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सांसद डॉ रावत द्वारा संसद में मामला उठाने के बाद पांच दिन ही प्रतापगढ कलेक्टर को हटाया, डूंगरपुर कलेक्टर को भी दूरस्थ भेजा

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01 Apr 26
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उदयपुर। डीएमएफ कार्यों में सांसद की अनुशंसा को ही दरकिनार करने वाली प्रतापगढ कलेक्टर अंजलि राजौरीया को संसद में मामला उठने के पांच दिन बाद ही वर्तमान पद से हटाकर जयपुर सचिवालय भेज दिया गया है, जबकि डूंगरपुर में दिशा बैठक के दौरान हुए विवाद को लेकर उनके पति अंकित कुमार को भी डूंगरपुर कलेक्टर से हटाकर बोर्डर के नजदीक फलोदी भेज दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि इन दोनों मामलों में सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक शिकायत की थी और प्रतापगढ कलेक्टर का मामला तो संसद में उठाया था। प्रतापगढ कलेक्टर को लेकर सांसद डॉ रावत ने साफ कहा था कि दंभ और अहंकार के कारण वे जनप्रतिनिधि के काम को स्वीकृत नहीं कर रही, जबकि उन कामों को राज्य सरकार की ओर से वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी थी। जानकारी के अनुसार सांसद उदयपुर, प्रतापगढ़ कलेक्टर के विरुद्ध संसद की विशेषाधिकार समिति में प्रकरण लाने वाले थे, लेकिन इससे पूर्व ही राज्य सरकार ने उनका तबादला कर दिया। संसद में मामला उठने के बाद राज्य सरकार ने भी इसको गंभीरता से लिया था।
प्रतापगढ कलेक्टर का विवाद
प्रतापगढ का जो डीएमएफ है उसमें 54 तरह के काम एक बैठक में स्वीकृत किए गए। इन सभी 54 कामों को शिक्षा व अन्य कार्यों के लिए महत्वपूर्ण मानते हुए राजस्थान सरकार ने वित्तीय स्वीकृति भी जारी कर दी कि यह काम होने चाहिए, लेकिन कलेक्टर ने 54 में से केवल 3 ही काम स्वीकृत किए। इस मामले को सांसद डॉ रावत पहले मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक लेकर गए। इसके बाद 27 मार्च को संसद में यह मामला उठाया जिसमें सांसद डॉ रावत ने कहा कि प्रतापगढ कलेक्टर ने अपने दंभ और अहंकार में काम कर रही है। जनप्रतिनिधि द्वारा अनुशंसा किए गए कामों को रोक रही है।
डूंगरपुर कलेक्टर का विवाद
डूंगरपुर जिले की दिशा समिति की बैठक में सांसद डॉ मन्नालाल रावत सह-अध्यक्ष के नाते भी मौजूद थे। इस दौरान डूंगरपुर-बांसवाडा सांसद राजकुमार रोत ने सूची से बाहर के विषय पर बोलना शुरु कर दिया। इसको रोकने का काम कलेक्टर का था, लेकिन उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया, जिस पर सांसद डॉ रावत ने आपत्ति की और सूची से बाहर के विषय को रुकवा दिया। इस दौरान सांसद डॉ रावत और रोत के बीच जोरदार विवाद भी हुआ। इसके बाद भी कलेक्टर डूंगरपुर इस मामले में मूकदर्शक बने रहे। इस पर सांसद डॉ रावत ने मुख्यमंत्री और मुख्यसचिव को शिकायत की थी। डूंगरपुर कलेक्टर द्वारा पूर्व में भी दिशा बैठक को बिना पूर्व सूचना के आयोजित करने पर डॉ मन्नालाल रावत ने विरोध किया था। साथ ही पूर्व में आयोजित दिशा बैठक को बिना दिशा निर्देशों के आयोजित करने पर भी बैठक में सांसद द्वारा विरोध जताया गया था।
अंजली राजौरीया को ठंडा विभाग, डूंगरपुर कलेक्टर को भी दूरस्थ भेजा
डीएमएफ कार्यों में लापरवाही और आनाकानी पर कलेक्टर प्रतापगढ़ को हटाकर जयपुर सचिवालय में लगाया, जबकि दिशा बैठक विवाद पर उनके पति अंकित कुमार को कलेक्टर डूंगरपुर से पाकिस्तान बॉर्डर फलोदी कलक्टर लगाया।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई, आभार जताया
प्रतापगढ और डूंगरपुर कलेक्टर का तबादला करने पर प्रतापगढ व डूंगरपुर के भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई है और इसके लिए मुख्यमंत्री भजनलाल का भी आभार जताया है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के काम रोकने से विकास कैसे होगा, क्योंकि कहां किस काम की जरुरत है यह जनप्रतिनिधि से ज्यादा कोई नहीं जानता।
 


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