नई दिल्ली/जयपुर। लोकसभा के 37वें अंतर्राष्ट्रीय विधायी मसौदा कार्यक्रम के तहत शनिवार को 17 देशों के 43 प्रतिभागियों ने जयपुर में राजस्थान विधान सभा का अवलोकन किया। साथ ही
विदेशी प्रतिभागियों के साथ राजस्थान विधान सभा के
सदस्यों की विधायी मसौदे पर चभी र्चा हुई।
इस अवसर पर राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इन्टरनेशनल लेजिस्लेटिव ड्रॉफ्टिंग विषय पर विधायी मसौदा तैयार करने के लिए आयोजित 37वें अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए
कहा है कि कानून निर्माण में विधायी मसौदा महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि विधायी मसौदे में स्पष्ट एवं सरल भाषा में जनता की इच्छाएं प्रतिबिंबित होनी चाहिए। स्पीकर देवनानी ने कहा कि राजस्थान विधान सभा में विधेयक को पारित कराने की प्रक्रिया अत्यन्त सावधानी पूर्वक और पारदर्शी तरीके से की जाती है। कानून में सर्वोत्तम गुणवत्ता के सभी पहलुओं का समावेश सुनिश्चित किया जाता है।
स्पीकर देवनानी शनिवार को जयपुर में राजस्थान विधान सभा में इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे।यह कार्यक्रम भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग योजना के अंतर्गत लोकसभा सचिवालय के पार्लियामेन्ट्री रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसिस द्वारा आयोजित किया गया। इसमें
बांग्लादेश, भूटान, घाना, केन्या, श्रीलंका, तंजानिया, जाम्बिया सहित अन्य देशों के प्रतिनिधि गण शामिल हुए।
विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने सभी 17 देशों के 43 प्रतिभागियों से परिचय प्राप्त किया और उनके साथ विधानसभा के प्रवेश द्वार पर एक सामूहिक चित्र भी खिंचवाया ।
*सरल भाषा न्याय का सार*
स्पीकर देवनानी ने कहा कि किसी भी विधेयक का प्रस्ताव की प्रक्रिया तीन मुख्य चरणों से गुजरती है। उन्होंने कहा कि विधेयक सदन में प्रस्तुत किया जाता है। द्वितीय चरण में विधेयक पर गहन चर्चा के साथ मसौदे को बेहतर बनाने के लिए अक्सर विशेष समितियों की मदद से हर पहलू का बारीकी से विश्लेषण कराये जाने के पश्चात सदन मतदान के लिए एकत्रित होता है। श्री देवनानी ने कहा कि कानून को सशक्त, समझने में आसान और वास्तव में जनता के हित में बनाने के लिए सम्पूर्ण प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक सुनिश्चित किया जाता है। स्पष्ट और सरल भाषा का प्रयोग ही न्याय का सार होता है।
*विधान सभा लोकतंत्र का सच्चा मंदिर*
स्पीकर देवनानी ने कहा कि राजस्थान विधान सभा लोकतंत्र का सच्चा मंदिर है। यहां सभी का एक साथ विकास करने और महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा कानून पारित कराये जाते है। विधान सभा अपने गौरवशाली स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रही है। राज्य के निर्माण के शुरुआती दिनों से लेकर आज के डिजिटल शासन के युग तक विधान सभा में लाखों लोगों के सपनों को कानून में तब्दील किये जाते है। 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधान सभा जनता की इच्छाओं को प्रतिबिंबित करने का कार्य करती है।
*भारत अपने अमृतकाल में आगे बढ़ता हुआ*
स्पीकर देवनानी ने कहा कि अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाते हुए भारत अब अमृतकाल के मार्ग की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों की विशेष यात्रा के साथ भारत 2047 में स्वतंत्रता की 100 वीं वर्षगांठ मनायेगा। यह समय हमारे राष्ट्र के लिए आत्म निरीक्षण करने और भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का है।
