उदयपुर। बदनोर की हवेली स्थित श्री मंशापूर्ण हनुमान मंदिर में मण्डल संरक्षक भूपेश मेहता एवं श्री मंशापूर्ण मित्र मंडल के तत्वाधान में आयोजित हनुमान जन्मोत्सव का पर्व भक्ति और श्रद्धा के अनूठे संगम के साथ संपन्न हुआ। 1111 मीटर लंबी भव्य पाग शोभायात्रा के दौरान समूचा शहर राममय हो गया और हजारों श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनकर पुण्य लाभ कमाया।
जब 'बालक राम' ने हनुमान जी की पाग पर की पुष्पवर्षा
शोभायात्रा के दौरान एक बेहद भावुक और अद्भुत दृश्य तब सामने आया जब यात्रा मंदिर की ओर लौट रही थी। अयोध्या के श्री राम के रूप में सजे-धजे एक बालक ने जैसे ही हनुमान जी की पाग पर पुष्प वर्षा की, वहां मौजूद हर भक्त भावविभोर हो उठा। इस दृश्य को देख शोभायात्रा के साथ चल रहे भक्तों ने भी 'बालक रूपी श्रीराम' पर पुष्प वर्षा शुरू कर दी, जिससे पूरा मंदिर परिसर और तंग गलियां 'जय श्री राम' के जयकारों से गुंजयमान हो उठीं। मार्ग में जगह-जगह भक्तों और विभिन्न संगठनों द्वारा शीतल पेय, जलपान और फल वितरण की विशेष व्यवस्था की गई थी।
पीत वस्त्रों और चूंदड़ साड़ियों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
शोभायात्रा में परंपरा की सुंदर झलक देखने को मिली। पुरुष पीले कुर्ते और सफेद पजामे में नजर आए, तो वहीं महिलाएं चूंदड़ और लहरिया साड़ी पहनकर मंगल कलश धारण किए हुए चल रही थीं। यात्रा में हाथी, घोड़े, ऊंट, बगिया और भगवान श्री राम व हनुमान जी की विशेष झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। साथ ही अखाड़ा प्रदर्शन के जरिए कलाकारों ने अपने शौर्य का परिचय दिया।
महाराज कुमार हरित राज सिंह मेवाड़ ने की महाआरती
जन्मोत्सव के पावन अवसर पर सुबह 6 बजे महारुद्राभिषेक और 7:30 बजे पंचामृत अभिषेक के साथ अनुष्ठान शुरू हुए। शाम 5 बजे प्रभु को भव्य छप्पन भोग धराया गया। इस भोग को राजू भाई सेठ के 101 कारीगरों ने पूरी सात्विकता के साथ दूधतलाई में स्नान कर और कोरे वस्त्र पहनकर तैयार किया था। उत्सव का चरमोत्कर्ष शाम 7:15 बजे की महाआरती रही, जिसमें डॉ. कुंवर लक्षराज सिंह मेवाड़ के सुपुत्र महाराज कुमार हरित राज सिंह मेवाड़ ने विशेष रूप से उपस्थित रहकर प्रभु की आरती उतारी और आशीर्वाद लिया। पैलेस की ओर से श्री मंशापूर्ण हनुमान जी को विशेष चढ़ावा अर्पित किया गया।
सीता स्वयंवर के मंचन के साथ महाप्रसादी
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत वृंदावन के कलाकारों ने हेमराज राष्ट्रीय व्यायामशाला में सीता स्वयंवर, धनुष यज्ञ और राम विवाह का जीवंत मंचन किया। इससे पूर्व ब्रज की लठमार और फूलों की होली ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था। कार्यक्रम के अंत में विशाल महाप्रसादी का आयोजन हुआ, जिसमें हजारो भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की।