उदयपुर। 5 साल का मासूम मोहम्मद अली अब जल्द ही अपनी मां की लोरी सुन सकेगा और उसे अम्मी कहकर पुकार सकेगा। जन्म से ही एक खामोश दुनिया में जी रहे इस बच्चे के लिए पीएमसीएच अस्पताल किसी फरिश्ते से कम साबित नहीं हुआ। पैसों की कमी के कारण जिस बच्चे की आवाज हमेशा के लिए दबने वाली थी, अब वह एक सामान्य और खुशहाल जिंदगी जी सकेगा।
सिरोही निवासी मोहम्मद अली जब पैदा हुआ, तो परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं था। जब वह 2 साल का हो गया तब परिजनों को एहसास हुआ कि वह न तो किसी की आवाज पर प्रतिक्रिया देता है और न ही कुछ बोल पाता है। इलाज की आस में गरीब माता-पिता बच्चे को लेकर अहमदाबाद और जयपुर के कई बड़े अस्पतालों में भटके। वहां डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे को सुनने के लिए कॉकलियर इम्प्लांट की जरूरत है, जिसका खर्च करीब 10 लाख रुपये आएगा। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि वे इतनी बड़ी रकम जुटाने में पूरी तरह असमर्थ थे। पैसों की इस दीवार ने उनकी सारी उम्मीदें तोड़ दी थीं।
हताश परिवार जब किसी तरह पीएमसीएच पहुंचा, तो वहां उनकी किस्मत बदल गई। परिवार की पीड़ा और बच्चे की स्थिति को देखते हुए पीएमसीएच के चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने गहरी मानवीय संवेदना दिखाई। उन्होंने तय किया कि पैसों की कमी के कारण इस बच्चे का भविष्य खराब नहीं होने दिया जाएगा। राहुल अग्रवाल ने मोहम्मद अली के इस महंगे कॉकलियर इम्प्लांट ऑपरेशन में आर्थिक मदद करने का फैसला किया।
राहुल अग्रवाल की इस पहल के बाद अस्पताल की विशेषज्ञ टीम तुरंत हरकत में आई। कॉकलियर इम्प्लांट एवं ईएनटी सर्जन डॉ. एस. एस. कौशिक, डॉ. ऋचा गुप्ता,मेन्टर कॉकलियर इम्प्लांट सर्जन डॉ.नवनीत माथुर, निश्चेतना (एनेस्थीसिया) विभाग के डॉ. प्रकाश औदिच्य और उनकी पूरी टीम ने मिलकर इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
सफल ऑपरेशन के बाद मोहम्मद अली के माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों का आभार जताते हुए कहा, हमारे पास बच्चे के इलाज के लिए पैसे नहीं थे। हम हिम्मत हार चुके थे, लेकिन राहुल अग्रवाल सर और डॉक्टरों की टीम ने हमारे बच्चे को एक नया जीवन दिया है। अब हमारा बच्चा भी बोलेगा और दुनिया को सुन सकेगा।
कॉकलियर इम्प्लांट एवं ईएनटी सर्जन डॉ. एस. एस. कौशिक ने बताया कि ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा है। अब जल्द ही थेरेपी के जरिए मोहम्मद अली को बोलना और सुनना सिखाया जाएगा, जिससे वह बहुत जल्द सामान्य बच्चों की तरह स्कूल जा सकेगा और अपनी जिंदगी को खुलकर जी सकेगा।