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GMCH :हेलमेट डे पर नुक्कड़ नाटक और राहवीरों के सम्मान से दिया सड़क सुरक्षा का संदेश

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23 Jul 26
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GMCH :हेलमेट डे पर नुक्कड़ नाटक और राहवीरों के सम्मान से दिया सड़क सुरक्षा का संदेश

उदयपुर। हेलमेट डे के अवसर पर उदयपुर में सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर हेलमेट पहनने, यातायात नियमों का पालन करने, नशे की हालत में वाहन नहीं चलाने तथा ओवरलोडिंग से बचने का संदेश दिया। साथ ही सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की जान बचाने वाले 'राहवीरों' को सम्मानित कर उनके साहस और मानवता की भावना का सम्मान किया गया।

गुरु नानक पब्लिक स्कूल सहित विभिन्न विद्यालयों के 700 plus  एनसीसी कैडेट्स ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक में दिखाया गया कि तेज रफ्तार, हेलमेट नहीं पहनना, परीक्षा या पार्टी के लिए जल्दबाजी करना, नशे की हालत में वाहन चलाना, वाहन चलाते समय रील बनाना तथा ओवरलोडिंग जैसी लापरवाहियां किस प्रकार गंभीर सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। विद्यार्थियों ने संदेश दिया कि "सड़क सुरक्षा, सबकी रक्षा" केवल एक नारा नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों की सहायता कर उनकी जान बचाने वाले कई राहवीरों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इनमें कन्हैयालाल खटीक, धर्मेंद्र कुमार सोलंकी, कालू सिंह, ललित स्वामी, मोनिका, भगवती मिनारिया, डॉ. शशि शर्मा, रणवीर सिंह राणावत, रमेश आचार्य, पुष्कर आचार्य, संजय टेलर, लक्ष्मण लोहार, मोहसीना, बाबूलाल सहित अन्य समाजसेवी शामिल रहे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1.5 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग दुर्घटना के बाद घायल की मदद करने के बजाय वीडियो बनाने लगते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले 'गुड समेरिटन' (राहवीर) को अनावश्यक पुलिस कार्रवाई या पूछताछ का सामना नहीं करना पड़ता। ऐसे लोगों को आगे आकर घायलों की सहायता करनी चाहिए, क्योंकि समय पर मिली मदद किसी की जान बचा सकती है।

वक्ताओं ने कहा कि सड़क सुरक्षा की आदत बचपन से विकसित करना सबसे प्रभावी तरीका है। इसी उद्देश्य से पिछले कई वर्षों से विद्यालयों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि बच्चे स्वयं यातायात नियमों का पालन करें और अपने परिवार व समाज को भी इसके लिए प्रेरित करें।

गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के हेड ऑफ मार्केटिंग कल्पेश चंद ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। उन्होंने लोगों से दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट तथा चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक सड़क दुर्घटना केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करती है। इसलिए सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन प्रत्येक नागरिक की आदत बनना चाहिए।

कार्यक्रम में परिवहन विभाग, गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, विभिन्न निजी विद्यालयों के विद्यार्थी, शिक्षक, समाजसेवी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। आयोजन का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना, लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए समाज को प्रेरित करना रहा।

यदि यह प्रेस विज्ञप्ति स्थानीय समाचार पत्रों के लिए है, तो इसे और अधिक पत्रकारिता शैली (लीड, कोट्स और छोटे पैराग्राफ) में भी तैयार किया जा सकता है।


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