उदयपुर। सामाजिक समरसता, सेवा और संस्कारों की मिसाल पेश करते हुए चौधरी मेवाड़ा कलाल समाज सेवा संस्थान, उदयपुर द्वारा प्रथम निःशुल्क 21वां सामूहिक विवाह समारोह का भव्य आयोजन 21 फरवरी 2026 को किया जा रहा है। यह आयोजन प्रतापनगर क्षेत्र स्थित सत्यनाम फार्म, मेघा आवास योजना में संपन्न होगा, जहां समाज के 19 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधेंगे।
संस्था की आयोजित बैठक में अध्यक्ष लोकेश चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन समाज के इतिहास में पहली बार मात्र एक रुपए का शगुन लेकर विवाह संपन्न करवाया जाएगा। इससे पूर्व हुए सभी सामूहिक विवाह में वर-वधु से भी शुल्क लिया गया था। सामूहिक विवाह का संपूर्ण खर्च इस बार समाजजनों की ओर से उठाया जा रहा है। साथ ही प्रत्येक परिवार को यह महसूस हो कि उनके घर में ही शादी हो रही है, इसके लिए व्यवस्थाओं पर पूरा ध्यान दिया गया है। प्रत्येक दुल्हन के साथ एक महिला व दुल्हे के साथ एक पुरुष कार्यकर्ता रहेगा जो उनको हर पल सहयोग करेंगे। इस अवसर पर सामूहिक विवाह की निमंत्रण पत्रिका का विमोचन भी किया गया तथा परंपरानुसार बोहरा गणेश जी मंदिर में भगवान श्री गणपति को प्रथम निमंत्रण अर्पित कर आयोजन की सफलता की मंगलकामना की गई।
समाज के महामंत्री एडवोकेट बंशीलाल चौधरी ने बताया कि आयोजन को सुव्यवस्थित और भव्य बनाने के लिए विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग समितियों का गठन किया गया है। सभी प्रभारियों को उनकी जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं ताकि प्रत्येक व्यवस्था सुचारू रूप से संपन्न हो सके। साथ ही, समाज की सभी इकाइयों के अध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्रों में समाज बंधुओं तक निमंत्रण पत्र पहुंचाने हेतु अधिकृत किया गया है और आवश्यकतानुसार उन्हें निमंत्रण पत्र उपलब्ध कराए गए हैं।
आयोजन कार्यक्रम के तहत 21 फरवरी की सुबह सभी जोड़ों की भव्य बिंदोली निकाली जाएगी, जिसके पश्चात सत्यनाम फार्म में विधिविधानपूर्वक विवाह संस्कार संपन्न होंगे। इसके साथ ही, सभी पधारे हुए अतिथियों के लिए भोजन प्रसादी का विशेष आयोजन भी किया जाएगा।
समिति द्वारा यह भी बताया गया कि बाहर से आने वाले जोड़ों एवं उनके परिजनों के लिए ठहरने और भोजन की संपूर्ण व्यवस्था समाज सेवा संस्थान की ओर से की गई है, जिससे किसी भी परिवार को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
यह सामूहिक विवाह समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की एकजुटता, सेवा भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व का जीवंत उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। चौधरी मेवाड़ा कलाल समाज का यह प्रयास निश्चित ही सामाजिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा।