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पेसिफिक पॉलिटेक्निक कॉलेज में ‘रैपिड यूआई/यूएक्स प्रोटोटाइपिंग विद गूगल स्टिच’ पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित

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10 Aug 26
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पेसिफिक पॉलिटेक्निक कॉलेज में ‘रैपिड यूआई/यूएक्स प्रोटोटाइपिंग विद गूगल स्टिच’ पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित


उदयपुर। पेसिफिक पॉलिटेक्निक कॉलेज, उदयपुर में विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित आधुनिक वेबसाइट एवं मोबाइल एप्लिकेशन डिज़ाइनिंग तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से “रैपिड यूआई/यूएक्स प्रोटोटाइपिंग विद गूगल स्टिच” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

महाविद्यालय के निदेशक डॉ. मुकेश श्रीमाली ने बताया कि कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक राजीव शर्मा थे। उन्होंने विद्यार्थियों को गूगल स्टिच जैसे नवीन एआई टूल की सहायता से बिना किसी कोडिंग के व्यावसायिक स्तर की वेबसाइट एवं मोबाइल एप्लिकेशन के यूआई/यूएक्स डिज़ाइन तैयार करने की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

राजीव शर्मा ने बताया कि गूगल स्टिच एक ऐसा एआई टूल है जो उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए प्रॉम्प्ट के आधार पर यूज़र इंटरफेस, प्रोटोटाइप तथा फ्रंटएंड कोड तैयार करने में सक्षम है। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने प्रभावी प्रॉम्प्ट लिखने की तकनीक सीखी, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप आकर्षक, उपयोगकर्ता-अनुकूल एवं आधुनिक इंटरफेस तैयार कर सके।

प्रशिक्षण में वेबसाइट एवं मोबाइल एप्लिकेशन के लिए विभिन्न प्रकार के यूआई लेआउट, स्क्रीन फ्लो, रंग संयोजन, कंपोनेंट डिज़ाइन तथा बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव विकसित करने के व्यावहारिक तरीकों को विस्तार से समझाया गया। प्रशिक्षक ने एआई आधारित डिज़ाइन टूल्स के माध्यम से कुछ ही मिनटों में प्रारंभिक डिज़ाइन तैयार करने, फ्रंटएंड कोड जनरेट करने, डिज़ाइन एक्सपोर्ट करने तथा डेवलपमेंट टीम को हस्तांतरित करने की संपूर्ण प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन भी किया।

समापन सत्र में डॉ. मुकेश श्रीमाली ने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक शिक्षा, उद्योग, सॉफ्टवेयर विकास और डिज़ाइनिंग के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन ला रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रत्येक तकनीकी विद्यार्थी के लिए एआई आधारित उपकरणों का ज्ञान अत्यंत आवश्यक होगा। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को उद्योग की नवीनतम आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाते हैं तथा उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने इस प्रकार के उद्योगोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे तकनीकी प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित करने की अपेक्षा व्यक्त की।

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