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सदाबहार नगमों से सजी सुरों की मंडली की महफिल, मधुर धुनों ने बांधा समां, भावुक पल में आशा ताई को दी श्रद्धांजलि

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13 Apr 26
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सदाबहार नगमों से सजी सुरों की मंडली की महफिल, मधुर धुनों ने बांधा समां, भावुक पल में आशा ताई को दी श्रद्धांजलि

उदयपुर। सुरों की मंडली संस्था की ओर से मधुश्री बैंक्वेट हॉल, अशोका पैलेस में आयोजित “सदाबहार नगमे” कार्यक्रम संगीत प्रेमियों के लिए एक यादगार संध्या बनकर उभरा, जहां पुराने दौर के अमर गीतों ने हर किसी को भावनाओं और यादों की दुनिया में पहुंचा दिया।

संस्था के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि करीब 30 गायकों ने अपनी मधुर आवाज़ में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं, जिससे पूरा सभागार सुरों और तालियों की गूंज से सराबोर हो गया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य पुराने दौर के उन अनमोल गीतों को फिर से जीवंत करना है, जो आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत अनुराधा माथुर के मधुर गीत “तेरे कारण मेरे कारण” से हुई, जिसने माहौल को सुरमय बना दिया। इसके बाद अरुण कुमार चौबीसा ने “किसी राह में किसी मोड़ पर” गाकर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी, वहीं अशोक जोशी ने “आने से उसके आए” से समां बांध दिया। दिव्या सरस्वत ने “चुरा लिया है तुमने जो दिल” की खूबसूरत प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

डॉ. हर्षा निभनानी की “बाहों में चले आओ” और गौरव स्वर्णकार के “चाहूंगा मैं तुझे सांझ” ने कार्यक्रम को और ऊंचाई दी। गीता सिंह राठौड़ ने “तुम मुझे यूँ भुलाना” के माध्यम से भावनात्मक रंग बिखेरे, जबकि गोपाल गोठवाल ने “चल अकेला चल अकेला” गाकर अलग ही छाप छोड़ी।

ज्योति मोदीयानी का “कभी कभी मेरे दिल” और कमल कुमार जुनेजा का “है अपना दिल तो आवारा” दर्शकों के बीच खूब सराहा गया। “जिंदगी एक सफर” की प्रस्तुति ने पुराने दौर की यादें ताजा कर दीं। मेघा गोस्वामी, मोहन सोनी और नीलम कौशल ने भी अपने-अपने गीत “तुझे ना देखूं तो चैन”, “आ जा तुझको पुकारे” और “पिया ऐसो जिया में समाए” से समां बांध दिया।

नीलम पटवा का “गली में आज चांद निकला”, निशा राठौड़ का “ओ मेरे दिल के चैन” और नूतन बेदी का “जरा सुन हसीना ऐ नाजनीन” दर्शकों को खूब पसंद आया। प्रीति माथुर, पुष्कर नायक और राजलेश जीनगर ने भी अपनी शानदार प्रस्तुतियों से महफिल में रंग भर दिए।

एस.डी. कौशल और एस.के. मेहता ने अपने गीतों से पुराने दौर की झलक पेश की, वहीं संगीता गोस्वामी और सुशील वैष्णव ने भी अपनी गायकी से दर्शकों का दिल जीत लिया। विजय राजपूत और विष्णु वैष्णव की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और भी ऊर्जावान बना दिया, जबकि योगेश उपाध्याय और महावीर जैन ने अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम को शानदार समापन दिया।

प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले को दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान एक भावुक क्षण तब आया, जब सुप्रसिद्ध गायिका आशा ताई के निधन का समाचार मिला। इस खबर ने पूरे माहौल को कुछ देर के लिए गमगीन कर दिया। सुरों की मंडली के सभी सदस्यों और उपस्थित श्रोताओं ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर सचिव अरुण चौबीसा ने कहा कि यह देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा, “हमने उनके गीतों के साथ जीवन के अनगिनत खूबसूरत पल बिताए हैं और उनके नग्मे हमेशा हमारी यादों और दिलों में जिंदा रहेंगे।”

कोषाध्यक्ष योगेश उपाध्याय ने बताया कि संस्था जल्द ही आशा ताई की स्मृति में एक विशेष संगीतमय श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करेगी, जिसमें सुरों की मंडली के सभी कलाकार उनके अमर गीतों के माध्यम से उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देंगे।

कार्यक्रम का सफल संचालन नूतन वेदी, गोपाल गोठवाल और मोहन सोनी ने किया। अंत में सभी कलाकारों और श्रोताओं ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि संस्था आगे भी संगीत की इस परंपरा को जीवंत बनाए रखते हुए ऐसे आयोजनों का निरंतर आयोजन करती रहेगी, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन सदाबहार नग्मों से जुड़ी रहें।
 


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