प्रतापगढ़। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के प्रतापगढ़ जिले का तीसरा जिला सम्मेलन उत्साह और राजनीतिक जोश के साथ सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में जिलेभर से आए प्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और जनसंगठनों के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान देश, प्रदेश और जिले की मौजूदा राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों पर गंभीर चर्चा हुई तथा मजदूरों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समाज के सवालों पर संघर्ष को और तेज करने का संकल्प लिया गया।

सम्मेलन में 15 सदस्यीय जिला कमिटी का गठन किया गया, जिसमें सर्वसम्मति से रंगलाल मीणा को जिला सचिव चुना गया। सम्मेलन के पर्यवेक्षक के रूप में केंद्रीय कमिटी सदस्य फरहत बानू मौजूद रहीं।
राज्य सचिव शंकरलाल चौधरी ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा दे रही है और इसका सबसे बड़ा बोझ मेहनतकश जनता पर डाला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर जैसी प्रक्रियाओं के जरिए गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों के मताधिकार को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने लोकतंत्र बचाने के लिए व्यापक जनआंदोलन की जरूरत बताई।

राज्य कमिटी सदस्य रंगलाल मीणा ने मजदूर विरोधी श्रम कोडों का विरोध करते हुए कहा कि देशभर में मजदूर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए श्रम कानूनों के जरिए काम के घंटे बढ़ाने, नौकरी की सुरक्षा खत्म करने और यूनियन अधिकार कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जिसे पार्टी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगी।
केंद्रीय कमिटी सदस्य फरहत बानू ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना भाजपा सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व देने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है।
किसान महासभा के नेता लालूराम पटेल ने मुख्यमंत्री के किसानों पर दिए बयान की आलोचना करते हुए कहा कि किसान आज बढ़ती लागत, सिंचाई संकट, कर्ज और फसलों के उचित दाम नहीं मिलने जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में किसानों के श्रम का अपमान दुर्भाग्यपूर्ण है।
सम्मेलन में प्रतापगढ़ जिले के स्थानीय मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वरिष्ठ साथी उदा ने धरियावद में कृषि उपज मंडी की मांग और भंवर-शेमला बांध की ऊंचाई बढ़ाने के सवाल को प्रमुख जनमुद्दा बताया। वहीं देवला के बाबूलाल ने शिक्षा और ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं के लिए चलाए गए संघर्षों का उल्लेख किया।
ऐक्टू के राज्य सचिव सौरभ नरूका और किसान महासभा के राज्य उपाध्यक्ष चंद्रदेव ओला ने कहा कि पार्टी आने वाले समय में गांव-गांव जनसंपर्क अभियान चलाकर संगठन को मजबूत करेगी और जनसंघर्षों को व्यापक रूप देगी।
सम्मेलन का संचालन लालू पटेल ने किया, जबकि राजनीतिक-सांगठनिक रिपोर्ट सौरभ नरूका ने प्रस्तुत की, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। सम्मेलन में उदा, हवजी, गौतम मीणा और दिलखुश सहित कई साथियों ने अपने विचार रखे।