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सांसद के प्रयासों से उपजे किसानों के खेत में मूंग, बीज और प्रशिक्षण मिलने से किसानों को मिली खुशी

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02 May 26
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सांसद के प्रयासों से उपजे किसानों के खेत में मूंग, बीज और प्रशिक्षण मिलने से किसानों को मिली खुशी

उदयपुर। उदयपुर सांसद डॉ मन्नालाल रावत के प्रयास से संसदीय संकुल योजना के तहत लिए गए निर्णय अब रंग लाने लगे हैं और किसानों के चेहरों पर भी खुशी झलकने लगी है। इस योजना में 73 किसानों को मूंग के बीज प्रदान कर खेती का भी प्रशिक्षण दिया गया। इन किसानों के खेतों पर आज मूंग की फसल तैयार हो गई है।
सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत ने शनिवार को जिला परिषद् स्थित सांसद सेवा केन्द्र पर जिले के संसदीय संकुल देवास की समीक्षा बैठक ली गई जिसमें यह कृषि अधिकारियों द्वारा यह जानकारी दी गई। इस बैठक में कृषि, उद्यान, कृषि विज्ञान केन्द्र, राजीविका, वन एवं शिक्षा विभाग के अधिकारीगण उपस्थित रहे।
बैठक में कृषि अधिकारियों ने बताया कि पूर्व में देवास संकुल के 10 गांवों के 73 किसानों को मूंग के बीज वितरीत किये गये थे एवं उन्हें खेती का प्रशिक्षण प्रदान किया गया था। इन सभी किसानों के खेतों में वर्तमान में मूंग की फसल तैयार हो गई है, जिससे क्षेत्र के किसानों में प्रसन्नता है।
सांसद डॉ रावत ने बैठक में संसदीय संकुल के सभी गांवों के 108 किसानों को सोयाबीन, मक्का व मूंग के बीज का मिनी किट वितरण करने एवं खेती का प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिए। साथ ही 20-20 चयनित किसानों को पपीते एवं सीताफल के पौधे वितरित करने का निर्णय लिया गया।
उद्यानिकी विभाग द्वारा जनजाति विभाग की योजना के तहत 10 तरह की सब्जियों के बीज वितरण करने का निर्णय लिया गया। वन विभाग द्वारा सभी 20 गांवों की वन भूमि में फलदार पौधे जैसे चीकू, सीताफल, आम, आवला, करोन्दा, महुआ का पौधरोपण करने तथा चावण्ड के थूर की घाटी में ईको-टूरिस्म विकसित करने पर चर्चा की गई। शिक्षा विभाग द्वारा सभी 20 गांवों के राजकीय विद्यालयों में फर्नीचर दिये जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही शौचालय निर्माण, छत की वाटर प्रुफिंग करने के प्रस्ताव तैयार करने का निर्णय लिया गया।
संसदीय संकुल अन्तर्गत डॉ. मन्नालाल रावत द्वारा उदयपुर जिले के देवास क्षेत्र के 20 गांवों तथा सलूम्बर जिले के 20 गांवों का चयन किया गया है, जहां स्थानीय रोजगार के साधन उपलब्ध कराकर क्षेत्र में हो रहे पलायन को रोकने का काम किया जा रहा है। राजीविका के माध्यम से प्रत्येक संकुल से 100 महिलाओं या बालिकाओं को आरएसईटीआई माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जावेगा। 


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