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15.82 करोड़ (81.71 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों तक पहुंचा नल जल कनेक्शन : राज्य सभा में केंद्रीय राज्य मंत्री ने दी जानकारी

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31 Mar 26
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15.82 करोड़ (81.71 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों तक पहुंचा नल जल कनेक्शन : राज्य सभा में केंद्रीय राज्य मंत्री ने दी जानकारी

उदयपुर। जल जीवन मिशन ने ग्रामीण भारत में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। सरकार निरंतर निगरानी और सुधारात्मक कदमों के माध्यम से योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मिशन की शुरुआत में केवल 3.23 करोड (16.7 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन थे, लेकिन 3 मार्च 2026 तक यह संख्या बढ़कर 15.82 करोड़ (81.71 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों तक पहुंच गई है।
राज्यसभा सांसद श्री चुन्नीलाल गरासिया की ओर से भारत सरकार जल शक्ति मंत्रालय से जल जीवन मिशन ग्रामीण पेयजल आपूर्ति पर प्रगति के संबंध में पूछे गये राज्य सभा अतारांकित प्रश्न के उत्तर में जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री वी. सोमण्णा ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अगस्त 2019 से शुरू किए गए जल जीवन मिशन (हर घर जल) के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मिशन की शुरुआत में केवल 3.23 करोड (16.7 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन थे। 03 मार्च 2026 तक यह संख्या बढ़कर 15.82 करोड़ (81.71þ) ग्रामीण परिवारों तक पहुँच गई है। स्वतंत्र तृतीय-पक्ष एजेंसी द्वारा किए गए मूल्यांकन (2024) में पाया गया कि 98.1 प्रतिशत परिवारों के पास नल कनेक्शन है। 87 प्रतिशत परिवारों को पिछले सप्ताह जल प्राप्त हुआ। 84 प्रतिशत परिवारों को अनुसूचित समय पर जल आपूर्ति मिली। 80 प्रतिशत परिवारों को न्यूनतम 55 एलपीसीडी पानी मिला। 76 प्रतिशत परिवार बैक्टीरियोलॉजिकल संदूषण से मुक्त पाए गए। 81 प्रतिशत परिवार रासायनिक संदूषण से मुक्त पाए गए। समग्र रूप से 76 प्रतिशत नल कनेक्शन कार्यशील पाए गए।
उन्होंने बताया कि सरकार ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कई कदम उठाए हैं, जिनमें नियमित समीक्षा, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण एवं ज्ञान साझा करने के लिए कार्यशालाएं सम्मेलन, तकनीकी सहायता के लिए बहु-विषयक टीमों द्वारा क्षेत्रीय दौरे शामिल हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों, आश्रमशालाओं एवं स्कूलों में पाइप जल आपूर्ति के लिए विशेष अभियान चलाए गए हैं। जेआईएम-आईएमआईएस एवं जेजेएम डैशबोर्ड के माध्यम से ऑनलाइन निगरानी की जा रही है।


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