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*पर्यटन समाज में समरसता लाने का माध्यम -- कुलगुरू निमित रंजन

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12 Jun 26
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*पर्यटन समाज में समरसता लाने का माध्यम -- कुलगुरू निमित रंजन

कोटा । तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु निमित रंजन ने गुरुवार को विनिबंध कला, संस्कृति और पर्यटन साहित्य के सशक्त हटाक्षर डॉ. प्रभात कुमार सिंघल पुस्तक का उनके चैंबर में लोकार्पण किया। यह विनिबंध पुस्तक देश के प्रसिद्ध साहित्यकार और स्तंभकार दिल्ली के ललित गर्ग द्वारा लिखी गई है। डॉ. सिंघल ने कुलगुरू का शाल ओढ़कर स्वागत किया एवं पुस्तक की जानकारी देते हुए बताया कि विश्व, देश और राजस्थान के परिपेक्ष्य में कला,संस्कृति, पर्यटन,इतिहास और पुरातत्व पर एकल और संयुक्त रूप से 35 पुस्तकें लिखी हैं। सभी पुस्तकें गहन शोध कर लिखी गई हैं। ललित गर्ग ने इनका अध्ययन कर यह विनिबंध लिखा है।

     इस अवसर पर निमित रंजन ने कहा कि

सामाजिक दृष्टि से देखें तो पर्यटन हर आदमी के जीवन का नैसर्गिक हिस्सा है। वास्तव में पर्यटन समाज में समरसता लाने का माध्यम है तथा आर्थिक विकास में  सहायक होता है। पर्यटन जीवन में कुछ न कुछ परिवर्तन अवश्य लाता है। 

      कुलगुरु ने कहा हर आदमी यात्रा करता है। हमें यह ध्यान रखना होगा कि हम अच्छे पर्यटक, एक अच्छे यात्री कैसे बन सकें। इसकी शिक्षा और प्रशिक्षण भी आवश्यक है। पर्यटन की रूपरेखा इस प्रकार से हो कि कि पर्यटन सप्लाई साइड से ही नहीं डिमाण्ड साइड से भी बढ़ाना चाहिए तथा इसका लाभ समाज के सभी लोगों तक पहुँचे। उन्होंने लेखक के प्रयासों की सराहना करते हुए डॉ. सिंघल द्वारा पर्यटन पर अन्वेषण दृष्टि से लिखी गई  पुस्तकों को शोध की दृष्टि से उपयोगी बताते हुए पर्यटन विकास में सहायक बताया।

   कथाकार एवं समीक्षक विजय जोशी ने कहा कि यह विनिबन्ध कृति इस बात की साक्षी है कि व्यक्ति जब समर्पित भाव से कार्य करता है तो उसके द्वारा किए गये कार्य का मूल्यांकन भी उभर कर सामने आता है। इस विनिबन्ध कृति में सम्पादन खण्ड में सम्पादक ललित गर्ग ने कला, संस्कृति और पर्यटन साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर : डॉ. प्रभात कुमार सिंघल शीर्षक से विस्तृत आलेख लिखा है। वहीं सृजन खंड में डॉ. प्रभात कुमार सिंघल की चयनित पुस्तकों के अंश प्रभावी रूप से प्रस्तुत किए है। बाल साहित्यकार जितेंद्र गौड़ भी मौजूद रहे।

 


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