बांसवाड़ा।राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा फीस में भारी वृद्धि किए जाने से जनजाति परिक्षेत्र बांसवाड़ा के गरीब और बीपीएल परिवारों पर बड़ा आर्थिक बोझ आ गया है। महंगाई के दौर में परीक्षा शुल्क बढ़ोतरी को अभिभावक “कंगाली में आटा गीला” जैसी स्थिति बता रहे हैं। जिले के 38,000 से अधिक विद्यार्थी इस निर्णय से प्रभावित होंगे।

600 से बढ़कर 850 रुपए परीक्षा शुल्क

राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र चौधरी ने बताया कि बोर्ड द्वारा सैद्धांतिक परीक्षा शुल्क को 600 से सीधे 850 रुपए कर दिया गया है, जबकि प्रायोगिक परीक्षा का शुल्क 100 से बढ़ाकर 200 रुपए कर दिया गया है।
चौधरी ने इसे अनुचित और मनमाना फैसला बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब जनजाति विद्यार्थियों से वसूली गई इस राशि का उपयोग बोर्ड कर्मचारियों को हज़ारों रुपए वार्षिक बोनस देने में किया जा रहा है, जबकि मूल्यांकन, निरीक्षण सहित कई बोर्ड कार्यों का भुगतान समय पर नहीं किया जाता और अनावश्यक मदों में 20% तक कटौती कर दी जाती है।

नवीन कार्यकारिणी में जनजाति क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने की मांग

संघ ने बोर्ड की नई कार्यकारिणी में जनजाति परिक्षेत्र बांसवाड़ा से अध्यक्ष व सदस्यों को शामिल करने की मांग की है।
चौधरी ने कहा कि वर्षों से नई कार्यकारिणी का गठन नहीं किया गया और प्रशासक के आधार पर एकतरफा, विद्यार्थी-विरोधी निर्णय लिए जा रहे हैं।

2026-27 से सभी विद्यार्थियों को भरने होंगे 850 रुपए

शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के अनुसार सत्र 2026-27 से नियमित और स्वयंपाठी दोनों प्रकार के विद्यार्थियों को 850 रुपए परीक्षा शुल्क देना होगा, जबकि प्रायोगिक शुल्क 200 रुपए होगा।
यह फैसला जनजाति विद्यार्थियों को पढ़ाई से दूर करने जैसा षड्यंत्र बताया जा रहा है।

फिलहाल –
• नियमित विद्यार्थी: 600 रुपए
• स्वयंपाठी: 650 रुपए
• प्रायोगिक: 100 रुपए
वसूले जा रहे थे।

20 लाख विद्यार्थियों पर असर

बोर्ड के अनुसार प्रश्नपत्र मुद्रण, मूल्यांकन और परीक्षा केंद्र प्रबंधन में बढ़ते खर्च के कारण यह शुल्क वृद्धि आवश्यक है।
अब तक बोर्ड को परीक्षा शुल्क से करीब 130 करोड़ रुपए की आय होती है। शुल्क बढ़ने से आय बढ़ेगी, लेकिन भारी असर राज्य भर के 20 लाख अभिभावकों पर होगा।

छात्रों और अभिभावकों की नाराज़गी

स्थानीय विद्यार्थी नारायण लाल चरपोटा ने कहा कि कोचिंग और किताबों की कीमतें पहले ही बढ़ी हुई हैं, अब परीक्षा शुल्क में वृद्धि से पढ़ाई आम परिवारों के लिए और कठिन हो जाएगी।

नवसृजित ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच धीरजमल ने कहा कि गरीब जनजाति बच्चों के लिए यह सीधा आर्थिक बोझ है और यह निर्णय बिना सहमति के पहली बार लिया गया है, जिससे बालिका शिक्षा पर विपरीत असर पड़ेगा।

बीपीएल जनजाति परिवारों के लिए राहत योजना लागू करने की मांग

रajasthan शिक्षक संघ सियाराम के प्रदेश प्रशासनिक अध्यक्ष सियाराम शर्मा ने सरकार से मांग की कि परीक्षा शुल्क बढ़ोतरी के साथ जनजाति बीपीएल वर्ग के लिए पुनर्भरण राहत योजना लागू की जाए, ताकि कोई भी कमजोर विद्यार्थी परीक्षा से वंचित न रहे।

12 फरवरी से होंगी बोर्ड परीक्षाएं — संशोधित शिविरा पंचांग जारी

शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा संशोधित शिविरा पंचांग जारी किया गया है। इसके अनुसार –

नई परीक्षा तिथियां

• 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा: 12 फरवरी – 12 मार्च
• कक्षा 9 व 11: 10 मार्च – 25 मार्च
• कक्षा 5 व 8: अप्रैल 2026 की बजाय 12 मार्च से पहले
• कक्षा 3, 4, 6, 7: मार्च में प्रस्तावित
• द्वितीय आकलन: दिसंबर की बजाय नवंबर
• तृतीय आकलन: अप्रैल की बजाय मार्च

जिले में शिक्षा विभाग ने नए कार्यक्रम के अनुसार तैयारी शुरू कर दी है और स्कूल स्तर पर भी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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