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राजस्थान विधानसभा परिसर में पांच राज्यों के स्पीकर्स के साथ विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने किया हर्बल वाटिका एवं नक्षत्र वाटिका का उद्‌घाटन

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05 May 26
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राजस्थान विधानसभा परिसर में पांच राज्यों के स्पीकर्स के साथ विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने किया हर्बल वाटिका एवं नक्षत्र वाटिका का उद्‌घाटन

जयपुर। राजस्थान विधानसभा परिसर में मंगलवार को पर्यावरण, आयुर्वेद एवं भारतीय ज्योतिष विज्ञान को समर्पित दो अनूठी वाटिकाओं "हर्बल वाटिका" एवं "नक्षत्र वाटिका" राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष डॉ वासुदेव देवनानी ने देश के पांच राज्यों के विधानसभाध्यक्षों के साथ का विधिवत उ‌द्घाटन किया।

इस गरिमामय अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, उत्तरप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना, हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी एवं सिक्किम विधानसभा के अध्याक्ष मिंगमा नोर्बु शेरपा की विशिष्ट उपस्थिति रही। 

इस कार्यक्रम में राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल एवं राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम राजस्थान विधानसभा में लोकसभा द्वारा गठित समिति के पीठासीन अधिकारियों की बैठक के अवसर पर सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर  विधानसभाध्यक्ष  देवनानी ने कहा कि राजस्थान विधानसभा की स्थापना का यह वर्ष अमृत महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। इस महोत्सव के तहत ही यह दो वाटिकाएं निर्मित की गई है। पांचों राज्यों के स्पीकर्स ने राजस्थान विधान सभा के भवन, सदन व म्यूजियम को शानदार बताते हुए कहा कि म्यूजियम ज्ञानवर्धक है।

*हर्बल वाटिका औषधीय ज्ञान का जीवंत केन्द्र* 

विधानसभा परिसर के उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थापित हर्बल वाटिका का उ‌द्देश्य स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद के महत्व को रेखांकित करना तथा औषधीय पौधों के संरक्षण के प्रति जन जागरुकता बढ़ाना है। इस वाटिका में वैज्ञानिक पद्धति से निर्मित 8-13 फीट आकार की कुल 38 क्यारियों बनाई गई हैं, जिनमें 38 प्रकार की औषधीय प्रजातियों के 20 से 25 पौधे प्रति क्यारी रोपित किए गए हैं। वाटिका में इलायची, पोदीना, लेमनग्रास, घृतकुमारी (एलोवेरा), सदाबहार, तुलसी, सिट्रोनेला, पत्थर चट्टा, हडजोड, सफेद मूसली, इन्सुलिन, पीपली, समुद्र बेल. ब्राहमी, लाजवती एवं अपराजिता सहित अनेक महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ रोपित की गई हैं। यह वाटिका औषधीय जान के प्रसार के साथ-साथ प्राकृतिक चिकित्सा प‌द्धति को भी प्रोत्साहित करती है।

*नक्षत्र वाटिका प्रकृति और खगोल विज्ञान का अद्‌भुत संगम* 

विधानसभा परिसर के दक्षिणी क्षेत्र में स्थापित नक्षत्र वाटिका भारतीय ज्योतिष एवं आयुर्वेद की समृद्ध परम्परा को समर्पित एक अनूठी संकल्पना है। भारतीय ज्योतिष एवं आयुर्वेद के अनुसार आकाशमण्डल में 27 नक्षत्र माने गए हैं, जिनका संबंध विशिष्ट वृक्षों से है। इस वाटिका में अश्विनी - कुचला, भरणी आँवला, कृतिका गूलर, रोहिणी जामुन, मृगसिर खैर, आर्दा शीशम, पुनर्वसु बाँस, पुष्य पीपल, आश्लेषा नागकेसर, मघा बरगद, पूर्व फाल्गुनी पलाश, उत्तर फाल्गुनी पाकड़, हस्त जामली, चित्रा बेल, स्वाती अर्जुन, विशाखा कटाई/शमल, अनुराधा मौलश्री, ज्येष्ठा घीड़/सेमल, मूल साल, पूर्वाषाढा अशोक, उत्तराषाढ़ा कटहल, श्रवण शमी/आक, धनिष्ठा मदार, शतभिषा कदंब, पूर्व भाद्रपद आम, उत्तर भाद्रपद नीम तथा रेवती - महुआ के प्रतिनिधि वृक्ष रोपित किए गए हैं। यह वाटिका प्रकृति और खगोल विज्ञान के अद्‌भुत संगम की जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।

*सभागार एवं डिजिटल म्यूजियम का अवलोकन* 

दोनों वाटिकाओं के उ‌द्घाटन कार्यक्रम के पश्चात् समस्त अतिथिगणों ने राजस्थान विधानसभा के सभागार का अवलोकन किया तथा विधानसभा की गरिमामयी संसदीय परम्पराओं एवं ऐतिहासिक विरासत से परिचय प्राप्त किया। इसके साथ ही अतिथिगणों ने विधानसभा परिसर में स्थापित अत्याधुनिक डिजिटल म्यूजियम का भी अवलोकन किया। यह डिजिटल म्यूजियम राजस्थान की विधायी यात्रा, संसदीय इतिहास एवं लोकतांत्रिक परम्पराओं को अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवत रूप में प्रस्तुत करता है। अतिथिगणों ने इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणाप्रद बताया।

*विजिटर्स बुक में अंकित हुई सराहना* 

उद्‌घाटन के अवसर पर आये पांच राज्यों में विधान सभा अध्यक्षगण ने विजिटर्स बुक में अपने अनुभव एवं प्रशंसनीय सुझाव अंकित किए। अतिथियों ने हर्बल वाटिका, नक्षत्र वाटिका एवं डिजिटल म्यूजियम को राजस्थान विधानसभा की विशिष्ट एवं प्रेरणाप्रद उपलब्धि निरूपित किया तथा इसे भारतीय जान परम्परा, पर्यावरण संरक्षण एवं लोकतांत्रिक विरासत के संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय योगदान बताया। ये दोनों वाटिकाएँ एवं डिजिटल म्यूजियम विधानसभा परिसर को न केवल हरा-भरा एवं सुन्दर बनाते हैं. अपितु आगंतुकों को भारतीय आयुर्वेद, ज्योतिष, प्रकृति विज्ञान एवं राजस्थान की समृद्ध विधायी विरासत से भी परिचित कराते हैं।


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