वक्ताओं ने कहा - हर युग में संत परम्परा ने दी लोकमंगलकारी दिशा-दृष्टि
बाँसवाड़ा /सनातन धर्म और परम्परागत शाश्वत साँस्कृतिक मूल्यों एवं आदर्शों के माध्यम से समाज को नई दिशा और कल्याणकारी दृष्टि प्रदान करने में क्रान्तिचेता संत-महात्माओं की दिव्य और विलक्षण प्रभावोत्पादक श्रृंखला युगों से अहम् रही है। इसी से समय-समय पर युगीन आवश्यकताओं के अनुरूप सामाजिक महापरिवर्तन संभव हो पाया है।
यह विचार गायत्री मण्डल बांसवाड़ा की ओर से श्री पीताम्बरा आश्रम में आयोजित धर्म-अध्यात्म चेतना विषयक संत समागम उत्सव में व्यक्त किए गए।
कृतज्ञ समाज सदैव ऋणी रहेगा
बड़ा रामद्वारा के संत श्री रामप्रकाश रामस्नेही जी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित इस उत्सव में वक्ताओं ने जनजाति क्षेत्रों में संत-महंतों और महात्माओं की प्राचीन परम्परा और मंगलकारी सामाजिक बदलाव के विभिन्न पहलुओं पर उद्धरणों एवं उदाहरणों सहित जानकारी दी और कहा कि समूचा क्षेत्र एवं सनातन धर्मावलम्बी इसके लिए संत परम्परा के सदैव ऋणी और कृतज्ञ रहेंगे।
निष्काम सेवाओं का सम्मान
इस अवसर पर गायत्री मण्डल की ओर से जनजाति क्षेत्रों की धूंणियों, धामों, आश्रमों और मठों आदि के माध्यम से दशकों से धर्म जागरण एवं आध्यात्मिक चेतना, समाज सुधार व विकास तथा सर्वमंगल गतिविधियों में समर्पित संत-महंतों और विशिष्ट व्यक्तित्वों का सम्मान-अभिनन्दन किया गया।
इनका अभिनन्दन
इनमें नरसिंगगिरि जी महाराज(कुशलगढ़), संत रामगिरिजी महाराज(घोटिया आम्बा), मदनगिरि जी महाराज (गड़ा), थावरगिरि जी महाराज (आम्बाझेर), शंकरगिरि जी महाराज(बोरखाबर), हरजीगिरि जी महाराज(गांगड़तलाई), अर्जुन महाराज(झेरपाड़ा), बालमुकुन्दजी महाराज(बांसला) और रामगिरि जी महाराज(टीमुरवा), चिन्तक लालशंकर जी पारगी प्रकाश महाराज (झेरपाड़ा करजी), फूलगिरि जी महाराज (भीलवन), सतीश गिरिजी महाराज (उमराई), बापूदास जी महाराज (लखेरिया), लीलारामजी महाराज(देलवाड़ा), बालुदासजी महाराज एवं प्रेमगिरि जी महाराज(अमरथुन), आशापूर्ण महाराज(बारी सियातलाई), रावलजी महाराज (रामोर वडली), सामाजिक आध्यात्मिक चिन्तक एवं कथावाचक सुश्री ईशिका जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक श्री विकास राज एवं जिला प्रचारक श्री गोविन्दसिंह तथा सामाजिक चिन्तक श्री कान्तिलाल व्यास प्रमुख हैं।
स्वस्ति ऋचाओं के साथ सम्मान-अभिनन्दन
गायत्री मण्डल की ओर से सचिव विनोद शुक्ल, सह सचिव सुभाष भट्ट, कार्यकारिणी सदस्य कमलकान्त भट्ट, चन्द्रेश व्यास, पं. प्रदीप भट्ट, हिरेन उपाध्याय, विनोद चौबीसा, ललित आचार्य, अनिल पण्ड्या, दिलीप पण्ड्या, पं. जय रणा, अंकित आचार्य आदि ने वैदिक ऋचाओं और स्वस्तिमंत्रों से अतिथियों एवं संत-महंतों का उपरणा पहनाकर अभिनन्दन किया।
सामाजिक चेतना व संगठन का आह्वान
संत-महंतों ने पुरातन परम्पराओं, धार्मिक आस्थाओं, नैतिक मूल्यों और जीवन तथा जगत के कल्याण से जुड़े समस्त निष्काम कार्यों में आगे आने तथा संगठित रहकर सनातन परिवेश को सशक्त करने का आह्वान किया। संचालन पं. प्रदीप भट्ट ने किया।
आश्रम का अवलोकन, दैवीय कार्यों की सराहना
सभी संत-महन्तों एवं महात्माओं ने श्री पीताम्बरा आश्रम में दैव दर्शन के उपरान्त परिसरों का अवलोकन किया और गतिविधियों की जानकारी ली। सभी ने गायत्री मण्डल द्वारा सनातन परम्पराओं के संरक्षण-संवर्धन एवं अनुपालन के लिए किए जा रहे बहुआयामी प्रयासों की सराहना की और आश्रम की गतिविधियों में समय-समय पर उपस्थित होकर सहभागिता निभाने का संकल्प लिया।
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