उदयपुर। पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर द्वारा आयोजित मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ के अंतर्गत रविवार को परम्परा नाट्य समिति जयपुर की संस्था द्वारा दर्पण सभागार में संगीत मय नाट्य प्रस्तुति जयपुर की लोक प्रिय तमाशा शैली में शिव महिमा के रूप में तमाशा साधक दिलीप भट्ट के निर्देशन में प्रभावशील संगीत बद्ध करके प्रस्तुति दी गई। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में इस प्रस्तुति को खूब सराहा गया।
पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर के निदेशक फ़ुरकान खान ने बताया की प्रति माह आयोजित होने वाली मासिक नाट्य संध्या रंगशाला के अंतर्गत परंपरा नाट्य समिति जयपुर द्वारा शिव महिमा का मंचन रविवार को दर्पण सभागार, शिल्पग्राम उदयपुर में किया गया। यह नाटक तमाशा शैली पर आधारित संगीतमय प्रस्तुति थी जिसकी परिकल्पना एवं निर्देशन दिलीप भट्ट द्वारा की गई।
जयपुर की तमाशा शैली ढाई सौ वर्ष पुरानी लोक नाट्य शैली है। नव वर्ष के उपलक्ष्य में इस संगीत प्रधान शिव महिमा में शिव की प्रस्तुति के साथ शिव पार्वती प्रसंग को भी बड़े रोचक अंदाज में कलाकारों ने पेश किया। शिव जी कहते है जाती हो पिता के घर तो जाओ खुश होकर में तुम्हे नहीं रोकूंगा इच्छा है तुम्हारी तो नहीं रोकूंगा किंतु याद रखना तुम मैं शिव हंु तुम मेरी शक्ति हो, मैं हंु वैराग्य तुम मेरी अभिव्यक्ति हो, अर्थ हंु मैं तुम मेरी अनुरती हो यदि तुम पर आंच भी आई तो प्रलय हो जाएगा, मेरे क्रोध नल में दक्ष जल जाएगा जाओ सती जाओ तुम्हारे संकल्प की जय हो तुम्हारी यात्रा का मार्ग मंगलमय हो। यह शिव पार्वती की मार्मिक ओर नाट्य प्रस्तुति से सभागार उत्साह से भर गया। नाट्य प्रस्तुति में दिलीप भट्ट ने सूत्रधार की भूमिका बखूबी ढंग से निभाई और गायन पक्ष संभाला। इस प्रस्तुति में (शिव) हर्ष भट्ट, (दक्ष) सिकंदर अब्बास, (गणेश) विपिन अटल, (पार्वती) रेणु सनाढ्य की भूमिका निभाई। संगतकारों में तबले पर शैलेन्द्र शर्मा, संगीत पर मनोहर टांक, हारमोनियम पर शेर खान, कोरस में सचिन भट्ट, विपिन अटल, आदित्य भट्ट, मेकअप ओर लाइट नरेंद्र बबल और परिकल्पना एवं निर्देशन दिलीप भट्ट, सहायक रहे सचिन भट्ट। तमाशा शैली एक अपने आप में एक अनूठी लोक कला है जिसे भट्ट परिवार के कलाकारों ने जीवंत कर रखा है।
रंगमंच प्रेमियों ने केन्द्र की प्रशंसा की और ऐसे आयोजन करने के लिए धन्यवाद किया। अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में केन्द्र के उप निदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, उदय सिंह, मुकुल ऑदिच्य, अन्य अधिकारी कर्मचारी सहित शहर के कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सिद्धांत भटनागर ने किया।
नाटक के बारे में -
यह एक नाट्य प्रस्तुति है जो तमाशा (एक पारंपरिक लोक-नाट्य शैली) के रूप में शिव महिमा (भगवान शिव की महिमा) का वर्णन करती है। कलाकारों ने तमाशा साधक के रूप में भगवान शिव के विभिन्न रूपों को शास्त्रीय रागों और भाव-भंगिमाओं से प्रस्तुत किया। यह नाटक भगवान शिव के प्रति भक्ति, उनकी शक्ति और जीवन में सकारात्मकता लाने का संदेश देता है, जिससे दर्शक जुड़ाव महसूस करते हैं। भगवान शिव के स्वरूपों को शास्त्रीय संगीत और अभिनय के माध्यम से दर्शाया गया, जो दर्शकों को खूब पसंद आया है और शिव भक्ति का अनुभव कराता है।