GMCH STORIES

"तस्कीन थैरेपी" (बर्फ़ थैरेपी) यूनानी चिकित्सा का प्राचीनतम हिस्सा : डॉ लियाक़त अली मंसूरी 

( Read 965 Times)

09 May 26
Share |
Print This Page

"तस्कीन थैरेपी" (बर्फ़ थैरेपी) यूनानी चिकित्सा का प्राचीनतम हिस्सा : डॉ लियाक़त अली मंसूरी 

पुराने जमाने में फ्रिज नहीं होते थे तब हिमालय या ऊंचे पहाड़ों से बर्फ की सिल्लियां मंगवाई जाती थीं। इस बर्फ को लंबे समय तक रखने एवं गर्मी से बचाने के लिए जूट के कपड़े, बुरादे या रजाई में लपेटकर रखा जाता था ,  उस समय यूनानी चिकित्सा पद्धति में यह एक उन्नत चिकित्सा पद्धति के रूप मेंजानी जाती थी जिसका उपयोग सूजन, दर्द, बुखार और चोट के इलाज के लिए किया जाता था। इसे यूनानी में "तस्कीन थैरेपी" कहा जाता हैं। आजकल इसे "क्रायोथेरेपी" या कोल्ड थैरेपी कहते हैं । मर्ज़ के अनुसार इस थैरेपी का उपयोग यूनानी हकीमों के अनुसार, यह सेक 'बारिद' (ठंडे) मिजाज के हिसाब से किया जाता था, जिसका मुख्य उद्देश्य सूजन को कम करने और रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ने और बुखार के तामपान को कम करने के लिए किया जाता रहा हैं । इसे 48 घंटे के अंदर उपयोग में लाया जाता हैं। पुराने समय में यूनानी हकीम इसे दर्द निवारक या एनेस्थेटिक की तरह भी प्रयोग करते थे जो जगह को सुन्न कर देता हैं। प्राचीन काल में बर्फ़ का सेक करने के तरीके आधुनिक सिकाई से थोड़े अलग, लेकिन वैज्ञानिक रूप से प्रभावी थे__
1. बर्फ़ का स्रोत और संचय पहाड़ों से बर्फ़__राजा-महाराजाओं और हकीमों के लिए दूर-दराज के पहाड़ों से बर्फ़ मंगवाई जाती थी। इसे भूसे और जूट के कपड़ों में लपेटकर लाया जाता था ताकि यह न पिघले।
2. रात में जमाई गई बर्फ़__ सर्दियों की साफ़ रातों में ज़मीन पर सूखी घास बिछाकर उस पर मिट्टी के उथले बर्तनों में पानी रखकर 'रेडिएटिव कूलिंग'  के द्वारा बर्फ़ जमाई जाती थी।

 यूनानी चिकित्सा में बर्फ़ का सेक निम्न तरीके से किया जाता रहा हैं__
1. बर्फ़ या ठंडे पानी की पट्टी__ बर्फ उपलब्ध नहीं होने पर पानी के मटकों को रात भर खुले में रखकर ठंडा किया जाता था। उस अत्यधिक ठंडे पानी में कपड़े को भिगोकर पट्टियां  लगाई जाती थीं। बर्फ़ के टुकड़ों या बर्फ़ीले पानी में कपड़े को भिगोकर प्रभावित हिस्से पर रखा जाता था। बर्फ़ के टुकड़े सीधे तौर पर दर्दनाक जगह पर बर्फ़ के छोटे टुकड़ों को कपड़े में लपेटकर सिकाई की जाती थी । यह विधि सिर दर्द, बुखार, सूजन और चोट के लिए उपयोग में लाया जाता हैं। 
2. बर्फ़ीले पानी में स्नान __ एथलीटों या चोट ग्रस्त लोगों को ठंडे पानी के कुंडों में डुबोए जाते थे जिससे सूजन कम होती थी और मांसपेशियों का दर्द दूर होता था। चोट या थकान के इलाज के लिए पूरे शरीर या प्रभावित हिस्से को ठंडे पानी में डुबोया जाता था  इस विधि को शारीरिक परिश्रम के बाद मांसपेशियों के दर्द, थकान और सूजन कम करने के लिए उपयोग में लाया जाता था । 
3. यूनानी चिकित्सा में विशिष्ट उपयोग सूजन और बुखार__हकीम इब्न सिना  के अनुसार ठंडी सिकाई का उपयोग 'हॉट स्वेलिंग' (गर्म सूजन) और बुखार को कम करने के लिए किया जाता था। हिप्पोक्रेट्स ने घाव से खून बहने पर उसे रोकने के लिए बर्फ़ का उपयोग करने का वर्णन किया है।
4. सिरदर्द और ट्यूमर__पुराने समय में सिरदर्द के लिए माथे पर ठंडी पट्टी की जाती थी।
5. ठंडे पानी में जड़ी बूटियां __दर्द कम करने के लिए जड़ी बूटियों के अर्क को ठंडे पानी में मिला कर सिकाई की जाती हैं । इस विधि को खुले घावों से खून रोकने के लिए उपयोग में लाया जाता हैं।
6. घावों पर सीधे अनुप्रयोग __हिपोक्रेट्स के समय में युद्ध के घावों से खून बहने को रोकने और दर्द कम करने के लिए ठंडे पानी से धोने और बर्फ़ लगाने का उल्लेख मिलता हैं। इस विधि में खुले घाव की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं जिससे बहता खून रुक जाता हैं और सूजन व दर्द में भी तुरन्त आराम मिलता हैं। 

