बांसवाड़ा | ऐतिहासिक सिद्ध तपोभूमि लालीवाव मठ के पूर्व पीठाधीश्वर श्रीमहंत 1008 श्री नारायणदास जी महाराज की 23 वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में लालीवाव मठ में दो दिवसीय कार्यक्रमों के अन्तर्गत आयोजित महारूद्राभिषेक अनुष्ठान सोमवार रात सम्पन्न हुआ। इसमें प्रदोष मण्डल की ओर से पण्डितों के समूह ने रूद्राभिषेक किया।
महारूद्राभिषेक की शुरूआत लालीवाव पीठाधीश्वर श्रीमहंत हरिओमदासजी महाराज ने गणपति सहित विभिन्न देवताओं के आवाहन, षोड़शोपचार से पूजन-अर्चन एवं रूद्र महापूजा से की। इसके उपरान्त लालीवाव के शिष्यों एवं भक्तों की उपस्थिति में प्रदोष मण्डल के 50 से अधिक पण्डितों ने पं. भावेश पण्ड्या के आचार्यत्व में विधि-विधान से रूद्राभिषेक किया। रूद्रार्चन एवं षोड़शोपचार से शिव महापूजा लालीवाव के भक्त प्रवीण गुप्ता ‘मुन्ना’ एवं परिवार ने की।
महारूद्रार्चन की पूर्णता के उपरान्त लालीवाव पीठाधीश्वर श्रीमहंत हरिओमदास जी महाराज ने शिव आरती एवं पुष्पान्जलि विधान पूर्ण किया। शिवभक्तों के समूहों ने शिव भजनों की धूम मचा दी।
तीन विद्वान कर्मकाण्डी सम्मानित
इस अवसर पर लालीवाव मठ की ओर से 3 विद्वान कर्मकाण्डी पण्डितों को कर्मकाण्ड एवं पौरोहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य एवं उत्कृष्ट सेवाओं के लिए वार्षिक सम्मान प्रदान किया गया। लालीवाव पीठाधीश्वर श्रीमहंत हरिओमदास जी महाराज ने पं. अवधबिहारी भट्ट, पं. विनय भट्ट एवं पं. भावेश पण्ड्या को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया एवं उनकी सेवाओं की सराहना की।
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