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प्राकृतिक खेती वर्तमान ही नहीं भविष्य की भी आवश्यकता - सांसद श्री सीपी जोशी

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11 Jun 26
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प्राकृतिक खेती वर्तमान ही नहीं भविष्य की भी आवश्यकता - सांसद श्री सीपी जोशी

उदयपुर। कृषि विभाग उदयपुर द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र, सियाखेड़ी वल्लभनगर पर प्राकृतिक खेती की कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें विधान सभा क्षेत्र वल्लभनगर एवं मावली केे 500 से अधिक किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा चित्तौड़गढ सांसद सी.पी. जोशी ने उपस्थित कृषक समुदाय को अधिकाधिक प्राकृतिक खेती प्रकल्प को अपनाने का आवाहऩ किया, ताकि जल थल एवं वायु का  प्रदूषण रोका जा सके। साथ ही मानव एवं अन्य पशु पक्षियों को घातक बीमारियों से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल वर्तमान नहीं भविष्य की भी आवश्यकता है। इस हेतु श्री जोशी ने समस्त उपस्थित प्रतिभागियों को संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विधानसभा क्षेत्र वल्लभनगर विधायक उदय लाल डागी ने कृषकों को अपना अनुभव बताते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से रसायन रहित उत्पाद की कीमत बाजार में अधिक मिलती है व कैंसर जैसी बीमारियों से भी बचा जा सकता है। विशिष्ट अतिथि समाजसेवी पुष्कर तेली ने हिंसक रसायनिक खेती का त्याग कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने हेतु आवाहन किया।
समाजसेवी प्रमोद सामर ने अवगत कराया कि रसायनिक उर्वरकों के आयात पर देश की बहुत बड़ी राशि खर्च होती है। अतः प्राकृतिक खेती अपनाना देश हित में है। कार्यक्रम के संयोजक श्री नरेन्द्र सिंह आसोलिया ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ऐसी कार्यशाला देश के प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में आयोजित कर अधिकाधिक कृषक समुदाय को जोडा जाना सरकार की प्राथमिकता है। श्री भवर भट्ट ने केन्द्र सरकार विभिन्न हित कारी योजनाओं पर प्रकाश डाला। संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) सुधीर कुमार वर्मा ने राष्ट्रिय प्राकृतिक खेती मिशन की प्रदेश एवं जिले में अबतक रही प्रगती के बारे में अवगत कराया व आने वाले समय में इस मिशन अंतर्गत कि जाने वाली गतिविधियों की रूपरेखा की जानकारी दी।

कार्यक्रम में विभिन्न संस्थाओं द्वारा प्राकृतिक खेती विषयक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आत्मा योजना परियोजना निदेशक, सहायक निदेशक कृषि उपजिला गिर्वा, कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों व कार्मिकों की भागीदारी रही। धन्यवाद कृषि विज्ञान केन्द्र के मुख्य वैज्ञानिक मणीराम चौधरी द्वारा ज्ञापित किया गया। संचालन कृषि अधिकारी महेश आमेटा ने किया।


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