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1100 वर्ष पुराने चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद हत्याकांड का खुलासा

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12 Jun 26
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1100 वर्ष पुराने चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद हत्याकांड का खुलासा

के. डी. अब्बासी

कोटा, जून। कोटा शहर पुलिस ने बहुचर्चित और सनसनीखेज चंद्रेसल मठ महंत देवानंद हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए मुख्य साजिशकर्ता सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक महिला को साक्ष्य मिटाने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। करीब 1100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक चंद्रेसल मठ से जुड़े इस ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा पुलिस के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, जिसे तकनीकी जांच, साइबर विश्लेषण, मुखबिर तंत्र और विभिन्न टीमों के समन्वित प्रयासों से सुलझाया गया।


पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने बताया कि बोरखेड़ा थाना क्षेत्र स्थित चंद्रेसल मठ में 5 जून की रात महंत देवानंद की धारदार हथियारों से निर्मम हत्या कर दी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाषचंद्र मिश्रा के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। जांच में करीब 100 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने साइबर सेल, डीएसटी, एफएसएल तथा डॉग स्क्वाड के सहयोग से लगातार काम किया।

जांच में सामने आया कि मठ की लगभग 750 बीघा भूमि और करोड़ों रुपये की संपत्ति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते विरोधी गुट के कथित अध्यक्ष एवं पेशे से अधिवक्ता संतोष कुमार राय ने आदित्य वर्मा नामक युवक को एक लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या की साजिश रची। पुलिस के अनुसार 1 जून को संतोष राय आदित्य को मठ लेकर गया, जहां उसने महंत की दिनचर्या, परिसर की स्थिति और हत्या की योजना से संबंधित जानकारी दी।

पुलिस का दावा है कि संदेह से बचने के लिए संतोष राय 2 जून को जयपुर के एक अस्पताल में पैर की सर्जरी के बहाने भर्ती हो गया। इसके बाद 5 जून की रात आदित्य वर्मा अपने साथियों अंकित बैरवा, पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस और एक अन्य युवक के साथ दो मोटरसाइकिलों पर मठ पहुंचा। आरोपियों ने पहले नंदनवन महाराज के कमरे को बाहर से बंद किया और फिर महंत देवानंद के कमरे में घुसकर उन पर चाकुओं से हमला कर दिया। जान बचाने के लिए बाहर निकले महंत को आरोपियों ने पकड़ लिया और ताबड़तोड़ वार कर उनकी हत्या कर दी।

तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, मुखबिर तंत्र और गहन पूछताछ के आधार पर पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता संतोष कुमार राय और आरोपी पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार कर लिया है। एक महिला को भी साक्ष्य मिटाने के आरोप में हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

पुलिस की संयुक्त टीम ने निभाई अहम भूमिका

इस जटिल मामले के खुलासे में एसआईटी के साथ-साथ कई विशेष इकाइयों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। जांच दल में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाषचंद्र मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सांखला, वृत्ताधिकारी रुद्रप्रकाश शर्मा, मनीष शर्मा और योगेश शर्मा सहित थानाधिकारी अनिल कुमार टेलर, रामस्वरूप, मांगेलाल यादव, रामलक्ष्मण, मुकेश कुमार, देवेश भारद्वाज, सतीश कुमार, महेंद्र मारू और ज्योति मौर्य शामिल रहे।

साइबर सेल की टीम में हेड कांस्टेबल इन्द्र सिंह, सुरेश कुमार, अशोक सिंह, लक्ष्मण सिंह और सुनील चंदेल ने आरोपियों की पहचान और ट्रेसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष रूप से लक्ष्मण सिंह और सुनील चंदेल के तकनीकी विश्लेषण ने जांच को निर्णायक दिशा दी।

मैदानी कार्रवाई में डीएसटी टीम के रामवीर सिंह, सुरेन्द्र सिंह, बहादुर सिंह, कृष्णगोपाल, रोहिताश, छत्रसाल, प्रदीप, शौकत, परमेश्वर और जयवीर सक्रिय रहे। वहीं सीसीटीवी टीम के सुरेश और अजीत ने महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए। इसके अतिरिक्त एजीटीएफ के प्रताप सिंह सहित शिवराज, लतीफ मोहम्मद, जगदीश, धर्मवीर, अरशद, जयदीप, हनुमान, राधेश्याम, जयपाल, मनीष, विद्धानंद यादव, भंवर सिंह और अटल ने भी जांच को अंजाम तक पहुंचाने में उल्लेखनीय योगदान दिया।

चंद्रेसल मठ धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र होने के कारण इस हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे भी कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है तथा फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। इस सफल कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया है कि आधुनिक तकनीक, सटीक रणनीति और मजबूत टीमवर्क के बल पर पुलिस किसी भी जटिल अपराध का पर्दाफाश करने में सक्षम है।


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