगा रहा।

समारोह में राजस्थान विद्यापीठ के कुलाधिपति श्रीयुत् भंवर लाल गुर्जर ने प्रो. सारंगदेवोत को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रो. सारंगदेवोत ने अपना पूरा जीवन विद्यापीठ को समर्पित कर दिया, उनके नेतृत्व में विद्यापीठ ने राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि संस्थापक पं. जनार्दन राय नागर के सपनों को साकार करने की दिशा में विश्वविद्यालय निरंतर आगे बढ़ रहा है और कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। विद्यापीठ के निष्ठावान एवं ईमानदार कार्यकर्ताओं की बदौलत विद्यापीठ सर्वोच्च शिखर पहंुची है। समारोह में सभी कार्यकर्ताओं ने आगामी नेक में ए प्लस लाने का संकल्प लिया।

श्री गुर्जर ने बताया कि वर्तमान में विद्यापीठ द्वारा 69 से अधिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं तथा सभी पाठ्यक्रम यूजीसी से मान्यता प्राप्त हैं। विद्यापीठ भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक शिक्षा एवं संस्कार आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर एवं राष्ट्र निर्माण के योग्य बनाने की दिशा में सतत कार्य कर रहा है।

समर्पित एवं निष्ठावान कार्यकर्ता मेरी पूंजी - प्रो. सारंगदेवोत

इससे पूर्व प्रो. सारंगदेवोत ने प्रतापनगर परिसर में स्थापित संस्थापक जनुभाई की आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन। इस अवसर पर उन्होंने अपने 14 वर्षों के कार्यकाल को विद्यापीठ के समर्पित एवं निष्ठावान कार्यकर्ताओं को समर्पित करते हुए कहा कि 02 जून, 2012 को विपरित परिस्थितियों में राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति के पद पर आसीन हुआ, चुनौतियॉ बड़ी थी लेकिन समर्पित, ईमानदार एवं कर्तव्य निष्ठ कार्यकर्ताओं के अथाह परिश्रम के कारण चुनौतियों को अवसर में बदला और संस्था को आज इस मुकाम पर पहुंचाया है।

प्रो. सारंगदेवोत ने कहा, “संस्था के निष्ठावान एवं समर्पित कार्यकर्ता ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी हैं। कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर के विश्वास, शुभचिंतकों के सहयोग एवं कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम के कारण ही विद्यापीठ आज इस मुकाम तक पहुंच पाया है। पिछले 14 वर्षों में कार्यकर्ताओं ने निस्वार्थ भाव से कंधे से कंधा मिलाकर हर परिस्थिति में साथ दिया, जिसके परिणामस्वरूप विद्यापीठ आज देश ही नहीं बल्कि विश्व पटल पर अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।”

उन्होंने कहा कि शिक्षा एवं चिकित्सा के क्षेत्र में विद्यापीठ ने कई नए आयाम स्थापित किए हैं। इस दौरान विधि महाविद्यालय, बीएससी नर्सिंग, जीएनएम, फार्मेसी, हॉस्पिटल, एग्रीकल्चर संकाय, दो परिसरों में कन्या महाविद्यालय, ज्योतिष एवं वास्तु विभाग, होटल मैनेजमेंट, विज्ञान महाविद्यालय तथा सायंकालीन महाविद्यालय की पुनर्स्थापना जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए गए। इसके साथ ही संस्थान ने आईआईआरएफ रैंकिंग में राजस्थान में प्रथम स्थान तथा यूनिरैंक में उदयपुर में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

प्रो. सारंगदेवोत ने बताया कि विद्यापीठ के नाम 150 से अधिक पेटेंट दर्ज हैं तथा विद्यार्थियों के लिए 150 बेड का अत्याधुनिक छात्रावास एवं खेल मैदान जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। उन्होंने कहा कि पं. जनार्दन राय नागर ने 21 अगस्त 1937 को मात्र तीन रुपये एवं किराये के भवन में पांच कार्यकर्ताओं के साथ जिस संस्था की शुरुआत की थी, वह आज 80 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट एवं 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों के साथ विशाल वटवृक्ष बन चुकी है।
इन्होंने किया सम्बोधित:-

सम्मान समारेाह में पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा, रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, परीक्षा नियंत्रक प्रो. पारस जैन, प्रो. मलय पानेरी, प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. जीवन सिंह खरकवाल, डॉ. धमेन्द्र राजौरा, प्रो. लाला राम जाट,  डॉ. धीरज प्रकाश जोशी, डॉ. बबीता रशीद, डॉ. शैलेन्द्र मेहता, डॉ. हीना खान ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

संचालन डॉ. धमेन्द्र राजौरा ने किया जबकि आभार रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली ने जताया।

इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा, प्रो. जीएम मेहता, डॉ. युवराज सिंह राठौड़, प्रवीण गुर्जर, प्रो. सरोज गर्ग,  डॉ. भवानीपाल सिंह राठौड, डॉ. धमेन्द्र राजौरा, प्रो. अवनीश नागर, प्रो. हेमेन्द्र चौधरी, प्रो. लाला राम जाट, प्रो. अमी राठौड, प्रो. रचना राठौड, डॉ. सुनिता मुर्डिया, प्रो. बलिदान जैन, डॉ. शेलेन्द्र मेहता, डॉ. हीना खान, डॉ. नीरू राठौड, डॉ. भारत सिंह देवडा, डॉ. सपना श्रीमाली, डॉ. दिपेश वत्स, डॉ. पंकज रावल, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, प्रो. रचना राठौड, डॉ. भूरालाल श्रीमाली, डॉ. आशीष डी नंदवाना, डॉ. पंकज रावल, डॉ. गजेन्द्र सिंह राठौड, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, डॉ. गुणबाला आमेटा, डॉ. सपना श्रीमाली, डॉ. देवेन्द्र सिंह राव, डॉ. धीरेन्द्र, डॉ. शाहिद कुरैशी, डॉ. चन्द्रेश छतलानी, डॉ. दिनेश श्रीमाली, डॉ. संजीव राजपुरोहित, डॉ. जयसिंह जोधा, डॉ. ओम पारीक, डॉ. विजय दलाल, भगवती लाल श्रीमाली,  जितेन्द्र सिंह चौहान,  उमराव सिंह राणावत, सुरेश चावरिया, डॉ. नजमुद्दीन, लहरनाथ,  सहित विद्यापीठ के डीन डायरेक्टर ने माला पहना कर स्वागत किया।
 


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