उदयपुर। राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में गुरुवार को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान के उपनिदेशक डॉ. द्वारका प्रसाद गुप्ता ने बताया कि बाल श्रम एक गंभीर सामाजिक समस्या है। स्कूल जाने की उम्र में बच्चों के काम करने से उनका बचपन और शिक्षा दोनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे का अधिकार है कि वह शिक्षा प्राप्त करे, खेलकूद में भाग ले तथा अपने सपनों को साकारकरें।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि पशुपालन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय का महत्वपूर्ण साधन है। गाय, भैंस, बकरी, भेड़ एवं मुर्गी पालन से परिवारों की आय में वृद्धि होती है, जिससे वे अपने बच्चों की शिक्षा पर बेहतर ध्यान दे सकते हैं। सरकार एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण, ऋण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भर बन रहे हैं और बच्चों को बेहतर भविष्य मिल रहा है। कार्यक्रम में डिप्लोमा परीक्षा के पर्यवेक्षक एवं वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश नागौरी ने उपस्थित विद्यार्थियों को बाल श्रम निषेध की शपथ दिलाई तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।
इस अवसर पर संस्थान के कर्मचारी विजय गरासिया, विनोद कुमार एवं धर्मेन्द्र रावत सहित विद्यार्थियों विजय खटिक, किशन बैरवा और निखिल मेघवाल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बाल श्रम मुक्त गांवों की पहचान स्थापित करने और इस दिशा में जनजागरण करने का संकल्प लिया।