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सांसद डॉ रावत के प्रश्न पर जवाब: इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट के मामलों में बडी ताकत बना भारत, मोबाइल का निर्यात 127 गुना बढ़ा

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03 Apr 26
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उदयपुर। विगत 11 सालों में इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट के मामलों में एक बडी ताकत बन गया है। पिछले 11 सालों में भारत से मोबाइल का निर्यात 127 गुना बढ़ गया है। सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम की सफलता और सेमीकंडक्टर में क्षमताओं को और बढ़ाने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 में उपकरण और सामग्री के निर्माण, डिजाइन फुल स्टैक, भारतीय आईपी और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की भी घोषणा कर दी है।
सांसद डॉ मन्नालाल रावत द्वारा संसद में पूछे गए अतारांकित प्रश्न पर इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने यह जानकारी दी।
सांसद डॉ रावत ने देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम, वर्तमान में देश में स्थापित या स्थापित की जा रही सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों की संख्या आदि को लेकर प्रश्न किए थे।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि 2014-15 में इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं का उत्पादन 1.9 लाख करोड था जो 2024-25 में 6 गुना बढकर 12 लाख करोड का हो गया। 2014-15 में इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं का निर्यात 38 हजार करोड का था जो 2024-25 में 8 गुना बढकर 3.3 लाख करोड का हो गया। मोबाइल फोन का उत्पादन 2014-15 में 18 हजार करोड का था जो 2024-25 में 28 गुना बढकर 5.45 लाख करोड का हो गया। 2014-15 में मोबाइल फोन का निर्यात 1500 करोड का था जो 2024-25 में 127 गुना बढकर 2 लाख करोड का हो गया है। इसी तरह  मोबाइल फोन आयातीत ईकाइयां 2014-15 में कुल मांग का 75 प्रतिशत थी जो 2024-25 में कुल मांग का केवल 0.02 प्रतिशत रह गई।  
केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि भारत की इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण कार्यनीति प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और भारत को वैश्विक विनिर्माण केन्द्र बनाने के दृष्टिकोण से प्रेरित है। सरकार ने सेमीकंडक्टर सहित संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए एक संरचित और लक्षित नीति अपनाई है। इन नीतियों के परिणामस्वरूप, पिछले 11 वर्षों में भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का काफी विस्तार हुआ है। सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में अपने विनिर्माण इकोसिस्टम के विकास को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने जनवरी 2022 में सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम शुरू किया। इसका उद्देश्य डिजाइन, फैब्रिकेशन, असेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग और मॉड्यूल मैन्युफैक्वरिंग से लेकर एक संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित करना है। मात्र चार साल की छोटी अवधि में, सरकार ने लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धताओं के साथ 10 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इस साल वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने के लिए 2 और संयंत्रों के साथ दो संयंत्रों (माइक्रोन और कायनेस) से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो गया है।
केंद्रीय राजय मंत्री ने बताया कि सरकार भारत के चिप डिजाइन इकोसिस्टम को दो तरीकों से विकसित कर रही है। पहला भारतीय डिजाइन इंजीनियरों को चिप डिजाइन टूल के माध्यम से समर्थन करना जिसमें दुनिया में अपनी तरह की एक अनूठी पहल में, सरकार ने 8 अलग-अलग कंपनियों से 315 विश्वविद्यालयों को बिना किसी लागत के अत्याधुनिक चिप डिजाइन उपकरण प्रदान किए हैं। अब तक इनका इस्तेमाल 200 लाख घंटे से ज्यादा हो चुका है। इन उपकरणों का उपयोग करते हुए, पूरे भारत में 75 संस्थानों द्वारा चिप्स को टेप किया गया है, जिसमें 180 एनएम पर 149 चिप्स, एससीएल मोहाली और विदेशी फाउंड्री में 62 चिप शामिल हैं। दूसरा अनुदान, मुफ्त डिजाइन उपकरण और निर्माण समर्थन के माध्यम से भारतीय डिजाइन कंपनियों का समर्थन करना जिसमें सरकार ने सेमीकंडक्टर चिप्स और एसओसी के डिजाइन के लिए 24 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ये परियोजनाएं वीडियो निगरानी, ड्रोन का पता लगाने, ऊर्जा मीटरिंग, माइक्रोप्रोसेसर, उपग्रह संचार और ब्रॉडबैंड और आईओटी एसओसी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को संबोधित करती हैं।
इसके अलावा, लचीली सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं को आगे बढ़ाने और पूरक शक्तियों का लाभ उठाने के अवसरों पर द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए, सरकार ने संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, यूरोपीय संघ, सिंगापुर और नीदरलैंड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के विकास से पर्याप्त रोजगार सृजन हुआ है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सहित लगभग 25 लाख नौकरियों का समर्थन करता है। इसमें से, अकेले मोबाइल फोन निर्माण क्षेत्र विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, आपूर्ति श्रृंखला और संबद्ध सेवाओं में लगभग 12 लाख नौकरियों का समर्थन करता है।
 


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