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डूंगरपुर बना है पर्यावरण और जल संरक्षण का आदर्श मॉडल

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04 Jun 26
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डूंगरपुर बना है पर्यावरण और जल संरक्षण का आदर्श मॉडल

दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी अंचल के ऐतिहासिक शहर डूंगरपुर, ने जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन के क्षेत्र में देशभर में एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है। कभी गर्मी के मौसम में जल संकट, सूखे जलस्त्रोतों और भूजल स्तर में गिरावट से जूझने वाले इस अंचल ने आज सामुदायिक भागीदारी और जनजागरण के बल पर एक नई मिसाल की है। डूंगरपुर का यह परिवर्तन केवल सरकारी योजनाओं का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजस्थान में स्वच्छ भारत (शहरी) के ब्राण्ड एम्बेसेडर और डूंगरपुर नगर परिषद के पूर्व सभापति के.के. गुप्ता का विशेष रूप से उल्लेखनीय योगदान रहा है।

के के गुप्ता ने अपने नगर परिषद अध्यक्षीय कार्यकाल में वर्षा जल संचयन में नवाचार कर कम लागत वाला "रेन वाटर हार्वेस्टिंग" मॉडल तैयार करने में सफलता हासिल की। गुप्ता के नेतृत्व में डूंगरपुर में एक अभिनव वर्षा जल संचयन प्रणाली विकसित की गई, जिसमें छतों से एकत्रित वर्षा जल को सीधे घरों के मौजूदा बोरवेल में भेजा गया जिससे वे रिचार्ज हुए तथा भूमिगत जल में भी वृद्धि हुई। डूंगरपुर के इस जल संरक्षण मॉडल की गूंज लोकसभा में भी हुई। जल संरक्षण की इस प्रणाली में पाइप के भीतर ही रेत फिल्टर और बैकवॉश की सुविधा शामिल की गई, जिससे जल शुद्धिकरण सुनिश्चित हुआ। इस प्रणाली की लागत मात्र ₹ 16,000 आई, जबकि पारंपरिक प्रणालियों की लागत ₹ 50,000 से ₹1,00,000 तक होती है। डूंगरपुर नगर परिषद् ने इस प्रणाली को अपनाने वाले घरों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी भी प्रदान की, जिससे इसकी प्रभावी लागत ₹8,000 प्रति घर ही आई । डूंगरपुर के इस मॉडल की सफलता को देखते हुए,तत्कालीन केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने इसकी न केवल भूरी-भूरी प्रशंसा की वरन् अन्य राज्य सरकारों को भी इस मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया। इससे प्रेरित होकर दिल्ली सरकार के मन्त्री और अधिकारियों के दल ने डूंगरपुर नगर का दौरा किया और डूंगरपुर मॉडल को अपने प्रदेश में भी लागू करने का निर्णय लिया।

गुप्ता के गंभीर प्रयासों से डूंगरपुर नगर के पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार कराया गया। डूंगरपुर नगर के पुराने तालाबों, बावड़ियों और जल स्रोतों की सफाई और गहरीकरण का कार्य किया गया, जिससे वर्षा जल का संचयन और भूजल स्तर में वृद्धि संभव हुई। नगर के तालाबों और बावड़ियों का जीर्णोद्धार कराने में स्थानीय प्रशासन , नागरिकों और समुदायों ने सक्रिय सहयोग किया । सामुदायिक तालाबों का निर्माण और रखरखाव सुनिश्चित होने से शहर के साथ ही निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में भी जल संकट को कम करने में मदद मिली । उन्होंने ई-कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक अपशिष्ट नियंत्रण, और कचरा प्रबंधन के लिए जागरूकता अभियान चला कर पर्यावरण संरक्षण में अभूतपूर्व योगदान किया।

के.के. गुप्ता ने अपने सार्वजनिक जीवन में पर्यावरण संरक्षण को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया। उनका मानना रहा कि जल और पर्यावरण का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। इसी सोच के साथ उन्होंने विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों को जोड़कर जल बचाओ तथा वृक्ष लगाओ जैसे कार्यक्रमों को गति प्रदान की।गुप्ता के इन सराहनीय प्रयासों से उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले है। के के गुप्ता को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और देश के राष्ट्रपति और केन्द्रीय मन्त्रियों तथा प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के हाथों कई पुरस्कार और सम्मान मिले है । गुप्ता को विदेशी संस्थाओं ने भी सम्मानित किया है । नीदरलैंड सरकार और फिनिश संस्था द्वारा 2019 में, ठोस कचरा प्रबंधन और स्वच्छता कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साथ ही डूंगरपुर को बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा एशिया और अफ्रीका के 16 शहरों में से एक के रूप में चुना गया, जहाँ स्वच्छता और कचरा प्रबंधन तकनीकों का मूल्यांकन किया गया।

