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उदयपुर स्थापना दिवस का ऐतिहासिक महत्व-डॉ. श्रीनिवास महावर

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19 Apr 26
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उदयपुर स्थापना दिवस का ऐतिहासिक महत्व-डॉ. श्रीनिवास महावर

उदयपुर | जन मत मंच द्वारा उदयपुर वर्षो पूर्व नगर को बसाने वाले मेवाड़ महाराणा उदय सिंह को याद किया |
मंच के अध्यक्ष डॉ महावर ने बताया की 
उदयपुर स्थापना दिवस (Udaipur Foundation Day) हर साल अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर उत्साह के साथ मनाया जाता है। चित्तौड़गढ़ पर मुगलों के लगातार हमलों के बाद, सुरक्षित स्थान की तलाश में महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने अरावली की पहाड़ियों के बीच घिरे गिर्वा घाटी में पिछोला झील के किनारे एक नई राजधानी के रूप में उदयपुर की स्थापना की थी। यह उदयपुर के गौरवशाली इतिहास और महाराणा उदय सिंह द्वितीय के संघर्ष एवं दूरदर्शिता को याद करने का दिन है। 
स्थापना दिवस के अवसर पर उदयपुर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, शोभायात्रा, और आतिशबाजी का आयोजन किया जाता है। शहर के मुख्य स्थलों को सजाया जाता है। साथ ही उदयपुर की सांस्कृतिक विरासत, महलों, झीलों और इसके इतिहास को याद किया जाता है। शहर की सुरक्षा के लिए 6 किलोमीटर लंबी दीवार (परकोटा) बनाई गई थी, जिसमें सूरजपोल, चांदपोल, उदयपोल, हाथीपोल, अंबापोल, ब्रह्मपोल और दिल्ली गेट (कुल सात मुख्य प्रवेश द्वार) थे।
आज उदयपुर डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इसे 'झीलों का शहर' (City of Lakes) और 'पूर्व का वेनिस' (Venice of the East) भी कहा जाता है।

इस अवसर पर मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर, डॉ.प्रियदर्शी ओझा, विशाल मथुर एवं  विनोद कुमार चौधरी ने बताया कि-
महाराणा उदय सिंह द्वितीय द्वारा स्थापित उदयपुर, एक राजसी रियासत से आज एक आधुनिक, पर्यटन-केंद्रित स्मार्ट शहर में बदल गया है। अरावली की घाटियों में बसा यह शहर, अपनी संस्कृति को संरक्षित करते हुए, पर्यटन, शिक्षा, और व्यापार के क्षेत्र में तेजी से विकसित हुआ है, जो इसके ऐतिहासिक आकर्षण और आधुनिक सुविधाओं का एक अनूठा संगम बनाता है।


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