उदयपुर। आयुर्ज्ञान योजना ने आयुष अनुसंधान को आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के साथ जोड़ते हुए साक्ष्य-आधारित उपचारों के विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। इससे आयुष पद्धतियों की विश्वसनीयता और वैश्विक स्वीकार्यता में वृद्धि हो रही है।
राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया गरासिया द्वारा आयुष मंत्रालय से आयुर्ज्ञान योजना के अंतर्गत आयुष पद्धतियों में अनुसंधान और नवाचार के संबध में पूछे गए अतारांकित प्रश्न पर आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुर्ज्ञान योजना के माध्यम से अनुसंधान के तहत आयुष औषधियों और फॉर्मूलेशन का मानकीकरण किया जा रहा है। नई औषधियों और उपचारों का विकास एवं सत्यापन, नैदानिक, औषधीय, साहित्यिक और मौलिक अनुसंधान, आधुनिक विज्ञान (जैव प्रौद्योगिकी, आणविक जीव विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी) के साथ आयुष ज्ञान का एकीकरण किया जा रहा है।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि इसको बढावा देने के लिए सतत चिकित्सा शिक्षा घटक के तहत 119 संस्थानों में 258 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर 7,557 आयुष कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। अनुसंधान एवं नवाचार घटक के अंतर्गत 34 अनुसंधान परियोजनाओं को सहायता दी गई। सहयोगात्मक अनुसंधान के तहत
एम्स, आईसीएमआर, एनआईपीईआर और अन्य विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर साक्ष्य-आधारित उपचार प्रोटोकॉल विकसित किए जा रहे हैं तथा राज्य-वार वित्तीय सहायता भी दी जा रही है।