उदयपुर। अक्षय तृतीया के अवसर पर जिला प्रशासन की सक्रियता और विभिन्न संगठनों के सहयोग से उदयपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में बाल विवाह रोकने में बड़ी सफलता मिली है। विशेष अभियान के तहत एक ही दिन में कुल 10 बाल विवाह रुकवाए गए, जिसमें प्रशासन की भूमिका प्रमुख रही।
जिला प्रशासन के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान में गायत्री सेवा संस्थान और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोग से उदयपुर जिले में 6, प्रतापगढ़ में 2 तथा सीकर जिले में 2 बाल विवाह रुकवाए गए। प्रशासन को मिली सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस और संबंधित विभागों ने मौके पर पहुंचकर बाल विवाहों को रुकवाया।
बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे इस अभियान के तहत प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि बाल विवाह की सूचना देने पर 1100 रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा तथा सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह करवाना या उसमें किसी भी प्रकार का सहयोग करना दंडनीय अपराध है। इसमें शामिल सभी व्यक्तियों चाहे वे परिवारजन हों, बाराती, मैरिज हॉल संचालक, कैटरर, बैंड-बाजा संचालक या विवाह संपन्न कराने वालेकृसभी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उदयपुर जिले के भेसड़ा खुर्द (डबोक थाना क्षेत्र) में प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से 6 बाल विवाह रुकवाए गए। इस दौरान एक बालक और बालिका को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर रखा गया। साथ ही संबंधित लोगों के खिलाफ पाबंद कार्रवाई भी की गई।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर की आड़ में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन, पंचायतों, स्कूलों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चला रहा है।
अभियान के तहत बाल विवाह रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर 823999288 जारी किया गया है, जिस पर कोई भी व्यक्ति सूचना दे सकता है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे इस सामाजिक बुराई के खिलाफ आगे आकर सहयोग करें, ताकि बच्चों का सुरक्षित और बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।