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शिक्षा सुधार के लिए लघु फिल्म प्रतियोगिता का आयोजन, ₹1 लाख तक के नकद पुरस्कार

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05 Aug 26
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जयपुर। जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (JIFF) ने राष्ट्रीय शिक्षा पहल के अंतर्गत द्वितीय संस्करण के द्वितीय चरण "2–7 मिनट मूवी मेकिंग प्रतियोगिता 2026" की घोषणा की है। प्रतियोगिता का विषय "भारत में शिक्षा – चुनौतियाँ एवं समाधान" रखा गया है, जिसका संदेश है "मेरी शिक्षा, मेरा भविष्य – जनता और सरकार साथ-साथ"। इसका उद्देश्य शिक्षा से जुड़े वास्तविक मुद्दों, नवाचारों, सफल प्रयोगों तथा व्यावहारिक समाधानों को सिनेमा के माध्यम से सामने लाना है।

यह प्रतियोगिता स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों, सरकारी विभागों, गैर-सरकारी संगठनों तथा आम नागरिकों के लिए खुली है। प्रतिभागी 2 से 7 मिनट की फिक्शन, डॉक्यूमेंट्री, एनीमेशन, एक्सपेरिमेंटल या मोबाइल फिल्म बनाकर भाग ले सकते हैं। फिल्में भारत की शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों, नई शिक्षा नीति, कौशल विकास, समावेशी शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शिक्षा, समाज और सरकार की भागीदारी तथा भविष्य की शिक्षा व्यवस्था जैसे विषयों पर आधारित हो सकती हैं।

प्रतियोगिता में 2 से 10 सदस्यों की टीम भाग ले सकती है तथा आयु की कोई सीमा नहीं है। फिल्में किसी भी भारतीय या अंतरराष्ट्रीय भाषा में भेजी जा सकती हैं। फिल्म जमा करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2026 तथा परिणामों की घोषणा 10 जनवरी 2027 को की जाएगी। प्रति फिल्म ₹1,500 का पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है।

प्रतियोगिता में ₹1,00,000 तक के नकद पुरस्कार, विजेता प्रमाण-पत्र, विशेष ज्यूरी अवार्ड, ऑडियंस चॉइस अवार्ड तथा आधिकारिक चयन प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। चयनित फिल्मों का प्रदर्शन 8 से 12 जनवरी 2027 तक आयोजित होने वाले जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (JIFF 2027) के दौरान किया जाएगा। प्रतिभागियों को फिल्मकारों, शिक्षाविदों एवं उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद और नेटवर्किंग का अवसर भी मिलेगा।

जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (JIFF) के संस्थापक एवं निदेशक श्री हनु रोज़ ने कहा, "भारत के युवाओं के पास शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के अनेक नए विचार हैं। यह प्रतियोगिता उन्हें अपनी रचनात्मक सोच को फिल्म के माध्यम से देश के सामने रखने का अवसर देगी। हमारा उद्देश्य सरकार, समाज और युवाओं के बीच सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देना तथा शिक्षा को अधिक समावेशी, नवाचारी और भविष्य के अनुरूप बनाने में सार्थक योगदान देना है।"

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