नाथद्वारा/उदयपुर, श्रीनाथजी की नगरी नाथद्वारा में आवारा श्वानों के साथ कथित अमानवीय व्यवहार को लेकर विवाद गहरा गया है। उदयपुर स्थित एनिमल प्रोटेक्शन सोसाइटी (APS) ने नगर पालिका प्रशासन पर पशु क्रूरता, नियमों की अनदेखी तथा पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं।
सोसाइटी की संस्थापिका डॉ. माला मट्ठा के अनुसार 10 जून को सूचना मिली कि नगर पालिका के निर्देश पर स्थानीय श्वानों को पकड़कर काइन हाउस में रखा गया है। आरोप है कि श्वानों को पकड़ने के लिए प्रतिबंधित उपकरणों का उपयोग किया गया तथा उन्हें पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध नहीं कराया गया।
सूचना मिलने पर 11 जून को डॉ. माला मट्ठा और किरण भावसार काइन हाउस पहुंचे। उनका दावा है कि वहां कई श्वान मौजूद नहीं थे, जबकि तीन श्वान पिंजरों में बंद मिले। इनमें से एक श्वान घायल अवस्था में था। सोसाइटी का आरोप है कि पशुओं की देखभाल के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं मौके पर नहीं थीं।
सोसाइटी ने यह भी कहा कि उसने पूर्व में नगर पालिका प्रशासन को श्वानों की नसबंदी और उपचार के लिए सहयोग का प्रस्ताव दिया था। संस्था का आरोप है कि प्रशासन ने इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए।
पुराने मामलों का भी किया उल्लेख
एनिमल प्रोटेक्शन सोसाइटी ने दावा किया कि दिसंबर 2024 और फरवरी 2026 में भी श्वानों के कथित अवैध विस्थापन के मामले सामने आए थे, जिन पर भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) और राज्य पशु कल्याण बोर्ड ने आपत्ति जताई थी। संस्था के अनुसार फरवरी 2025 में बिना आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के एबीसी कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा का भी विरोध किया गया था।
संस्था ने मई 2025 में एक बीमार श्वान के उपचार में कथित लापरवाही तथा दिसंबर 2025 में प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन का भी उल्लेख किया है। संस्था का कहना है कि विभिन्न स्तरों पर शिकायतों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
कार्रवाई की मांग
सोसाइटी ने दावा किया कि काइन हाउस से मुक्त कराए गए तीनों श्वानों को उपचार एवं नसबंदी के लिए उदयपुर लाया गया है। संस्था ने मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन राजसमंद और पशुपालन विभाग से मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, समाचार लिखे जाने तक नगर पालिका प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा जारी है और पशु कल्याण से जुड़े संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।