*गुलाबी शहर का गुलाबी सदन पूरे देश के लिए आदर्श*
स्पीकर श्री देवनानी ने कहा कि गुलाबी शहर जयपुर का गुलाबी सदन राजस्थान विधान सभा पूरे देश के लिए आदर्श बन गया है। उन्होंने कहा कि विधान सभा ने सभी विधायी अभिलेखों को डिजिटाइज करके सुदृढ भविष्य को सुनिश्चित कर लिया है। यह परिवर्तन केवल कम्प्यूटर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ाने और शासन को गति देने से भी संबंधित है। पारम्परिक राजस्थानी शैली और आधुनिक आवश्यकताओं के अनूठे मिश्रण के साथ विधान सभा भवन को सुंदर तरीके से बनाया गया है।
*जनता का सेतु संग्रहालय*
स्पीकर देवनानी ने कहा कि विधान सभा का महत्वपूर्ण हिस्सा आधुनिक डिजिटल संग्रहालय है। यह संग्रहालय जनता विशेषकर युवाओं से जुड़ने का एक सेतु है। यह राज्य की लोकतांत्रिक यात्रा और इतिहास को जानने का अवसर प्रदान करता है। साथ ही सदन के कार्यों को समझने का एक माध्यम भी है तथा कानून निर्माण की प्रक्रिया को जनता के करीब लाता है।
*पधारो म्हारे देश की भावना*
स्पीकर देवनानी ने विदेशी प्रतिभागियों से कहा कि राजस्थान विधान सभा के वरिष्ठ और अनुभवी विधायकों के साथ चर्चा विधायी ज्ञान को बढ़ाएगी। ऐसे कार्यक्रम किताबों से परे जाकर अनुभव जानने के दुर्लभ अवसर हैं और संसदीय प्रक्रिया का वास्तविक ज्ञान भी होते हैं । कानून बनाना शासन की वैश्विक भाषा है, जिसे साझा करके हम सभी दुनियाभर में लोकतंत्र को मजबूत बनाने में सहभागी बनेंगे। देवनानी ने कहा कि विदेशी प्रतिभागी पधारो म्हारे देश की भावना को अपनी भारत की यात्रा से बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग, प्रतिपक्ष के मुख्य सचेतक रफीक खान, विधायक डॉ. गोपाल शर्मा, चन्द्रभान सिंह आक्या, कैलाश वर्मा, गुरवीर सिंह, डॉ. शिखा मील बराला आदि भी मौजूद थे। प्रारंभ में राजस्थान विधान सभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा, लोकसभा के प्राइड कार्यक्रम के निदेशक राजकुमार और कार्यक्रम निदेशक के. एम. चतुर्वेदी ने 37वें प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी दी। भूटान की नेशनल एसेम्बली सचिवालय की विधायी अधिकारी फूर्पा डेमा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
*प्रतिभागियों ने प्रश्न, विधायकों के जवाब*
तंजानिया, केन्या और मलेशिया के प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के दौरान केंद्र और राज्य के विषय, महिला आरक्षण, दल-बदल विरोध अधिनियम तथा प्राइवेट बिलों से संबंधित प्रश्न किए। प्रश्नों के उत्तर में सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग एवं प्रतिपक्ष के मुख्य सचेतक रफीक खान ने विस्तृत रूप से जानकारी प्रदान करते हुए विधायी प्रक्रिया के व्यावहारिक पहलुओं को स्पष्ट किया। इसके साथ ही विदेशी प्रतिभागियों और विधायकों के मध्य सार्थक संवाद हुआ। लगभग एक घंटे चले इस संवाद में लोकतंत्र के विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
*विदेशियों को भाया विधान सभा का म्यूजियम*
विदेशी प्रतिभागियों ने राजस्थान विधान सभा के
म्यूजियम और राजनैतिक आख्यान संग्रहालय का दौरा भी किया। उन्होंने म्यूजियम की मुक्त कंठ से सराहना की तथा इसे ज्ञानवर्धक एवं आकर्षक बताते हुए कहा कि इस प्रकार के संग्रहालय लोकतांत्रिक परंपराओं को समझने का प्रभावी माध्यम हैं। प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसे संग्रहालय सभी देशों में होने चाहिए ।