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शिल्पग्राम के आंगन में गूंजी प्रभात की राग-रागिनियां

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27 Jun 26
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शिल्पग्राम के आंगन में गूंजी प्रभात की राग-रागिनियां

स्वर-प्रभात में कर्नाटक गायन, हवेली संगीत और सारंगी वादन ने बांधा समां
उदयपुर।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर एवं संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार प्रातः शिल्पग्राम के आंगन में प्रभातकालीन रागों पर आधारित शास्त्रीय संगीत समारोह स्वर-प्रभात का आयोजन किया गया। उगते सूर्य की प्रथम किरणों के साथ प्रस्तुत भोर की राग-रागिनियों ने शिल्पग्राम परिसर को आध्यात्मिक एवं संगीतमय वातावरण से सराबोर कर दिया।

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन महेश दलवी ने बताया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत में प्रभातकालीन रागों का विशेष महत्व है। इन रागों की प्रस्तुति मन में शांति, एकाग्रता तथा आध्यात्मिक चेतना का संचार करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। प्रथम प्रस्तुति अहमदाबाद के प्रसिद्ध कर्नाटक संगीत गायक श्री जयन नायर ने दी। उन्होंने अपनी मधुर एवं भावपूर्ण गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सर्वप्रथम राग रेवगुप्ती से अपनी प्रस्तुति का शुभारंभ किया। इसके पश्चात राग गौरी मनोहारी में श्री नारायण वचन पर आधारित मलयालम भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आगे राग पीलू में श्रीकृष्ण भजन की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, वहीं समापन राग सिंधु भैरवी में भगवान शंकर को समर्पित भजन के साथ किया। उनके साथ तबले पर जोबी जॉय, मृदंगम पर मानव नायर, बांसुरी पर पार्था सरकार तथा हारमोनियम पर अंबरीश अय्यर ने प्रभावशाली संगत प्रदान की।

इसके पश्चात उदयपुर के सुप्रसिद्ध सारंगी वादक श्री भगवती प्रसाद ब्यावत ने अपनी मनोहारी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने राग बिलासखानी तोड़ी में आलाप, जोड़ एवं द्रुत तीनताल की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। इसके उपरांत राग भैरवी की मधुर स्वरलहरियों से कार्यक्रम का वातावरण संगीतमय एवं भावविभोर बना दिया। उनके साथ तबले पर ओम कुमावत तथा पखावज पर यशोदानंदन कुमावत ने संगत की।

अहमदाबाद के आचार्य गोस्वामी रणछोड़लाल जी ने पारंपरिक हवेली संगीत में कार्यक्रम की अंतिम मनोहारी प्रस्तुति दी। उन्होंने राग भैरव में आलापचारी से अपनी प्रस्तुति का प्रारंभ किया। इसके पश्चात चौताल में भोर भए भाव सो..., राग रामकली में झपताल पर आधारित श्याम संग श्याम... तथा राग कालिंगड़ा में आदि ताल पर निबद्ध देखो देख री... की भावपूर्ण एवं शास्त्रीय प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ सारंगी पर अर्पित मंडाविया तथा पखावज पर हिरेन पारेख ने संगत की। भक्ति एवं शास्त्रीय संगीत के अद्भुत समन्वय ने श्रोताओं को आध्यात्मिक अनुभूति से अभिभूत कर दिया।
अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन केंद्र के सहायक निदेशक (वित्त एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी ने किया।
इस अवसर पर केंद्र के उप निदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, कार्यक्रम अधिशाषी हेमंत मेहता, राकेश मेहता, दयाराम सुथार, प्रभुलाल गायरी, दीपक नवलखा, सिद्धांत भटनागर, बी. एल. नलवाया सहित केन्द्र के अधिकारी-कर्मचारी, संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली से कार्यक्रम अधिशाषी संजय भारद्वाज, संगीत प्रेमी एवं बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।

कलाकार परिचय

श्री जयन नायर ने कर्नाटक संगीत की प्रारंभिक शिक्षा श्री शंकर नारायण नम्पूदिरी से तथा आगे की शिक्षा श्री कुंबाकोना एन. पुरुषोत्तमन से प्राप्त की। वे गोट्टुवाद्यम, हारमोनियम, वायलिन एवं तालवाद्यों के भी दक्ष कलाकार हैं। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (प्ब्ब्त्) के चयनित कलाकार के रूप में उन्होंने देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित संगीत समारोहों में प्रस्तुति दी है। वर्तमान में वे नृत्य कला केंद्र, अहमदाबाद में संगीत विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।

आचार्य गोस्वामी रणछोड़लाल जी जगद्गुरु श्री वल्लभाचार्य जी की परंपरा की 16वीं पीढ़ी के वंशज तथा पुष्टिमार्ग के प्रतिष्ठित आचार्य हैं। वे अहमदाबाद स्थित ऐतिहासिक श्री गोपीनाथजी ज्योतिषपीठ (गोस्वामी हवेली) के प्रमुख हैं। संगीत, साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में उनका विशिष्ट योगदान रहा है। उन्होंने ब्रजभाषा, संस्कृत, गुजराती सहित अनेक भाषाओं में 20,000 से अधिक भक्ति रचनाओं का सृजन एवं प्रकाशन किया है। धर्म, संगीत एवं संस्कृति पर उनके व्याख्यान एवं शोध कार्य व्यापक रूप से सराहे गए हैं। उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

श्री भगवती प्रसाद ब्यावत का जन्म एक प्रतिष्ठित संगीत परिवार में हुआ। उन्होंने सारंगी की शिक्षा किराना घराने के महान कलाकार पंडित राम नारायण जी से प्राप्त की। वे आकाशवाणी के मान्यता प्राप्त कलाकार हैं तथा भारत सरकार की राष्ट्रीय छात्रवृत्ति से भी सम्मानित हो चुके हैं। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत उन्होंने अनेक विद्यार्थियों को सारंगी का प्रशिक्षण दिया है तथा कई कार्यशालाओं का सफल संचालन किया है। संगीत के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें राजस्थान संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, राजस्थान फिल्म फेयर पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है।


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