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सावन के सुरों से सजेगी शिल्पग्राम की सांझ ‘मल्हार’ में शास्त्रीय गायन, तबला, सितार और मोहिनीअट्टम की प्रस्तुतियां

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05 Aug 26
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सावन के सुरों से सजेगी शिल्पग्राम की सांझ  ‘मल्हार’ में शास्त्रीय गायन, तबला, सितार और मोहिनीअट्टम की प्रस्तुतियां

उदयपुर। सावन केवल बादलों, बूंदों और हरियाली का मौसम नहीं, बल्कि मन के भीतर गूंजते अनगिनत रागों का उत्सव भी है। इसी सुरमयी ऋतु में शिल्पग्राम का दर्पण सभागार 8 और 9 अगस्त को भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की मोहक छवियों से जीवंत होगा। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से आयोजित दो दिवसीय उत्सव ‘मल्हार’ में स्वर, ताल, तंत्र और नृत्य का अनुपम संगम देखने को मिलेगा।

पहली सांझ 8 अगस्त को शाम 7 बजे शास्त्रीय गायिका गौरी पाठारे के स्वरों से खुलेगी। उनके गायन में रागों की गंभीरता, भावों की कोमलता और साधना की गहराई श्रोताओं को एक आत्मीय संगीत-यात्रा पर ले जाएगी। इसके बाद प्रसिद्ध तबला वादक हेतल मेहता अपनी अंगुलियों की सधी हुई थाप से लय का ऐसा संसार रचेंगे, जिसमें कभी बूंदों की रुनझुन सुनाई देगी तो कभी उमड़ते बादलों की गर्जना का आभास होगा।

दूसरी संध्या 9 अगस्त को सितार की मधुर झंकार से महकेगी। सितार वादक विनायक चित्तर रागों की भावपूर्ण छटा बिखेरते हुए तारों पर सावन की संवेदनाओं को स्वर देंगे। सितार से उठती धुनें कभी शांत बहती नदी-सी लगेंगी, तो कभी वर्षा में झूमती डालियों-सी चंचल।

संध्या का समापन सुप्रसिद्ध नृत्यांगना पल्लवी कृष्णन की मोहिनीअट्टम प्रस्तुति से होगा। उनकी कोमल पदचाप, लयपूर्ण देहभाषा, भावमयी दृष्टि और सुगढ़ मुद्राएं दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा की सौंदर्यपूर्ण अनुभूति कराएंगी।

केंद्र के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी के अनुसार दोनों दिन प्रस्तुतियां शाम 7 बजे दर्पण सभागार में प्रारंभ होंगी। दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रहेगा। सावन की फुहारों के बीच आयोजित ‘मल्हार’ कला प्रेमियों के लिए ऐसी सांस्कृतिक संध्या बनेगी, जहां बाहर बादल बरसेंगे और सभागार के भीतर सुर, ताल और भाव।

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