 सावधानियां __
1. अपनी त्वचा की सुरक्षा करें__ बर्फ़ या जेल पैक को सीधे त्वचा पर कभी न लगाएँ क्योंकि इससे त्वचा को नुकसान हो सकता था। इसे हमेशा एक कपड़े में लपेटकर इस्तेमाल किया जाता था।
2. सिकाई बहुत लंबे समय तक नहीं की जानी चाहिए , बल्कि दर्द कम होने तक की जाती थी। प्राचीन यूनानी और भारतीय हकीम प्रकृति के नियमों का उपयोग करके 'शॉक थेरेपी' या ठंड के माध्यम से शरीर की सूजन को कम करते थे। 
  4.  समय की सीमा तय करें__ एक बार में 10 से 20 मिनट  तक ही बर्फ़ लगाएँ।  20 मिनट से ज़्यादा समय तक बर्फ़ लगाने से "रिएक्टिव वैसोडाइलेशन" हो सकता है, जिसमें टिशू को बचाने के लिए खून की नसें चौड़ी हो जाती हैं, जिससे बर्फ़ लगाने के फ़ायदे खत्म हो जाते हैं।
  5.  सेशन के बीच इंतज़ार करें__ बर्फ़ लगाने के सेशन के बीच कम से कम 1–2 घंटे का गैप रखें, ताकि त्वचा का तापमान सामान्य हो सके।
6.  अगर त्वचा संवेदनशील है तो बचना चाहिए, जिन लोगों का ब्लड सर्कुलेशन ठीक नहीं है, या जिन्हें रेनॉड सिंड्रोम, डायबिटीज़, या नसों में कोई दिक्कत (न्यूरोपैथी) है, उन्हें कोल्ड थेरेपी इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि हो सकता है कि उन्हें टिशू को होने वाले नुकसान के शुरुआती संकेत महसूस न हों। 

ठंडे सेक के मुख्य उद्देश्य  __
1. खून के बहाव को नियंत्रित करके जोड़ों के दर्द या चोट लगने पर सूजन को घटाने के लिए किया जाना ।
2. माथे पर ठंडे पानी की पट्टी रख कर बुखार के तापमान को नियंत्रित करना ।
3. दर्द को सुन्न करने में योगदान होना ।
4. त्वचा की देखभाल और सुंदरता__"स्किन आइसिंग" या आइस रोलर का इस्तेमाल करने से चेहरे की सूजन कुछ समय के लिए कम हो सकती है, रोमछिद्र कस सकते हैं, और मुँहासे या सनबर्न से राहत मिल सकती है।5.  मानसिक स्वास्थ्य__बहुत ज़्यादा ठंड के संपर्क में आने से एंडोर्फिन और नॉरपेनेफ्रिन हार्मोन रिलीज़ हो सकते हैं, जिससे मूड और सतर्कता में सुधार हो सकता है ।


यूनानी चिकित्सा में ठंडे उपचार के सिद्धान्त __
1. हिपोक्रेट्स का योगदान __चिकित्सा के पिता माने जाने वाले हिपोक्रेट्स ने दर्द कम करने करने के लिए ठंडे तापमान के उपयोग का वर्णन किया है।
2. शरीर को सुन्न करना __बर्फ़ लगाने से उस स्थान की तंत्रिकाएं सुन्न हो जाती हैं जिससे दर्द मेहसूस नहीं होता ।
3. सूजन कम करना __ठंडा तापमान रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देती हैं जिससे चोट वाली जगह पर सूजन और लालिमा कम हो जाती हैं । 
4. ह्यूमोरल थ्योरी __यूनानी चिकित्सा में शरीर के चार तत्वों ( दम, बलगम, सफ़रा, सौदा) के सन्तुलन के लिए भी ठंडे या गर्म उपचार का सहारा लिया जाता था।


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like