उदयपुर। गर्मी का पारा चढ़ते ही सरीसृपों का बाहर निकलना शुरू हो गया है, जिससे सर्पदंश की घटनाओं में भी इजाफा हुआ है। और ऐसे ही सर्पदंश से पीढ़ित पुरूष को उदयपुर के भीलों का बेदला स्थित पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल नें नया जीवनदान दिया। इस सफल उपचार में मेडिसिन विभाग के डॉ.शौकत अली वोहरा,डॉ.एच.के.पंचाल, आईसीयू विभाग के डॉ.चेतन गोयल,डॉ.इब्राहिम एवं टीम और पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ.आमिर शौकत का योगदान रहा।
मध्य प्रदेश के मंदसौर निवासी 70 वर्षीय लालू राम अपने खेत में कृषि कार्य कर रहे थे। इसी दौरान अचानक एक जहरीले साँप ने उनके पैर पर काट लिया। आस-पास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों ने शोर सुनकर लालू राम के परिजनों को सूचित किया।
परिजन मरीज को जब पीएमसीएच की इमरजेंसी में लेकर पहुँचे, तब उसकी हालत अत्यंत नाजुक थी। जहर पूरे शरीर में फैल चुका था, पैर गंभीर रूप से सूज गए थे और फेफड़ों ने काम करना लगभग बंद कर दिया था। जनरल मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शौकत अली वोहरा की टीम ने बिना एक पल गंवाए मरीज को अटेंड किया।
मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. शौकत अली वोहरा ने बताया कि मरीज को जब लाया गया तो वह मल्टी ऑर्गन फेल्योर की स्थिति में था। सांस लेने में भारी तकलीफ के कारण हमने बिना समय गंवाए उन्हें तुरंत आईसीयू में शिफ्ट किया और वेंटिलेटर सपोर्ट पर लेकर जीवन रक्षक दवाइयां और एंटी-स्नेक वेनम देना शुरू किया।
चिकित्सकों की निरंतर निगरानी और सटीक उपचार का यह परिणाम रहा कि कुछ ही दिनों में मरीज की हालत में सुधार होने लगा। धीरे-धीरे उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट से हटाया गया और अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।
पीएमसीएच के चेयरमेन राहुल अग्रवाल ने कहा कि डॉक्टरों की टीम को बधाई देते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य क्षेत्र के हर व्यक्ति को विश्वस्तरीय और त्वरित चिकित्सा सुविधा प्रदान करना है। सर्पदंश जैसे मामलों में गोल्डन ऑवर (शुरुआती समय) सबसे महत्वपूर्ण होता है। हमें खुशी है कि हमारी टीम की विशेषज्ञता और अत्याधुनिक संसाधनों के कारण एक परिवार का बुजुर्ग पूरी तरह से स्वस्थ्य है।
डॉ. शौकत अली वोहरा ने बताया कि गर्मी और वर्षा ऋतु में साँपों का निकलना सामान्य है। सर्पदंश होने पर मरीज को घबराने न दें और प्रभावित अंग को स्थिर रखें। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि झाड़-फूँक या घरेलू उपचार में समय बर्बाद करने के बजाय सीधे अस्पताल पहुँचें, क्योंकि एंटी-स्नेक वेनम ही इसका एकमात्र वैज्ञानिक उपचार है।
मरीज के परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का आभार व्यक्त किया।