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गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के बाद अब राजस्थान में भी लागू होगी यूसीसी?

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31 Mar 26
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मार्च 2026 में गुजरात ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल पास कर दिया और गुजरात, उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया। इस कानून में शादी, तलाक, विरासत, लिव इन रिलेशंस जैसे मामलों में एक समान कानून लागू करने का प्रावधान है। 

गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के बाद अब राजस्थान में भी इस दिशा में तेज होती हलचल ने राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को नई दिशा दे दी है। एक देश, एक कानून की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए राज्यों द्वारा अपने-अपने स्तर पर यूसीसी लागू करने की पहल अब स्पष्ट रूप से उभरती हुई दिखाई दे रही है। उत्तराखंड के बाद गुजरात द्वारा इस कानून को लागू करना इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है और अब राजस्थान भी इसी राह पर बढ़ता नजर आ रहा है। राजस्थान सरकार ने यूसीसी को लेकर अपनी मंशा पहले ही स्पष्ट कर दी है। राज्य के नीति-निर्माताओं का मानना है कि समान नागरिक संहिता से समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित होगा तथा विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण उत्पन्न होने वाली जटिलताओं को समाप्त किया जा सकेगा। विशेष रूप से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों में एक समान कानून लागू होने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनने की उम्मीद जताई जा रही है। राजनीतिक दृष्टि से देखें तो गुजरात और राजस्थान दोनों राज्यों में एक ही दल की सरकार होने के कारण इस दिशा में तेजी स्वाभाविक मानी जा रही है। गुजरात में यूसीसी लागू होने के बाद यह संकेत भी गया है कि केंद्र और राज्य स्तर पर इस विषय को गंभीरता से लिया जा रहा है। राजस्थान में भी इस मुद्दे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर प्रारंभिक तैयारियां शुरू होने की चर्चाएं हैं, जिनमें कानूनी विशेषज्ञों से राय लेने और विभिन्न सामाजिक वर्गों के साथ संवाद स्थापित करने की प्रक्रिया शामिल हो सकती है।हालांकि, यूसीसी का मुद्दा केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील है। विभिन्न धार्मिक समुदायों के अपने-अपने व्यक्तिगत कानून हैं, जो उनकी परंपराओं और मान्यताओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे में एक समान कानून लागू करने की प्रक्रिया में व्यापक सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। विशेष रूप से जनजातीय समुदायों को लेकर यह प्रश्न भी उठता रहा है कि क्या उन्हें इस कानून के दायरे में लाया जाएगा या उन्हें कुछ विशेष छूट प्रदान की जाएगी।
राजस्थान जैसे विविधतापूर्ण राज्य में, जहां विभिन्न धर्मों, जातियों और जनजातीय समूहों का व्यापक प्रभाव है, वहां यूसीसी लागू करना एक जटिल प्रक्रिया हो सकती है। सरकार के सामने यह चुनौती होगी कि वह कानून के माध्यम से समानता स्थापित करते हुए सामाजिक संतुलन भी बनाए रखे। इसके लिए व्यापक जनसंवाद, पारदर्शिता और संवेदनशीलता आवश्यक होगी।समर्थकों का तर्क है कि यूसीसी से महिलाओं को विशेष रूप से लाभ होगा, क्योंकि इससे विवाह और तलाक से जुड़े मामलों में लैंगिक समानता सुनिश्चित होगी। वहीं विरोधियों का कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप हो सकता है और इससे सामाजिक असंतोष बढ़ने की आशंका भी है। इन दोनों दृष्टिकोणों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए सबसे बड़ी कसौटी साबित होगा।आगामी समय में राजस्थान में यूसीसी को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। विधानसभा सत्रों में इस विषय पर चर्चा हो सकती है और यदि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो एक विधेयक लाकर इसे कानूनी रूप देने का प्रयास किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, गुजरात के बाद राजस्थान में यूसीसी की तैयारी देश में समान नागरिक संहिता को लेकर बढ़ती सक्रियता का संकेत है। यह केवल एक कानूनी सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक संरचना में व्यापक परिवर्तन की दिशा में उठाया जाने वाला कदम होगा। ऐसे में इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार किस प्रकार सभी वर्गों को साथ लेकर, संवाद और सहमति के आधार पर इस महत्वपूर्ण कानून को लागू करती है।


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