*श्री पीताम्बरा आश्रम में संतों की संगोष्ठी,*
*संत-महंतों ने धर्म जागरण के लिए समर्पित प्रयासों का लिया संकल्प,*
*हिन्दू सम्मेलनों को आशातीत सफल बनाने पूरी-पूरी भागीदारी का किया आह्वान*
बांसवाड़ा /राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अन्तर्गत आगामी दिनों में हर क्षेत्र में आयोजित होने वाले हिन्दू सम्मेलनों को आशातीत सफल बनाने और व्यापक महाजागरण के लिए हर स्तर पर तैयारियां जोरों पर हैं। जिले में आगामी 18 जनवरी से हिन्दू सम्मेलनों के आयोजन का दौर आरंभ होगा। यह 7 फरवरी तक चलेगा।
इन हिन्दू सम्मेलनों को प्रभावी स्वरूप प्रदान करने में धूंणी धामों, आश्रमों, मठों, जनजाति तीर्थों के संत-महंतों की ओर से पूरी-पूरी सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
इन सम्मेलनों को लेकर संतों की संगोष्ठी एवं कार्यशाला मंगलवार को बांसवाड़ा शहर के वनेश्वर महादेव क्षेत्र स्थित श्री पीताम्बरा आश्रम में हुई। इसमें जिले के विभिन्न धूंणी, धामों, मठों और आश्रमों आदि से उपस्थित संतों ने हिस्सा लिया।
सभी संतों ने हिन्दू सम्मेलनों को हिन्दू जागरण का महाभियान बनाने के लिए पूरी-पूरी भागीदारी निभाते हुए सामाजिक चेतना एवं नवजागरण का संकल्प लिया और सभी सनातनियों से इन सम्मेलनांं में अधिक से अधिक संख्या में हिस्सा लेकर धर्मजागरण एवं धर्म रक्षार्थ सहभागी बनने का आह्वान किया।
*समर्पित सहभागिता में संतगण आगे*
इस अवसर पर बड़ा रामद्वारा के संत श्री रामप्रकाश रामस्नेही जी महाराज ने अपने उद्बोधन में हिन्दू सम्मेलनों को महा जागरण का अभियान बताते हुए कहा कि राष्ट्र जागरण के इस महानुष्ठान में सभी को समर्पित सहभागिता निभाने आगे आने की आवश्यकता है। इसमें संत-महात्मा सदैव आगे रहेंगे।
*योजनाबद्ध संचालन*
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक श्री विकास राज ने सम्मेलन की तैयारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और कहा कि इन सम्मेलनों के माध्यम से जागरुकता, संगठन एवं सामाजिक समरसता को और अधिक सुदृढ़ स्वरूप प्रदान करने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए योजनाबद्ध रूप से प्रत्येक गतिविधि का संचालन होगा।
*धर्म के मूल तत्वों से परिचित कराएं*
सामाजिक आध्यात्मिक चिन्तक सुश्री ईशिका जी ने सम सामयिक चुनौतियों का सशक्त मुकाबला करते हुए सत्य सनातन परम्पराओं और मूल्यों के संरक्षण के साथ मिलजुलकर आगे आने की आवश्यकता जताई और कहा कि धर्म की ख़ासियतों और मूल मर्म से सभी को ख़ासकर नई पीढ़ी को परिचित कराने की आवश्यकता है। इसके लिए पुरातन ग्रंथों और परम्पराओं का ज्ञान संवहित किया जाना चाहिए।
संगोष्ठी में उपस्थित संतों ने हिन्दू सम्मेलनों से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा व मंथन कर इनमें संतों की प्रखर भूमिका के विस्तार पर जोर दिया और कहा कि अब चुपचाप बैठे रहने का समय नहीं है। राष्ट्रीय अस्मिता और सामाजिक ताने-बाने पर मण्डराते जा रहे खतरों से निपटने पूर्ण मनोयोग से आगे आना होगा।
*धर्मजागरण से राष्ट्र जागरण*
इस दौरान् नरसिंगगिरि जी महाराज(कुशलगढ़), संत रामगिरिजी महाराज(घोटिया आम्बा), मदनगिरि जी महाराज (गड़ा), थावरगिरि जी महाराज (आम्बाझेर), शंकरगिरि जी महाराज(बोरखाबर), हरजीगिरि जी महाराज(गांगड़तलाई), अर्जुन महाराज(झेरपाड़ा), बालमुकुन्दजी महाराज(बांसला) और रामगिरि जी महाराज(टीमुरवा) ने ग्रामीण अंचलों में धर्मजागरण के लिए विशेष प्रयासों की आवश्यकता जताई।
*समर्पित प्रयासों पर चिन्तन*
संगोष्ठी में चिन्तक लालशंकर जी पारगी प्रकाश महाराज (झेरपाड़ा करजी), फूलगिरि जी महाराज (भीलवन), सतीश गिरिजी महाराज(उमराई), बापूदास जी महाराज(लखेरिया), लीलारामजी महाराज(देलवाड़ा), बालुदासजी महाराज एवं प्रेमगिरि जी महाराज(अमरथुन), आशापूर्ण महाराज(बारी सियातलाई), रावलजी महाराज (रामोर वडली) ने सभी तीर्थों, धामों, आश्रमों में धर्मजागरण की विशेष गतिविधियों के संचालन और लोक जागरण के सभी संभव उपायों को अपनाने का आह्वान किया। संगोष्ठी में संतों द्वारा वागड़ी में जागरण गीत प्रस्तुत किए गए।
*विस्तृत योजना प्रस्तुत*
धर्म जागरण प्रमुख कान्तिलाल व्यास ने सम्मेलनों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संत-महात्माओं, मठाधीशों और महंतों आदि की भागीदारी पर चर्चा की और इनसे संबंधित योजना पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिलाप्रचारक गोविन्दसिंह सहित धर्म जागरण क्षेत्र के विद्वान विषय विशेषज्ञों ने विचार व्यक्त किए।
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