यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट फॉर वॉटर एनवायरनमेंट एंड हेल्थ ,कनाडा की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार विश्व का जल दिवाला निकल चुका है। क्योंकि हमारे प्राकृतिक जल स्रोत जैसे नदी जिले वेटलैंड एस प्रेशर यह इतने डैमेज्ड हो चुके हैं कि अब उनकी रिकवरी संभव नहीं है।
विश्व के 400 करोड़ लोग हैं जो गंभीर जल संकट का वर्ष में कम से कम एक माह सामना करते हैं।
भूमि जल दोहन और जमीन का धंसना इतना विशाल हो चुका है की अब उसकी भरपाई असंभव है। विश्व के हर हिस्से में 30% ग्लेशियर सदैव के लिए समाप्त हो चुके हैं। पृथ्वी का 5% 2 मिलियन स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्र की जमीन भूमि जल के अति दोहन से नीचे बैठ गई है, अर्थात इसका जल दिवाला निकल चुका है।
नगर के वाटर हीरो वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर पी सी जैन ने यह बात कॉलेज का डेरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी के ऐन ऐस एस के छात्रों के समक्ष कही।
उन्होंने जब छात्रों से पूछा की प्रकृति का यह उपहार जल का दोहन कितने छात्र कर रहे हैं तो सभी ने हाथ खड़े कर दिए परंतु जल पुनर्भरण कितने छात्र कर रहे हैं एक भी छात्र में अपना हाथ नहीं खड़ा किया। अर्थात दोहन तो सभी कर रहे हैं पर जल दान कोई नहीं कर रहा। उन्होंने छात्रों को जल बर्बादी रोकने और वर्षा जल को बढ़ाने की तकनीक समझाइए जिससे हैंडपंप ट्यूबवेल रिचार्ज किया जा सकते हैं।
डॉक्टर पी सी जैन ने नगर में स्थित सामाजिक संगठनों से अपील की की वह रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग को प्राथमिकता देकर जल संरक्षण का अभियान चलावे।
स्थानीय निकाय भी अपने द्वारा स्थापित जय भूमि जल स्रोतों को आसपास के मकान से रिचार्ज करवा कर जनता को उदाहरण प्रस्तुत करें।
सत्र के अगले भाग में स्क्रीन एडिक्शन एवं खाने वाली तंबाकू और धुएं के रूप में लेने वाली तंबाकू के खतरों से आगाह किया और कुछ और उनसे बचने के उपाय बताए।
जल गीत एवं नशा गीत एवं लघु नाटिका में वंदना धायल , नताशा खंगारोत , प्रिया सिन्हा , चंदन बेनीवाल, सर्वेश औदिच्य छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भाग लिया, जिन्हें अपने द्वारा मोमेंटो देकर प्रोत्साहित किया गया।
डीन डॉक्टर लोकेश मीणा में डॉक्टर पी सी जैन को इस हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।