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मेवाड़ के प्रधान ठाकुर अमरचंद बड़वा के पांच दिवसीय जन्म जयंती कार्यक्रमों का "अमर विजय दिवस" से शुभारंभ 

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20 Jul 26
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मेवाड़ के प्रधान ठाकुर अमरचंद बड़वा के पांच दिवसीय जन्म जयंती कार्यक्रमों का "अमर विजय दिवस" से शुभारंभ 

उदयपुर | मेवाड़ के यशस्वी प्रधान ठाकुर अमरचंद बड़वा के  305 वें जन्म जयंती समारोह के अंतर्गत ठाकुर अमरचंद बड़वा स्मृति संस्थान की ओर से पांच दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ माणिक्य लाल वर्मा पार्क (दूध तलाई ) पर अमर विजय दिवस मना कर  हुआ।
संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर विमल शर्मा ने बताया कि शिप्रा युद्ध में जब मेवाड़ की अधिकांश सेना काम आ गई तब महाधराव सिंधिया ने विद्रोही सरदार फितरती रतन सिंह को मेवाड़ की गद्दी पर आसीन करने के लिए जनवरी 1769 पर आक्रमण कर दिया।
तब अपदस्थ ठाकुर अमर सिंह बड़वा को मान मुनव्वल कर पुनः प्रधान बनाया गया। सेनापति व प्रधान ठाकुर अमरचंद बड़वा ने नगर के मुख्य द्वारों, गढियों पर  राजपूत योद्धाओं सहित तोपों को स्थापित कर सिंधिया से डटकर मुकाबला किया । माछला मंगरा  स्थित दुश्मन भंजन तोप की मार  द्वारा बाघ सिंह (कजराली) ने सिंधिया को सूरजपोल में घुसने नहीं  दिया। शेष द्वारों पर नियुक्त योद्धाओं ने भी सिंधिया को शहरकोट के नजदीक फटकने नहीं दिया । लम्बे संधर्ष के चलते उदयपुर में भोजन सामग्री की कमी होने पर मजबूरी मे मराठा से संधी करने का प्रस्ताव करना पड़ा। अंततोगत्वा 6 माह के असफल डेरे के बाद 21 जुलाई 1769 को मराठों की सेना  उदयपुर से प्रस्थान कर मालवा लौट गई ।  21 जुलाई 1769 का यह दिन संक्रमण कालीन मेवाड़  मे "अमर विजय दिवस" के रूप में मनाया जाकर ठाकुर अमरचंद बड़वा को  कुशल युद्ध नीतिकार के रुप मे नमन करता है।
महासचिव डॉ राजेंद्र नाथ पुरोहित ने बताया की नगर निगम उदयपुर द्वारा माणिक्य लाल वर्मा पार्क (दूध तलाई ) में प्रदर्शित पट्टिका इसी युद्ध कौशल के संदर्भ में है। उपाध्यक्ष डॉ अनिल शर्मा ने स्मृति संस्थान के कार्य का ब्यौरा दिया तथा संगठन सचिव जय किशन चौबे ने आगामी चार दिवसीय कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए 30 जुलाई की वाहन रैली को सफल बनाने का आह्वान किया। लोकेश पालीवाल ने बड़वा जी पर प्रकाशित पुस्तक का डिजिटल कांटेंट बनाने की पेशकश की।
कार्यक्रम में पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में मनोहर लाल मूंदड़ा, संध्या शर्मा रावल, राजेंद्र प्रसाद सनाढ्य, इंद्र सिंह राणावत, हरीश रावल, कमलेश पुरोहित, श्रीरत्न मोहता, डॉ रमाकांत शर्मा, चैन शंकर दशोरा, विभोर रावल, हाजी सरदार मोहम्मद, बद्री लाल भारद्वाज, नयन कुमार बड़वा,  डॉ विमल शर्मा, बाबूलाल शर्मा, राजेंद्र प्रसाद, सुरेश तंबोली, राजेंद्र नाथ पुरोहित, दुर्गेश पुरोहित सहित अन्य मौजूद थे।
 


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