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जनजाति क्षेत्र की जीवन रेखा अरावली के संरक्षण हेतु जनजाति समाज से हो व्यापक चर्चा हो - वनवासी कल्याण आश्रम

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10 Aug 26
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उदयपुर। राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद ने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण हेतु विषय विशेषज्ञों के साथ एक व्यापक चर्चा की।

चर्चा में अरावली पर्वत परिभाषित करने हेतु बनी समिति का कार्यकाल बढ़ाने एवं समिति के क्षेत्र-दौरों का व्यापक प्रचार हितधारकों की भाषा और जनजाति जनप्रतिनिधियों एवं जनजाति आयोग से व्यापक परामर्श किए जाने की मांग की गई।राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद् के प्रदेश महामंत्री विरेन्द्र प्रकाश पंचोली ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर अरावली पर्वत को परिभाषित करने हेतु बनी उच्चाधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष को 2 अगस्त को पत्र लिखकर अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने समिति का कार्यकाल 2 माह के लिए बढाने की मांग की गई थी।

ताकि समिति सभी हितधारकों से व्यापक और सार्थक परामर्श कर सके।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में दिया गया 20 दिन का समय एकदम व्यावहारिक नहीं है, बल्कि यह केवल औपचारिकता पूरी करना है।कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय संयुक्त महामंत्री विष्णु कान्त द्वारा लिखे गए पत्र में यह भी मांग की गई है कि अरावली क्षेत्र में राजस्थान एवं गुजरात के जनजाति समुदाय के लोग भी सुदूर क्षेत्रों में लाखों की संख्या में निवास करते हैं, और यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची में आता है।

इसलिए समिति के क्षेत्र में दौरों का हिंदी एवं गुजराती भाषा में नीचे-प्रभावित पंचायतों तक व्यापक प्रचार किया जाए और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से परामर्श किया जाए, जो कि जनजातियों से जुड़े किसी भी नीतिगत विषय पर संविधान के अनुच्छेद 338।

के अंतर्गत अनिवार्य है। पत्र में बताया गया कि 5-7 दिनों के दौरे से व्यापक एवं सार्थक परामर्श संभव नहीं है, समिति को अपना कार्यकाल बढ़ाने हेतु उच्चतम न्यायालय से प्रार्थना करनी चाहिए।पत्र में यह भी मांग की गई कि सुझावों का प्रारूप सरल हो, हिंदी, गुजराती एवं अंग्रेजी इनमें से किसी में भी सुझाव स्वीकार किया जाए और केवल वेबसाइट पर नहीं बल्कि लिखित में - डाक से भी प्राप्त करने और भेजनेे का प्रावधान किया जाए।

जिससे कम पढ़ा-लिखा या सामान्य व्यक्ति अपना सुझाव-आपत्ति दर्ज करा सके।जानकारी देते हुए प्रदेश महामंत्री वीरेन्द्र प्रकाश पंचोली ने बताया कि बैैठक में सभी विशेषज्ञों ने मांग को सरकार के पास उच्च स्तर पर भेजने के लिए प्रस्ताव पारित किया है।

वनवासी कल्याण परिषद यह स्पष्ट रूप से मांग करता आया है कि अरावली के विकास की कार्य योजना बिना जनजाति समाज से चर्चा किये बिना नहीं बन सकती जनजाति समाज सदियों से अरावली पर्वत के संरक्षण हितार्थ प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से कार्यरत रहा है।

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