GMCH STORIES

82 वर्ष में भी साहित्य के प्रति समर्पित हैं

( Read 768 Times)

20 Apr 26
Share |
Print This Page

82 वर्ष में भी साहित्य के प्रति समर्पित हैं

पत्रकारिता से साहित्य में कदम रखने वाले वेद व्यास ऐसे साहित्यकार हैं जिनकेपरिचय को किसी फॉर्मेट में नहीं बंधा जा सकता, उनके साहित्य सेवा का कैनवास व्यापक है। साहित्य के ऋषि पुरुष ,शिक्षा, साहित्य, कला एवं संस्कृति तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में अनवरत लेखन एवं जनशिक्षण के लिए समर्पित वेद व्यास  का जन्म 1 जुलाई, 1942 को अविभाजित भारत के सिंध प्रान्त में भीरपुरखास में पिता  प्यारेलाल व्यास एवं माता अशी देवी के परिवार में हुआ था। इनका पुस्तैनी गाँव अलवर जिले की राजगढ़ तहसील का गढ़ी सवाई राम है। पूर्वज काम की तलाश में सिंध चले गए थे। भारत विभाजन के दौरान ये परिवार के साथ लूणी जंक्शन जोधपुर आ गये। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा लूणी जोधपुर में ही हुई। पत्रकारिता और आकाशवाणी का सपना संजोए जयपुर आ गये। इनका विवाह  सुमन के साथ 20 नवम्बर, 1969 को जयपुर  हुआ। जयपुर  इनकी कर्म स्थली बन गई। जयपुर में राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना की और गरीब एवं अनाथ बच्चों के लिए सेवा के लिए भाईचारा फाउण्डेशन चलाया जो आज तक चल रहा है।राजस्थान सरकार द्वारा केन्द्रीय पाठ्यक्रम - एन.सी.ई. आर.टी. एवं सी.बी.एस.ई. की समीक्षा समिति के संयोजक  रहे। इनकी सतत् साहित्य सेवा का परिणाम है कि इनका का 24वां प्रकाशन अविस्मरणीय 2023 में प्रकाशित हुआ जो  इनके साहित्य एवं पत्रकारिता के बीच की यात्रा का बोध कराता है। साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रहे वेद व्यास लेखन की स्वतंत्रता के पैरोकार हैं।

  राजस्थान ललित कला अकादमी और वानर - बाल मासिक पत्रिका में कार्यरत रहते हुए सन् 1964 में आकाशवाणी जयपुर में चले गए जहां  30 जून, 2002 सेवानिवृत्ति तक पदासीन रहे। आकाशवाणी जयपुर से राजस्थानी भाषा में प्रथम समाचार वाचक रहे।आकाशवाणी से गूंजता स्वर अब आप वेद व्यास से राजस्थानी में समाचार सुनिए ने इनकी अलग पहचान बनाई। आकाशवाणी में कार्यरत रहते हुए ही 1983 में नई दिल्ली में आयोजित तीसरे विश्व हिन्दी सम्मेलन में भागीदारी की एवं  वर्ष 1999 में लन्दन में हुए छठे विश्व हिन्दी सम्मेलन में एवं 2003 में सूरीनाम में आयोजित सातवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में राजस्थान सरकार द्वारा प्रतिनिधित्व किया।  दैनिक नवज्योति का साप्ताहिक स्तम्भ ’ध्यानाकर्षण’ और बाद में ’उल्लेखनीय’ स्तम्भ इनके साहित्य, समाज और समय के 50 साल के गवाह रहे हैं।  राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर के पहले उपाध्यक्ष एवं बाद में अध्यक्ष और तीन बार राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर के अध्यक्ष रहे हैं। ये राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर की संविधान निर्मात्री समिति, केन्द्रीय साहित्य अकादमी के पुरस्कार चयन एवं निर्णायक समिति, राज्य सरकार के केन्द्रीय पुस्तक क्रय समिति, राज्य पुस्तकालय विकास समिति के सदस्य भी रहे हैं।

   इनकी पहली पुस्तक सन् 1966 में जाने माने कवि हनवन्त सिंह देवड़ा और  वेद व्यास दोनों के गीतों की पुस्तक ’धरती हेलो मारै ’ प्रकाशित हुई थी। राजस्थानी भाषा में ही इन्होंने ने रावत सारस्वत के साथ मिलकर  आज रा कवि’ पुस्तक का सम्पादन किया। उस समय दोनों पुस्तकें पाठकों और रचनाकारों में खूब लोकप्रिय हुई। परिवार नियोजन के राष्ट्रीय महत्व को बताने वाली राजस्थानी भाषा में गीत पुस्तक कीड़ीनगरी प्रकाशित हुई। महात्मा गांधी के 150 वें जन्मदिवस पर 42 कवियों द्वारा महात्मा गांधी के जीवन चरित्र पर रचित राजस्थानी भाषा की कविताओं का संकलन आज़ादी रा भागीरथ: गांधी प्रकाशित हुआ। इसका सम्पादन वेद व्यास व श्याम महर्षि ने किया। 

   राजस्थानी भाषा में इनकी अन्य प्रकाशित कृतियां राजस्थानी गीत - गांधी प्रकाश, राजस्थानी सम्पादन - बारखड़ी एवं सबद उजास, राजस्थान के लोकतीर्थ, बाल गीतों का संग्रह एक देश मेरे सपनों का ,भारत वर्ष हमारा है, एक बनेंगे नेक बनेंगे, निबन्ध संग्रह - अब नहीं तो कब बोलोगे, समय-समय पर, हलफनामा ,शेष रहेंगे शब्द, अंधेरे में रोशनी की तलाश, राष्ट्रीय धरोहर, जीवन चरित्र -  परमवीर गाथा ,कहानी संपादन परछाइयां, लेखक और आज की दुनिया, तुम समय को लांघ जाओ (गीत) प्रमुख प्रकाशित कृतियां हैं। आप पाक्षिक समाचार पत्र जन यात्रा जयपुर के संस्थापक हैं।

   साहित्य सृजन के लिए इन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी के विशिष्ट साहित्यकार सम्मान और राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के राजस्थानी भाषा सम्मान सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए। साहित्य अकादमी के सर्वोच्च सम्मान साहित्य मनीषी से सम्मानित वेद व्यास को सम्मान स्वरूप 2 लाख 51 हजार रुपए तथा सम्मान पत्र प्रदान किया गया। आपको बिहारी पुरस्कार, मित्र परिषद, राजस्थान, अशोक गहलोत लोकमत मित्रता पुरस्कार , राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, श्रीडूंगरगढ़ बीकानेर से साहित्यश्री और शब्दश्री सम्मान तथा राजस्थान रत्नाकर सम्मान प्रमुख सम्मानों के साथ अनेक पुरस्कार और सम्मान से आपको नवाजा गया। समाज में चेतना जागृत करने वाले वेद व्यास वर्तमान में निरंतर साहित्य साधना में लगे हैं।


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like