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डब्ल्यूडीएफसीः जेएनपीटी-वैतरणा खंड पर सफल रहा ट्रायल रन

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01 Apr 26
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डब्ल्यूडीएफसीः जेएनपीटी-वैतरणा खंड पर सफल रहा ट्रायल रन

नई दिल्ली/मुंबई। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण कार्य में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। मंगलवार को कॉरिडोर के महत्वपूर्ण जेएनपीटी-न्यू सफाले (वैतरणा) सेक्शन पर मालगाड़ियों का सफल ट्रायल रन संपन्न हुआ। इस परीक्षण ने कॉरिडोर के शेष 102 किलोमीटर हिस्से की परिचालन तत्परता को प्रमाणित किया है, जिससे अब पूर्ण माल संचालन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह ट्रायल डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री प्रवीण कुमार के व्यक्तिगत नेतृत्व में आयोजित किया गया।
इस ऐतिहासिक मौके पर डीएफसी के निदेशक (ओपी एण्ड बीडी) श्री शोभित भटनागर, निदेशक (इन्फ्रा) श्री अनुराग शर्मा, कार्यकारी निदेशक (इन्फ्रा) श्री एम. के. अवस्थी, कार्यकारी निदेशक (प्रोजेक्ट्स) श्री संदेश श्रीवास्तव, जीजीएम (एस एण्ड टी) श्री विकास श्रीवास्तव, जीजीएम (इलेक्ट्रिकल) श्री रण विजय सिंह, जीएम (सीसी) श्री अमित सौरास्त्री तथा सीजीएम (मुंबई) श्री एच. जी. तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस दौरान कॉरिडोर की दोहरी परिचालन क्षमता का प्रदर्शन किया गयाय डाउन दिशा (जेएनपीटी से न्यू सफाले) में सुबह 11.50 बजे इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के साथ कंटेनर ट्रेन रवाना हुई, वहीं अप दिशा (न्यू सफाले से जेएनपीटी) में डीजल लोकोमोटिव के साथ दूसरी कंटेनर ट्रेन का संचालन किया गया। दोनों दिशाओं में एक साथ किए गए इस परीक्षण से कॉरिडोर की तकनीकी सुदृढ़ता और परिचालन समन्वय का सफल प्रदर्शन हुआ।
ट्रायल रन का मुख्य उद्देश्य प्रमुख तकनीकी और परिचालन मानकों का मूल्यांकन करना था, जिसमें पटरियों की स्थिरता, भार के तहत लंबी वेल्डेड रेलों का व्यवहार, ओवरहेड विद्युतीकरण प्रणालियों की कार्यक्षमता, लोकोमोटिव का प्रदर्शन, सिग्नलिंग समन्वय तथा रोलिंग स्टॉक की सुरक्षित आवाजाही शामिल थी। इसके साथ ही, इस प्रक्रिया ने मेन लाइन और लूप लाइन संचालन के बीच समन्वय का आकलन भी संभव बनाया, जो निर्बाध माल परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से, न्यू मकरपुरा से न्यू जेएनपीटी के बीच बेहतर समन्वय के चलते अब क्रू की आवश्यकता घटकर मात्र 2 सेट रह जाएगी। ट्रायल के दौरान ट्रेनों की गति, सुरक्षा मानकों, संचार समन्वय और ऊर्जा दक्षता का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया गया, जिसके परिणाम अत्यंत संतोषजनक रहे। यह कॉरिडोर भविष्य में उच्च क्षमता और तीव्र गति वाले माल परिवहन का आधार बनेगा। इससे मालगाड़ियों के ट्रांजिट समय में लगभग चार घंटे की कमी आएगी, जिससे रोलिंग स्टॉक का टर्नअराउंड तेज होगा और देश की माल ढुलाई क्षमता में व्यापक विस्तार होगा।


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