कोटा। कोटा शहर के रेलवे कॉलोनी थाना क्षेत्र स्थित भदाना रोड–रंगपुर रोड पर मीणा छात्रावास के सामने सरकारी भूमि पर कथित रूप से अतिक्रमण कर बनाई गई लोहे की दुकान में शराब का ठेका आवंटित किए जाने का मामला सामने आया है।
जबकि नियमों के तहत सरकारी भूमि पर कब्जा कर दुकान और बॉडी पर लाइसेंस से जारी नहीं हो सकता।आरोप है कि आबकारी विभाग ने नियमों की अनदेखी करते हुए इस दुकान को शराब बिक्री का लाइसेंस जारी कर दिया, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि इस दुकान को गोर से देखने पर तो ऐसा लगता है कि शराब का ठेका पूरी तरह अवैध है क्योंकि इस शराब की दुकान पर शराब दुकान मालिक के नाम का कोई भी बोर्ड अंकित नहीं है जबकि नियमों की बात करे तो शराब की दुकान पर शराब लाइसेंस का नम्बर और लाइसेंसी का नाम का बोर्ड होना जरूरी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस दुकान में शराब का ठेका संचालित हो रहा है, वह सरकारी जमीन पर कब्जा कर लोहे की बॉडी में शराब की दुकान संचालित हो रही है। है। आरोप यह भी है कि दुकान के पास स्थित एक मकान में खुलेआम शराब पिलाई जाती है और देर रात तक अवैध गतिविधियां चलती रहती हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है।
गौरतलब है कि हाल ही में नगर निगम कोटा ने सकतपुरा क्षेत्र में बिना भू-रूपांतरण (लैंड यूज चेंज) एक आवासीय मकान में संचालित शराब की दुकान को सीज किया था। नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा के निर्देश पर उपायुक्त दयावती सैनी और राजस्व अधिकारी महावीर सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए स्पष्ट किया गया था कि आवासीय भूखंडों का व्यावसायिक उपयोग नियमों के विरुद्ध है और उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि नगर निगम नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई कर सकता है, तो सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण कर बनी दुकान में शराब का ठेका किस आधार पर आवंटित किया गया? मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।