शिक्षा, नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्यपाल के सलाहकार एवं पुर्व कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी का किया सम्मान
शिक्षक ही वो शिल्पकार है जो देश की भावी पीढी एवं व्यक्तित्व का निर्माण करता है - प्रो. सोडाणी
शिक्षक देश का शिल्पकार - नई शिक्षा नीति युग की मांग - प्रो. सोडाणी
संगति, अनुशासन और संस्कृति, निखारते हैं व्यक्तित्व को - सारंगदेवोत
समग्र विकास के लिए खेलकूद जरूरी - प्रो. सारंगदेवोत
उदयपुर/ राजस्थान विद्यापीठ के संघटक लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की ओर से आयोजित सात दिवसीय सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं खेलकूल प्रतियोगिता का आगाज मंगलवार को महाविद्यालय के खेल मैदान पर अतिथियों द्वारा संस्था का झण्डारोहरण किया।
इस अवसर पर आयोजित समारेाह में शिक्षा एवं नावाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पूर्व कुलपति एवं राज्यपाल के सलाहकार प्रो. कैलाश सोडाणी का कु लपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने माला, उपरणा, पगड़ी, स्मृति चिन्ह् एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर प्रो. सोडाणी ने कहा कि शिक्षक ही वो शिल्पकार है जो देश की भावी पीढी एवं व्यक्तित्व का निर्माण करता है। देश की प्रतिभा को जागृत करने की जिम्मेदारी उसी की है। आज हमारे देश में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के महाविद्यालय है और उसे बनाने वाला शिक्षक है। देश का राष्ट्र निर्माता एवं प्रगति का आधार स्तम्भ ही शिक्षक है। आज हमारे आईआईटी विद्यार्थियों की मांग विदेशों में बढ़ी है और इस वर्ष 62 प्रतिशत विद्यार्थियों का चयन हुआ है। उन्होंने कहा कि 21वीं शताब्दी पुरी तरह ज्ञान आधारित है जिसमे पास अधिक ज्ञान होगा वही राज करेगा। नई शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को स्वाध्याय, अनुशासन, विज्ञान, तकनीकी व खेलों को जीवन में अपनाकर आधुनिक और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। उन्होने कहा कि विद्यापीठ ने शिक्षा के क्षेत्र मंें गुणवत्ता का आधार पर देश ही विदेशों में भी अपनी ख्याति अर्जित की है जिसका श्रेय यहॉ के कुलपति एवं कार्यकर्ताओं को जाता है। शिक्षा ही विश्वविद्यालय की रीढ की हड्डी है अगर वो वोटिवेशन के साथ काम करते है तो उनकी ताकत दस गुना बढ जाती है उसी के अनुपात में विवि आगे बढती है।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस. एस. सारंगदेवोत ने कहा कि प्रो. सोडाणी पिछले 50 वर्षो से शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान कर रहे है और जो निरंतर जारी है। विद्यापीठ की विकास यात्रा में भी डॉ. सोडाणी का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होने कहा कि जीवन की विकास यात्रा में सुसंगत जरूरी है उसी के आधार पर व्यक्ति का जीवन तर जाता है। ज्ञानवान संगति जीवन को प्रकाशित करती है।
प्रो. सारंगदेवोत ने विद्यार्थियों का आव्हान किया कि समग्र विकास के लिए शैक्षणिक गतिविधियों के साथ साथ महाविद्यालय द्वारा आयोजित सह-शैक्षणिक गतिविधियों में भी भाग लेना जरूरी है जिससे शरीर, स्वस्थ एवं तंदुरस्त रहेगा। खेल से टीम भावना से काम करने, नेतृत्व क्षमता व धैर्यता के साथ आगे बढ़ने की क्षमता विकसित होती है।
प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्य प्रो. सरोज गर्ग ने बताया कि सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रम में मेहंदी, एकाभिनय, विचित्र वेषभूषा, आशुभाषण, रंगोली, युगल एवं समूह नृत्य, फेस पेंटिंग, काव्य पाठ, मांडना, नेल आर्ट, विदाउट गैस कुकिंग, प्रश्नोत्तरी, एकल गीतदृनृत्य तथा मिस्टर एवं मिस चयन सहित विविध प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी।
खेल प्रभारी डॉ. रोहित कुमावत ने बताया कि खेलकूद इवेंट्स - कबड्डी, बैडमिंटन, कैरम, शतरंज, 100, 200, 400 मीटर दौड़, रिले रेस, तश्तरी फेंक, भाला फेंक, गोला फेंक आदि प्रतियोगिताएँ छात्र, छात्राओं की पृथक श्रेणियों में होंगी।
कार्यक्रम में प्रो. सरोज गर्ग, डॉ. युवराज सिंह राठौड़, डॉ. रचना राठौड, डॉ. अमी राठौड, डॉ. बलिदान जैन, डॉ. बीएल श्रीमाली, डॉ. अमीत बाहेती, डॉ. निवेदिता, डॉ. बबीता रशीद, डॉ. अनिता कोठारी, डॉ. रोहित कुमावत, डॉ. हरीश चौबीसा, डॉ. अमित दवे, डॉ. हरीश मेनारिया सहित संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
संचालन डॉ. हरीश चौबीसा ने किया जबकि आभार डॉ. रचना राठौड ने जताया।
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