वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486 वीं जयंती के उपलक्ष्य में मेवाड़ क्षैत्रीय महासभा के सात दिवसीय कार्यक्रम के क्रम में, मेवाड़ मुस्लिम समाज, एवं प्रताप-हकीम-पूँजा मित्र संघ ,उदयपुर विकास संघर्ष समिति द्वारा 11 जून, गुरुवार को महाराणा प्रताप, मोतीमगरी स्मारक समिति, पर वीर सेनापति हकीम ख़ां सूर प्रांगण में माल्यार्पण पश्चात एक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया । हिदायत तुल्ला ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता सतीश शर्मा ने की जिसमें विशिष्ट अतिथि ,पृथ्वी सिंह चौहान कमलेन्द्र सिंह पंवार, प्रेम सिंह शक्तावत रहे। कार्यक्रम का आरम्भ शायर मुश्ताक चंचल ने अपनी कविता ’’ ना उदय सिंह होते ना उदयपुर होता ना दुनिया में यह शहर मशहूर होता’’ सुनाई इसके पश्चात अनिस अहमद ने देश भक्ति गीत ’’ सूर हकीम प्रताप पूंजा मूगलों से भिड़ जाएं , मान सिंह को रण में रुलाए माटी तेरे वास्ते ’’ सुनाकर शहीद हकीम खां सूर को श्रंद्धाजली पेश की, प्रोफेसर विमल शर्मा ने प्रताप पर स्वरचित कविताएं सुनाई, शायर रियाज भाई, प्रोफेसर नन्दकिशोर शर्मा , डॉ खुर्शीद , ज्योत्सना झाला, जफर जिलानी, फिरोज बशीर, उमर फारुख ने भी अपनी प्रस्तुतियां पेश की । कार्यक्रम अध्यक्षता कर रहे सतीश शर्मा ने महाराणा प्रताप की जीवनी एवं मेवाड़ की 36 कौमों को साथ लेकर जो संदेश दिया उसको आज आत्मसात करने की जरुरत बताई । पधारे वक्ताओं ने महाराणा प्रताप एवं हकीम खां सूर की वीरता एवं मित्रता के विचार प्रस्तुत कर मेवाड की सामाजिक प्रेम एवं सौहार्द के आदर्श को जीवन में अपनाने का संकल्प दिलाया इस अवसर पर सत्यपाल डोडीया, अजय सिंह, शांता प्रिंस, चेतन कुमावत, आबिद शेख, सययद ईरशाद अली, भंवर सिंह अखेपुर, शहजाद खान, अन्जुमन सदर मुख्तार कुरैशी, आजम खान, दौलत राम,भगवती, बंशीलाल जी, किशन जी, विनोद कुमार , गिरिराज मीणा, विमल नगर, यामीन खान, रियाज खान, शहजाद खान,भारती, दिलीप कुमार बापना ने भी अपने विचार रखे। मंच संचालन मुश्ताक चंचल ने किया एवं हिदायत तुल्ला ने संगोष्ठि में पधारे तमाम महमानों का धन्यवाद किया।