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केसी ग्लोबऐड ने जयपुर में भविष्य के अनुकूल फाइनैंस शिक्षा और संस्थागत साझेदारियों पर चर्चा के लिए वाइस चांसलर्स राउंड टेबल का आयोजन किया।

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12 Jun 26
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केसी ग्लोबऐड ने जयपुर में भविष्य के अनुकूल फाइनैंस शिक्षा और संस्थागत साझेदारियों पर चर्चा के लिए वाइस चांसलर्स राउंड टेबल का आयोजन किया।

जयपुर: केसी ग्लोबऐड ने जयपुर में वाइस चांसलर्स राउंड टेबल मीटिंग का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस बैठक में देश भर से प्रतिष्ठित वाइस चांसलर, एकेडमिक लीडर, नीति निर्माता और शिक्षा के क्षेत्र में दूरदर्शी सोच रखने वाले प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने “विकसित भारत के लिए विश्वविद्यालयों की नई परिकल्पनाः एआई- अनुकूल प्रतिभा, रोज़गार की क्षमता और विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा (Reimagining Universities for Viksit Bharat: AI-Ready Talent, Employability & Global Competitiveness)Þ” विषय पर चर्चा की।
राजस्थान के जयपुर मैरियट होटल में आयोजित इस बैठक ने विश्वस्तरीय अर्थव्यवस्था की बदलती ज़रूरतों के अनुसार भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को बदलने पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। इस राउंडटेबल का उद्देश्य उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच आपसी सहयोग मज़बूत करना, फाइनैंस की शिक्षा को बढ़ावा देना और संस्थागत साझेदारी के ऐसे नए मॉडल्स को एक्स्पलोर करना था, जिनकी मदद से विश्वविद्यालय भविष्यवादी प्रतिभा तैयार कर सकें और अपनी एकेडमिक सुविधाओं को बेहतर बना सकें।
भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तहत ‘नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग’(एनसीवीईटी) के पूर्व चेयरमैन डॉ. निर्मलजीत सिंह कलसी (सेवानिवृत आईएएस) इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “भारत को ग्लोबल फाइनैंशियल एवं इकोनॉमिक पावरहाउस बनाने के लिए फाइनैंस की शिक्षा और पेशेवर कौशल की मजबूत प्रणाली बनाना बेहद ज़रूरी है। यूनिवर्सिटीज़ के पास शानदार मौका है कि वे आधुनिक पार्टनरशिप मॉडल के ज़रिए विश्वस्तर पर प्रासंगिक फाइनैंस की शिक्षा को सुलभ बनाएं। इससे देश भर के छात्रों को इंटरनेशनल फाइनैंस सेक्टर में सफल करियर बनाने का मौका मिलेगा।’’
इस सत्र में राजस्थान और आस-पास के अग्रणी कॉलेजों जैसे जेईसीआरसी युनिवर्सिटी, एमिटी युनिवर्सिटी, पूर्णिमा युनिवर्सिटी, निर्वाण युनिवर्सिटी, एनआईएमएस जयपुर, आईआईएस युनिवर्सिटी, आईसीएफएआई टेक स्कूल जयपुर, संगम युनिवर्सिटी विवेकानंद ग्लोबल युनिवर्सिटी, तक्षशिला बिजनेस स्कूल, जगन्नाथ युनिवर्सिटी, एपेक्स युनिवर्सिटी, आरटीयू कोटा, जेके लक्ष्मीपत युनिवर्सिटी और सुरेश ज्ञान विहार युनिवर्सिटी आदि के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
वरिष्ठ एकेडमिक लीडर भी सक्रिय रूप से चर्चा में शामिल हुए, इनमें जीसीसी स्कूल के एक्ज़क्टिव डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) मनप्रीत सिंह मन्ना और जीसीसी स्कूल एवं केसी ग्लोबऐड के संस्थापक एवं सीईओ डॉ. कमल छाबड़ा शामिल थे।
इस मौके पर जीसीसी स्कूल एवं केसी ग्लोबऐड के संस्थापक एवं सीईओ डॉ. कमल छाबड़ा ने कहा, “भारत में विश्वस्तर पर प्रशिक्षित फाइनैंस और टैक्सेशन प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ रही है। इस वाइस चांसलर्स राउंड टेबल के ज़रिए, हम देश भर की यूनिवर्सिटीज़ और संस्थानों के साथ मिलकर सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित करना चाहते हैं, जो विश्वस्तर पर मान्यता प्राप्त प्रोग्राम उपलब्ध करा सकें (जैसे यूएस सीपीए, यूएस सीएमए, यूएस ईए और यूके एसीसीए)। ये प्रोग्राम  12वीं कक्षा के बाद  छात्रों को उद्योग जगत के लिए ज़रूरी कौशल सिखाते हैं, साथ ही उन्हें बड़ी ग्लोबल फर्मों, बिग 4 ऑर्गनाइज़ेशन्स और मल्टीनेशनल कंपनियों में करियर बनाने में मदद करते हैं। कुल मिलाकर हम आसान और भविष्य के अनुकूल फाइनैंस शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई और ग्लोबल करियर के बीच के अंतर को कम करना चाहते हैं।”
सभा को संबोधित करते हुए, जीसीसी स्कूल के एक्ज़क्टिव डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) मनप्रीत सिंह मन्ना ने कहा, “हायर एजुकेशन का भविष्य अकादमिक उत्कृष्टता और विश्वस्तरीय फाइनैंस शिक्षा के संयोजन में है। जो यूनिवर्सिटीज़ आधुनिक फाइनैंस शिक्षा और उद्योग जगत के अनुकूल लर्निंग मॉडल को अपनाएंगी, वे तेज़ी से बदलते माहौल में विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रतिभा तैयार करने की बेहतर स्थिति में होंगी। इस दृष्टिकोण को साकार करने में अकादमिक और उद्योग जगत के बीच आपसी सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।’’
राउंडटेबल के दौरान उद्योग जगत और कार्यबल की बदलती ज़रूरतों के अनुसार प्रोग्रामों, ग्लोबल सर्टिफ़िकेशन और आधुनिक इंस्टीट्यूशनल पार्टनरशिप मॉडल के ज़रिए फ़ाइनैंस शिक्षा को मज़बूत बनाने पर चर्चा की गई।
राउंडटेबल का समापन अकादमिक और उद्योग जगत के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। इससे युनिवर्सिटीज़ भविष्य के अनुकूल प्रतिभा तैयार कर सकेंगी और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी उच्च शिक्षा प्रणाली के भारत के दृष्टिकोण में योगदान दे सकेंगी।


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