डूंगरपुर मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता जनसहभागिता है। यहां प्रशासन, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर जल संरक्षण के कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। जिले में चलाए गए विभिन्न अभियानों के दौरान जलाशयों की सफाई, जल आवक मार्गों से अतिक्रमण हटाने तथा जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया। इससे न केवल भूजल स्तर में सुधार हुआ बल्कि कई क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई की समस्या भी कम हुई है। डूंगरपुर जिले की भौगोलिक परिस्थितियाँ वर्षाजल संचयन के लिए अनुकूल हैं, लेकिन वर्षों तक सही और पर्याप्त प्रयास नहीं होने से बड़ी मात्रा में वर्षा जल बहकर नष्ट हो जाया करता था। इस समस्या को समझते हुए गुप्ता ने स्थानीय स्तर पर तालाबों, एनिकटों, जलाशयों और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में कार्य प्रारंभ किया। पिछले वर्षों में जिले में हजारों जल संरक्षण कार्यों के माध्यम से जल संचयन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा सामुदायिक भागीदारी के आधार पर जल संरक्षण को नई दिशा मिली है।पूर्व सभापति के.के. गुप्ता ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में जल स्रोतों की सफाई, वर्षाजल संचयन संरचनाओं के निर्माण तथा वृक्षारोपण अभियानों को बढ़ावा दिया। उनके नेतृत्व में कई जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुए जिनमें विद्यार्थियों, युवाओं और महिलाओं को जल संरक्षण के महत्व से परिचित कराया गया। उन्होंने सदैव इस बात पर बल दिया कि यदि जल बचेगा तो पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और भविष्य की पीढ़ियों को बेहतर जीवन मिल सकेगा।

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वृक्षारोपण को डूंगरपुर मॉडल का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। डूंगरपुर में जल संरक्षण कार्यों के साथ-साथ पौधारोपण और हरित क्षेत्र विस्तार के प्रयास किए गए हैं। इससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और वर्षा के जल को भूमि में समाहित करने में सहायता मिली। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यशालाओं में जल संरक्षण के साथ पर्यावरणीय संतुलन और हरित विकास पर जोर दिया गया।

आज जब देश ही नहीं पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब डूंगरपुर मॉडल बताता है कि दृढ़ इच्छा शक्ति, जन जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता से बड़े परिवर्तन संभव हैं। पूर्व सभापति के.के. गुप्ता के प्रयासों ने यह सिद्ध किया है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर काम करें तो पर्यावरण और जल संरक्षण केवल योजना नहीं, बल्कि जनआंदोलन बन सकता है।डूंगरपुर मॉडल हमें यह संदेश देता है कि जल ही जीवन है और उसका संरक्षण ही भविष्य की सुरक्षा है। पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में डूंगरपुर की यह यात्रा राजस्थान ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

डूंगरपुर नगर परिषद के पूर्व अध्‍यक्ष के. के. गुप्‍ता को देश भर में स्‍वच्‍छता को समर्पित राजदूत कहें तो कोई अतिश्‍योक्ति नहीं होगी।
गुप्ता ने दक्षिणी राजस्‍थान के डूंगरपुर नगर में स्‍वच्‍छता, जल संरक्षण, वन और पर्यावरण, शिक्षा ,योग, खेलकूद ,युवा विकास आधारभूत ढाँचा विकास , रोटी बैंक की स्थापना आदि विभिन्‍न क्षेत्रों में डूंगरपुर को राजस्‍थान ही नहीं देश का सबसे सुंदर शहर बनाने का कार्य कर देश-विदेश में अपार शोहरत अर्जित की है।

गुप्ता के योगदान की देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा सहित देश-विदेश के अनेक नेताओं ने भूरी-भूरी प्रशंसा की है। उनकी इन अभूतपूर्व सेवाओं को देखते हुए राजस्‍थान सरकार ने उन्‍हें तीसरी बार स्‍वच्‍छ भारत मिशन (शहरी) का ब्राण्‍ड एम्‍बेसेडर मनोनीत किया है। इससे पहले उन्‍होंने भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा एन.एस.एस.सी. स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का सदस्य भी नियुक्‍त किया गया।
साथ ही उन्हें भरता सरकार के युवा और खेल मन्त्रालय द्वारा राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएनएस ) के लिए का मानद रिसोर्स पर्सन भी नियुक्त किया गया। साथ ही के.के. गुप्‍ता को माननीय न्‍यायालय ने राजस्‍थान के शेखावाटी अंचल, मेवाड़ और वागड़ क्षेत्र की नगर पालिकाओं की स्‍वच्‍छता कार्यक्रमों की समीक्षा करने के लिए न्‍यायमित्र भी नियुक्‍त किया गया।

राजस्थान में तीसरी बार स्‍वच्‍छ भारत मिशन (शहरी) का ब्राण्‍ड एम्‍बेसेडर बनाए जाने के बाद के के गुप्ता इन दिनों राजस्‍थान के मुख्‍य मंत्री श्री भजन लाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी 41 जिलों की स्‍थानीय निकायों में स्‍वच्‍छता आंदोलनों को गति देने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। वे प्रदेश के सभी 41 जिलों का दौरा कर इन जिलों की सभी निकायो के अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक ले चुके है तथा कुछ जिलों में तो एक से अधिक बार दौरा कर उन्होंने स्थानीय निकायो के कार्यों की समीक्षा की है।स्‍वच्‍छता के प्रति उनका समर्पण और जुनून देखने लायक है और चौबीसों घंटा इस लक्ष्य को पाने के लिए वे प्रतिबद्ध रहते है । इसलिए उन्हें वागड़ का भगीरथ ही नहीं स्वच्छ भारत का सही अर्थों में सेवक भी कहा जाने लगा है।


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