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विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी का बाबा साहेब को नमन

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13 Apr 26
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जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष  वासुदेव देवनानी ने भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर को उनकी जयंती पर नमन किया है। 

देवनानी ने कहा कि विधानसभा में किए गए नवाचारों के तहत विधानसभा में बनाए गए डिजिटल म्यूजियम में संविधान के बाईस भागों को प्रदर्शित किया गया है। जिसमें संविधान के मुख पृष्ठ पर भारत की संस्कृति और स्वाभिमान को दिखाती हुई तस्वीरें है। उन्होंने बताया कि म्यूजियम में लगाई गई इन तस्वीरों में भारत की प्राचीन सभ्यता मोहेंजोदडो से लेकर महाभारत में कुरुक्षेत्र और कृष्ण द्वारा दिए गए गीता के ज्ञान, भगवान श्री राम की लंका विजय, भगवान बुद्ध का जीवन चरित्र, महान सम्राट अशोक, उज्जैन के न्यायप्रिय महाराज विक्रमादित्य के राजदरबार, प्राचीन वैदिक गुरुकुल, नालंदा विश्ववि‌द्यालय, भगवान नटराज, रामभक्त हनुमान के साथ ही झांसी की रानी लक्ष्मी बाई, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, छत्रपति वीर शिवाजी और गुरु गोविन्द सिंह को प्रदर्शित किया गया है।

देवनानी ने कहा कि भारत का संविधान विश्व का सबसे लम्बा और लिखित संविधान है। यह हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की नींव है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान का इतिहास उन लाखों भारतीयों के संघर्षों और स्वतंत्र होने की आशाओं में निहित है जो स्वतंत्रता, न्याय एवं समानता के लिए तरस रहे थे। महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, बाबा साहब अम्बेडकर, वीर सावरकर जैसे महापुरुषों के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ने एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक भारत के लिए आशा की चिंगारी जलाई थी।

देवनानी ने कहा कि डॉ. बी. आर. अम्बेडकर, को संविधान के मुख्य वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान अ‌द्भुत तार्किकता, दूरदर्शिता, संवेदनशीलता से युक्त एक ऐसा दस्तावेज है जिसमें विश्व के विभिन्न संविधानों के सर्वोतम तत्वों को शामिल किया गया था। साथ ही यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और दार्शनिक परम्पराओं का प्रतिनिधित्व करता है। डॉ. अम्बेडकर ने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज के जरूरतमंद, पिछडे, उपेक्षित और निर्बल वर्गा को उन्नत करने में लगाया और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वतन्त्र भारत को एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाने के लिए संविधान निर्माण में उन्होंने अतुल्य भूमिका निभाई। बाबा साहेब ने पिछड़े और कमजोर वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। डॉ. अम्बेडकर के सामाजिक स‌द्भाव, समानता, सामाजिक न्याय के विचार आज भी प्रासंगिक है।
 


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