उदयपुर। सुरों की मंडली संस्था, उदयपुर की ओर से रविवार को मधुश्री बैंक्वेट हॉल, अशोका पैलेस में कुमार सानू के सदाबहार गीतों पर आधारित विशेष संगीतमय कार्यक्रम “कुमार सानू स्पेशल – 90 के दशक का जादू, आज भी दिलों में” उत्साह और उल्लास के साथ आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमियों ने भाग लिया और कुमार सानू के लोकप्रिय गीतों के माध्यम से 90 के दशक की सुरीली यादों को फिर से जीवंत किया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. श्रद्धा गट्टानी रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथियों के रूप में सूर्य प्रकाश सुहालका, विपुल जैन, चिरायु जोशी, राज अग्रवाल एवं गजेंद्र जैन उपस्थित रहे।

संस्था की ओर से डॉ. श्रद्धा गट्टानी सहित सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।सुरों की मंडली संस्था के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि कुमार सानू की आवाज़ ने हिंदी फिल्म संगीत को एक अलग पहचान दी है।

उनके रोमांटिक और सदाबहार गीत आज भी हर पीढ़ी के संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं। इसी संगीत विरासत को सहेजने और संगीत प्रेमियों को एक यादगार मंच प्रदान करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

उन्होंने कहा कि संगीत लोगों को जोड़ने और आपसी प्रेम एवं सद्भाव बढ़ाने का सशक्त माध्यम है।

सुरों की मंडली निरंतर ऐसे आयोजनों के माध्यम से संगीत प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने और संगीत के प्रति लोगों के जुड़ाव को मजबूत करने का प्रयास कर रही है।आयोजनकर्ता योगेश कुमार उपाध्याय एवं नीलम पटवा ने बताया कि कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने कुमार सानू के लोकप्रिय रोमांटिक गीतों सहित अनेक सदाबहार गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं।

50 प्रतिभागियों ने अपनी गायकी के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। पूरे आयोजन के दौरान संगीतमय माहौल बना रहा और उपस्थित संगीत प्रेमियों ने गीतों का भरपूर आनंद लिया।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संस्था की टीम ने व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रूप से संभाला और सभी प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया।कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि डॉ. श्रद्धा गट्टानी एवं आयोजनकर्ता योगेश कुमार उपाध्याय के जन्मदिन के उपलक्ष्य में केक काटा गया।

उपस्थित अतिथियों, संस्था के सदस्यों एवं संगीत प्रेमियों ने दोनों को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर खुशियों और संगीत का सुंदर संगम देखने को मिला।कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने सुरों की मंडली संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संगीतमय आयोजन शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों को समृद्ध करते हैं और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर देते हैं।

आयोजन के अंत में संस्था की ओर से सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं उपस्थित संगीत प्रेमियों का आभार व्यक्त किया गया।इन संगीत प्रेमियों ने दी शानदार प्रस्तुतियांइस अवसर पर विजय राजपूत ने धीरे धीरे से मेरी ज़िंदगी में, राजकुमार बापना ने सोचेंगे तुम्हें प्यार, कैलाश माली ने तू मेरी ज़िंदगी है, कमल जुनेजा ने मैं दुनिया भुला दूँगा, हुसैन बंदूकवाला ने तू प्यार है किसी और का, नूतन वेदी ने जब कोई बात बिगड़ जाए, नीलम पटवा ने घूँघट की आड़ से, दिव्या सारस्वत ने तुझे ना देखूँ तो चैन, निखिल माहेश्वरी ने तुम सामने बैठो, योगेश उपाध्याय ने दो बातें हो सकती हैं, कमलेश कुमावत ने उतरा ना दिल में कोई, संदीप बंसल ने इस तरह आशिकी का, शर्मिला माली ने नज़र के सामने, क्षितिज कुमार ने साँसों की ज़रूरत है जैसे, नीलम कौशल ने दिल दिल परदेसी हो गया, प्रकाश परसाई ने तू मेरी है प्रेम की भाषा, स्वप्नालिका अजमेरा ने दिल का रिश्ता बड़ा ही, कैलाश केवलिया ने अब तेरे बिन गीत की प्रस्तुति दी।इसी प्रकार मधु केवलिया ने एक दिन आप यूँ हमको, गौरव स्वर्णकार ने जीता था जिसके लिए, पुष्कर नायक ने ठहरे हुए पानी में, माला चटवानी ने दिल का आलम, रमेश दतवानी ने जिए तो जिए कैसे, अरुण चौबीसा ने मेरा दिल भी कितना पागल, विष्णु वैष्णव ने तेरी उम्मीद तेरा इंतज़ार, विश्वा पांड्या ने कितना हसीन चेहरा, महावीर प्रसाद जैन ने एक लड़की को देखा तो, मधु शर्मा ने जब से मिले नैना, गोपाल गोठवाल ने चाँद से पर्दा कीजिए, गीता राठौड़ ने धीरे धीरे प्यार को, वीनू वैष्णव ने दिल है कि मानता नहीं, लक्ष्मी असवानी ने राहों में उनसे मुलाकात, जय किशन असवानी ने मेरा दिल तेरे लिए, किरण सालवी ने पायलिया ओ हो हो की प्रस्तुति दी।इसी प्रकार, अशोक सालवी ने जाने जिगर जाने मन, भावना जैन ने तुमसे अपना बनाने की कसम, पूजा भाटिया ने तुम मिले दिल खिले, गिरीश तलदार ने ऐ काश के हम, सूर्या वैष्णव ने आँख है भरी भरी, मोहन सोनी ने तुम्हारी नज़रों में हमने, मनोहर लाल मुखिया ने जादू तेरी नज़र, क्षितिज सिंह राठौड़ ने कुछ ना कहो, मधुबाला ने ये दुआ है मेरी रब से, प्रवीण जैन ने जाना ना जाना, नारायण लाल लोहार ने मेरा चाँद मुझे, पवन कुमार शर्मा ने कितना सुकून कितना, सूर्या पी. श्रीमाली ने तुझे देखा तो ये जाना, अजय राठौड़ ने दिल जिगर नज़र क्या है, सरिता कंवर राव ने बताना भी नहीं आता, हेमंत कुमार चौबीसा ने मेरी महबूबा और रामेश्वर पानेरी ने हम उनसे मोहब्बत गीत की प्रस्तुति दी।