कोटा। कोटा पुलिस की बड़ी खबर सब इंस्पेक्टर देवकीनंदन सहित आधा दर्जन पुलिस कर्मियों को सस्पेंड और लाईन हाजिर करने की बात सामने आई है। कोटा शहर के
गुमानपुरा थाना में साइबर ठगी के आरोपी को छोड़ने बदले सुविधा शुक्ल लेने के मामले में पुलिस महकमे में कोटा सिटी एसपी ने बड़ा एक्शन लिया है। सिटी एसपी तेजस्विनी गौतम ने कड़ी कार्रवाई करते हुए एसआई सहित तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। तीनों का मुख्यालय झालावाड़ निर्धारित किया गया है।
निलंबित पुलिसकर्मियों में एसआई देवकीनंदन, कांस्टेबल करतार सिंह और कांस्टेबल छोटूलाल गुर्जर शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, थाना प्रभारी महेश कारवाल के अवकाश पर होने के दौरान थाने का प्रभार एसआई देवकीनंदन के पास था।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब पुलिस को एक युवक के अपहरण की सूचना मिली। जांच के दौरान संदिग्ध वाहन को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें युवकों के पास से फर्जी एटीएम कार्ड सहित अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद हुई। पूछताछ में सामने आया कि इनमें से एक युवक साइबर फ्रॉड गिरोह से जुड़ा है, जो म्यूल अकाउंट के जरिए ठगी करता था।देरी और पैसों के लेनदेन के आरोप एसपी के अनुसार, मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन संबंधित पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई में देरी की। आरोप है कि उन्होंने आरोपियों को छोड़ने के बदले करीब डेढ़ लाख रुपए की डील की, जिसमें से 75 हजार रुपए ले भी लिए गए थे।
खुद थाने पहुंचीं एसपी, देर रात तक जांच-
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी एसपी तेजस्विनी गौतम स्वयं शुक्रवार देर रात तक गुमानपुरा थाने में मौजूद रहीं और जांच की निगरानी की। प्रारंभिक जांच में तीनों पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद तत्काल निलंबन के आदेश जारी किए गए।
आईपीएस प्रशिक्षु को सौंपी जांच पूरे मामले की जांच अंडर ट्रेनिंग आईपीएस सिद्धार्थ कुमार श्रीवास्तव को सौंपी गई है। एसपी ने बताया कि जयपुर पुलिस मुख्यालय से चर्चा के बाद कार्रवाई को अंतिम रूप दिया गया।अनुशासनहीनता पर तीन और लाइन हाजिर-
इसी थाने में अनुशासनहीनता के एक अन्य मामले में एएसआई ऋषिपाल, हीरालाल और जुगल को लाइन हाजिर किया गया है। इन पर शराब के नशे में विवाद करने का आरोप था, जिसकी पुष्टि होने पर विभागीय कार्रवाई की गई।
रानपुर थाना प्रभारी बनने के बाद से ही सब इंस्पेक्टर देवकीनंदन का विरोध शुरू हो गया था।
गौरतलब है कि एसआई देवकीनंदन को 6 मई से रानपुर थाने का प्रभारी बनाया जाना था, लेकिन उससे पहले ही इस मामले में कार्रवाई हो गई। इस मामले की जांच प्रशिक्षु आईपीएस सिद्धार्थ श्रीवास्तव कर रहे हैं।