बांसवाड़ा । राजस्थान के शिक्षा विभाग से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने राज्य में हाल ही में की गई उप प्रधानाचार्य (वाइस प्रिंसिपल) की विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) को निरस्त करने की कवायद शुरू कर दी है।
इधर एक साल से अधिक प्रधानाचार्य, उप प्रधानाचार्य को पदस्थापन नहीं करने पर जिला मुख्यालय सर्किट हाउस एवं कुशलगढ़ में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर विरोध जताया।
उल्लेखनीय हैं कि माननीय उच्च न्यायालय, जोधपुर में चल रहे वरिष्ठता विवाद को लेकर आने वाले संभावित फैसले के मद्देनजर विभाग ने यह कदम उठाने की तैयारी की है।
*हाईकोर्ट के फैसले से पहले 'सेफ मोड' में विभाग*
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, निदेशालय की कानूनी सेल (Legal Cell) ने इस पूरे मामले को लेकर अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) से विस्तृत कानूनी राय ली है।
माननीय उच्च न्यायालय के संभावित निर्णय की शत-प्रतिशत अनुपालना सुनिश्चित करने और किसी भी कानूनी पेच से बचने के लिए विभाग ने अपनी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली हैं।
माना जा रहा है कि कोर्ट का फैसला आते ही विभाग इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर सकता है।
*11,500 पदों पर हुआ था प्रमोशन, बढ़ेगी शिक्षकों की धड़कनें*
ध्यातव्य है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने पूर्व में लगभग 11,500 पदों पर व्याख्याताओं और प्रधानाध्यापकों को उप प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नत किया था। साथ ही 5365 प्रधानाचार्य भी एक साल से पदस्थापन के इंतजार में है ।
इतने बड़े पैमाने पर हुई डीपीसी के निरस्त होने की आहट से प्रदेश के शिक्षा जगत और शिक्षक संगठनों में हड़कंप मच गया है। राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम ने इसके विरोध में आन्दोलन तेज कर दिया है।ओर हाल ही में शिक्षा मंत्री के विधान सभा क्षेत्र रामगंज मंडी कोटा में विशाल रैली, अर्थी यात्रा निकाली थी।ओर विभाग ओर राज्य सरकार को चेतावनी दी थी।
*क्या होगा अगला कदम?*
यदि यह डीपीसी निरस्त होती है, तो विभाग को कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार एक संशोधित वरिष्ठता सूची (Revised Seniority List) तैयार करनी होगी।
इसके बाद नए सिरे से रिव्यू डीपीसी (Review DPC) की जाएगी, जिससे वर्तमान में कार्यरत कई वाइस प्रिंसिपल्स की रैंकिंग और पोस्टिंग प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
शिक्षा शिक्षक एवं शिक्षार्थी विरोधी काले आदेशों की होली जलाई जायेगी और समय पर न्यायालय में पैरवी नहीं करने हेतु उक्त शिक्षक विरोधी कृत्य को चुनौती दी जाएगी।इस पीड़ा में संगठन पीड़ितों के साथ हैं।
डबल इंजन वाली राजस्थान सरकार पूरी तरह फेल हो गई हैं और यू टर्न में माहिर हैं 13 माह से यथा स्थान पदोन्नति पर प्रधानाचार्य , उप प्रधानाचार्य यथा स्थान कार्यरत हैं उन्हें स्कूलों में नहीं भेज कर न्यायालय प्रकरण का बहाना करके रिवर्ट किया जा सकता है यह बहुत ही दुखद स्थिति है। हमारी सरकार है समय पर चेताना हमारा फ़र्ज़ है शिक्षकों की बात माने तो अच्छा है वरना समय आने पर जनता फैसला कर देगी।
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