बांसवाड़ा। श्री उजास परिवार, ठीकरिया द्वारा संयोजित विराट वागड़ी कवि सम्मेलन में कवियों की वागड़ी गीत, गज़लों, कविताओं और मुक्तकों पर श्रोता झूम उठे। हनुमत् आराधन और राष्ट्र चिन्तन की रचनाओं पर तालियों से समूचा पाण्डाल गूंज उठा।
इन्दौर से आएं राष्ट्रीय कवि मुकेश मोलवा ने अपने ओजस्वी काव्य पाठ के दौरान जब बोरवट बजरंगबली स्थानक की ऐतिहासिकता पर केन्द्रित अपनी रचना ‘बोरवट बजरंग से गोपीनाथ ने शक्ति पाई...’ प्रस्तुत की तो समूचे पाण्डाल में उपस्थित श्रोताओं ने बड़ी देर तक तालियां बजाई। संचालन विपुल विद्रोही ने किया।
पिछले ढाई दशक से आँचलिक ही नहीं राष्ट्रीय कवि सम्मेलन मंचों पर भी मातृभाषा वागड़ी की गजल गंगा बहाने को प्रयासरत रहे प्रयोगधर्मा भागीरथ और जीजीटीयु कुलगीत रचयिता कवि हरीश आचार्य ने वागड़ी भीनी बरसात की खुशबू बिखेरते हुए गुनगुनाया ‘कुण कई आड़ी रमी जाय, काँय कही नती शकता... कैने कइयु गमी जाय, काँय कही नती शकता...’ आम आदमी की आपबीती बयाँ करते हुए गाया ‘अमैं लुटाई ग्या भूल अमारी थई गई, दरवाजो बंद करयो खड़की उगाड़ी रही गई...’ अवसरवादियों को उलाहना भी मजेदार रहा ‘कैवा कैवा वायदा करी ग्या तमैं, आवते आवते कई आड़ी वरी ग्या तमैं...’ रोमांटिक गजल का यह शेर तो बड़ी देर तक तालियों की ध्वनि के साथ गुँजायमान रहा ’अमैं हमजँ हेड़ा नी मर्यादा, पारकु खेतर अमैं हॉकता नती...’।
कवि सम्मेलन शुभारंभ से समापन तक सक्रिय भूमिका निर्वहन करते रहे जिला परिषद बाँसवाड़ा के उपजिला प्रमुख डॉ. विकास बामनिया ने बतौर मुख्य अतिथि मातृभाषा कवि सम्मेलन आयोजन मंडल प्रतिनिधियों और मातृभाषा प्रेमी रचनाकारों को साधुवाद अर्पित करते हुए कहा कि सत्य, तथ्य और सकारात्मक मानवीयता की सुदृढ़ नींव पर निर्मित सनातन धर्म शाश्वत था, है और युगों युगों तक रहेगा।
शास्त्रीय गायक व प्रधानाचार्य वीरेन्द्र सिंह राव ने रागबद्ध रचनाओं से कवि सम्मेलन का श्रीगणेश किया इसके उपरान्त सारिका भुवन त्रिवेदी ने ‘एवू तपे के मारा रंगरसिया काय काम ने हुंजे...बेटी बेटी घोरवारी करिए चुसे... भंवर गर्ग मधुकर ने ‘अमे सला ग्या ने तमे वायं हूं केय्यू। सब ख़बर है पण अमे कायं नी केय्यू...’ दिनेश पंछी गोवाड़ी ने ‘ऐ! घण दाड़ पुटे अव्या रे पामणा...’, महेश देव नन्दौड़ ने ‘मनख तारी काया ने हम्बार माटी गरी जावा नी है...सालता रेजु रे आम ने आम सालता रेजु... प्रस्तुत की। संचालन विपुल विद्रोही ने किया। आभार आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व सरपंच अर्जुन सिंह सोलंकी ने माना।
कवि सम्मेलन में आयोजन समिति के जगदीश बुनकर, लाला पटेल, दीपक बंजारा, हिरजी बुनकर, जयन्ती बुनकर, अलका यादव, विजय सिंह पटेल, तथा जिले के विभिन्न गांवों से भी श्रोतागण उपस्थित रहे, जिसमें जयगिरीराज सिंह चैहान, नवीन त्रिवेदी, रवि व्यास, कोदरा भगत, हिरालाल पंचाल आदि ने अपनी सक्रिय उपस्थिति से कार्यक्रम को सफल बनाया।
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