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रेलवे इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरणः जम्मू मण्डल में  क्षतिग्रस्त पुल  किया मरम्मत

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16 May 26
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रेलवे इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरणः जम्मू मण्डल में  क्षतिग्रस्त पुल  किया मरम्मत

श्रीगंगानगर। उत्तर रेलवे ने पुल संख्या-17 की बहाली का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह पुल जम्मू मण्डल में कठुआ ;जम्मू और कश्मीरद्ध और माधोपुर (पंजाब) सेक्शन के बीच रावी नदी पर स्थित एक महत्वपूर्ण रेलवे पुल है।
 उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री हिमांशु शेखर उपाध्याय के अनुसार वर्ष 2025 में आई भीषण बाढ़ और भारी बारिश के दौरान इस पुल को भारी नुकसान पहुंचा था। शुरू में यह अनुमान लगाया गया था कि इस क्षतिग्रस्त पुल की बहाली में, जिसमें 45 मीटर स्पैन वाले नॉन-स्टैंडर्ड गर्डर डिज़ाइन का इस्तेमाल किया गया था, लगभग दो साल का समय लग सकता है। रेलवे के इंजीनियरों की समर्पित टीम द्वारा अपना, गए अभिनव इंजीनियरिंग समाधानों, बारीकी से की गई योजना और निरंतर प्रयासों की बदौलत, बहाली का यह काम लगभग आठ महीनों में ही पूरा कर लिया गया है।
 श्री राजेश कुमार पांडे, महाप्रबंधक उत्तर रेलवे ने बताया कि पुल संख्या-17 की सफल बहाली के साथ ही, जम्मू और कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश में आई अभूतपूर्व बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुए सभी पांच प्रमुख रेलवे पुल अब पूरी तरह से बहाल हो चुके हैं।
 जेडआरयूसीसी के पूर्व सदस्य भीम शर्मा ने बताया कि इस महत्वपूर्ण पुल की बहाली से जम्मू मण्डल के साथ-साथ पूरे उत्तर रेलवे में ट्रेनों के परिचालन की दक्षता और समय की पाबंदी में काफी सुधार होगा। वाया सूरतगढ़, हनुमानगढ़, संगरिया, होकर संचालित होने वाली गाड़ी संख्या 19223/19224 साबरमती-जम्मूतवी-साबरमती भी कुछ दिनों बाद जम्मूतवी तक जाने लगेगी। इस पुल के टूटने के कारण यह गाड़ी साबरमती और फिरोजपुर के बीच ही संचालित हो रही थी। जालंधर से जम्मूतवी के बीच यह ट्रेन लंबे समय से आंशिक रद्द चली आ रही है। यह उपलब्धि रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता, तकनीकी विशेषज्ञता और समन्वित प्रयासों को दर्शाती है, जिन्होंने इस क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए अथक परिश्रम किया। 


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